
दिल्ली: यदि एक साल तक सोना नहीं खरीदा गया तो आभूषण उद्योग से जुड़े हुए 3.5 करोड़ कामगारों एवं व्यवसाइयों जिनमें स्वर्णकार, व्यापारी एवं उनसे जुड़े हुए कामगार शामिल हैं, की रोजी रोटी पर मंडरा रहा है खतरा । कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सूरजेवाला ने स्वर्णकार उद्योग के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में जानकारी दी कि 90 फीसदी आभूषण उद्योग एमएसएमई के अंतर्गत आता है सत्ता के शीर्ष से वर्मा स्वर्णकार संघ एवं उनसे जुड़े लोगों की रोजी रोटी पर खतरे का फरमान है ।
सोने के आभूषण व जेवर भारत की सांस्कृतिक विरासत की पहचान हैं, सामाजिक रीति-रिवाजों का अभिन्न हिस्सा हैं तथा धार्मिक परंपराओं के निर्वहन में सौभाग्य, समृद्धि और शुभता का प्रतीक हैं। भारतीय समाज में स्वर्ण आभूषण न केवल करोड़ों माताओं व बहन-बेटियों के लिए मुश्किल की घड़ी में आर्थिक सुरक्षा कवच हैं, बल्कि उल्लास, पवित्रता, उत्सव के माहौल व वैभव की पहचान भी हैं। यही नहीं, गाँव से शहर तक स्वर्ण आभूषण यानी ज्वेलरी व सुनार के व्यापार में लगे छोटे-छोटे दुकानदारों, व्यापारियों, कारीगरों, कामगारों, दस्तकारों की रोजी-रोटी का एकमात्र धंधा भी है। देश का 90% से अधिक ज्वेलरी तथा आभूषण का काम दुकानदारों-सुनारों-MSME सेक्टर में है, जिसमें देशभर में 3.5 करोड़ (3,50,00,000) लोग जुड़े हैं।
13 मई, 2026 को एक और ‘‘ज्वेलरी उद्योग विरोधी वज्रपात’’ गिराते हुए सरकार ने सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी सीधे 6% से बढ़ाकर 15% कर डाली। मतलब, एक तरफ तो सोना व सोने के आभूषण न खरीदने का फरमान देकर 3.5 करोड़ लोगों की रोजी-रोटी पर लात मारी, तो दूसरी ओर सोने की तस्करी करने वाले तस्कर माफियाओं की काली कमाई का इंतजाम भी कर दिया। भारत के कुल ‘‘सकल घरेलू उत्पाद’’ यानी जीडीपी में ज्वेलरी सेक्टर का योगदान 7% से अधिक है! वहीं देश के कुल व्यापारिक निर्यात में इस क्षेत्र के हिस्सेदारी 12% तक है और सबसे बड़ी बात कि इसमें 85% से अधिक निर्यातक (एक्सपोर्टर) MSME कैटेगरी में आते हैं!सोने के आभूषण कारोबार में गांवों से लेकर शहरों और महानगरों तक छोटे ज्वेलर्स, व्यापारी, सुनार और गलाई-पकाई-छिलाई-गढ़ाई से लेकर पॉलिश करने वाले लाखों कारीगर लगे हैं और करोड़ों परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी है!
Gems and jewellery सेक्टर भारत की सबसे बड़ी रोजगार देने वाली इंडस्ट्रीज में से एक है, 50 लाख से अधिक लोगों को ये सेक्टर रोजगार देता है, जबकि देश में करीब 3.5 करोड़ लोगों की नौकरी व रोजगार ज्वेलरी सेक्टर के इकोसिस्टम पर ही निर्भर है! एक साल की रोजगार बंदी में ये पूरा ज्वेलरी सेक्टर ही खत्म हो जाएगा।सरकारी आंकड़ों की ही बात करें तो जुलाई 2020 में ‘उद्यम पोर्टल’ के लॉन्च होने के बाद से 15 अगस्त 2025 तक देश भर में 75,082 रजिस्टर्ड MSMEबंद (De-registered/Shut down) हो चुके हैं! जबकि एक रिपोर्ट के मुताबिक 2015-16 से 2022-23 के दौरान असंगठित विनिर्माण क्षेत्र (अनोर्गनाइज्ड सेक्टर) के लगभग 18 लाख उद्यम बंद हुए हैं, जिससे करीब 54 लाख लोगों का रोटी-रोजगार छिन गया!
केवल 2024-25 में ही (फरवरी 2025 तक) 35,567 से अधिक MSME बंद हुए हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में MSME की तालाबंदी में हुई बहुत अधिक वृद्धि है और इन बंद हुई यूनिट्स के कारण 3 लाख से अधिक लोगों का काम धंधा खत्म हो गया! ऐसे में सोने के आभूषण निर्माण कारोबार को ठप्प करके करोड़ों लोगों की ‘‘आजीविका का गला घोंटना’’ न केवल आर्थिक संकट और बेरोजगारी की तबाही बढ़ाना है, बल्कि भाजपा का किया क्रूर ‘‘अमानवीय अत्याचार’’ भी है! सोने की इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से जुड़े स्मगलिंग बढ़ने के सीधे खतरे को ऐसे समझिए कि- वित्त वर्ष 2024-25 में सरकारी एजेंसियों ने ही करीब 3005 मामलों में लगभग 2.6 मीट्रिक टन (2,600 Kg.) से अधिक सोना जब्त किया है मगर ये सरकारी आंकड़ा तो स्मगलिंग सोने का छोटा सा हिस्सा है, ज्वेलरी सेक्टर के विशेषज्ञों की मानें तो सालाना करीब 10 से 15 मीट्रिक टन से अधिक सोने की स्मगलिंग रही है, जो अब और अधिक बढ़ने का रास्ता सत्ता में बैठी भाजपा ने खोल दिया है ! सरकार द्वारा थोपी नोटबंदी, एक्साइज ड्यूटी के काले फरमान, गलत जीएसटी और हड़बड़ी में लागू किए अनिवार्य हालमार्किंग से पहले ही ज्वेलरी सेक्टर की कमर टूट चुकी है और अब एक साल की ये ‘अघोषित तालाबंदी’ और सोने की स्मग्लिंग को बढ़ावा इस सेक्टर के लिए ‘‘डेथ वारंट’’ जैसा है ।
अगर गोल्ड इंपोर्ट कम करना ही मकसद है, तो सरकार ने देश में गोल्ड ज्वेलरी की ‘‘डिमांड सप्रेशन’’ की बजाय देश में पहले से ही मौजूद सोने को मोबिलाइज करने और ‘‘बुलियन बैंकिंग फ्रेमवर्क’’ बनाने की नीति पर काम क्यों नहीं किया? एक तरफ प्रधानमंत्री जनता को स्वर्ण आभूषण न खरीदने की सलाह दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ मोदी सरकार स्वयं सोना खरीद रही है? क्या यह सही नहीं कि मोदी सरकार व आरबीआई की सोवरेन गोल्ड होल्डिंग, जो सितंबर 2025 में 794.64 मीट्रिक टन थी, वह मार्च, 2026 में बढ़कर 880.52 मीट्रिक टन हो गई हैं? क्या यह सही नहीं कि 7 महीने में मोदी सरकार ने स्वयं 85.88 मीट्रिक टन सोना खरीदा है? तो फिर आम जनमानस पर पाबंदी क्यों?क्या अब 90% MSME व छोटे दुकानदारों में जुड़ा ज्वेलरी उद्योग भी अगले 1 साल में तालाबंदी का शिकार नहीं हो जाएगा? क्या ज्वेलरी सेक्टर का पूरा मैदान साफ कर अब इसे भी बड़े-बड़े कॉर्पोरेट मित्रों को देने की मंशा है?