भाई परमजीत सिंह भिऔरा की रिहाई याचिका पर बुरैला जेल के जेलर ने 5वीं बार रिमाइंडर भेजा

दिल्ली: लगभग 30 वर्षों से अधिक समय से जेल में बंद भाई परमजीत सिंह भिऔरा की रिहाई संबंधी याचिका पर बुरैल जेल के अधीक्षक ने पंजाब सरकार को पांचवीं बार रिमाइंडर भेजा है। इसके बावजूद सरकार द्वारा अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे सिख संगठनों और पंथक हलकों में रोष व्याप्त है। शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने कहा कि भाई परमजीत सिंह भिऔरा के खिलाफ दर्ज सभी मामले समाप्त हो चुके हैं। जेल रिकॉर्ड के अनुसार वह 33 वर्षों से अधिक समय से कैद में हैं और उनका जेल के भीतर आचरण भी अत्यंत संतोषजनक रहा है। इसी कारण जेल प्रशासन ने स्वयं उन्हें समयपूर्व रिहाई के लिए आवेदन करने की सलाह दी थी, लेकिन उनकी याचिका कई महीनों से पंजाब सरकार के पास लंबित पड़ी है।
उन्होंने कहा कि जब जेल प्रशासन को पांचवीं बार रिमाइंडर भेजने के लिए मजबूर होना पड़े, तो यह पंजाब सरकार की उदासीनता, लापरवाही और न्याय के प्रति असंवेदनशीलता का स्पष्ट प्रमाण है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के सभी मामले समाप्त हो चुके हों और जिसका जेल रिकॉर्ड भी संतोषजनक हो, उसकी रिहाई पर लगातार निर्णय टालना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सभी बंदी सिखों की रिहाई सिख पंथ की लंबे समय से चली आ रही जायज मांग है, लेकिन प्रत्येक सरकार ने इस मुद्दे को राजनीतिक दृष्टि से देखा और न्याय देने के बजाय टालमटोल की नीति अपनाई। उनका कहना था कि यदि न्याय केवल रिमाइंडरों और सरकारी फाइलों तक सीमित रह जाए, तो संवैधानिक समानता और मानवाधिकारों के दावे अपना महत्व खो देते हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने भी बंदी सिखों के मामले में कई बार पंजाब सरकार को पत्र लिखे, लेकिन न तो किसी पत्र का उत्तर दिया गया और न ही मुलाकात के लिए समय दिया गया। उन्होंने कहा कि सिखों से जुड़े इतने संवेदनशील मामलों पर सरकार की चुप्पी उसकी मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने पंजाब सरकार से अपील की कि भाई परमजीत सिंह भिऔरा सहित सभी बंदी सिखों की रिहाई से जुड़े लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा किया जाए। उन्होंने कहा कि "न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के समान है," इसलिए अब समय आ गया है कि पंजाब सरकार अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाते हुए इस मामले में तत्काल निर्णय ले।
04:18 pm 16/07/2026