नई दिल्ली 13, Apr 2026

लेख

1 - कैसे होंगे केरल के सियासी समीकरण

2 - कौन सा खेला खेलेंगी ममता बैनर्जी पश्चिम बंगाल में

3 - धर्मेंद्र हुए पंचतत्व में विलीन

4 - बिहार की जानता ने फिर एक बार साबित कर दिया कि हथेली में सरसों नहीं उगाया जा सकता

5 - जेट सिक्योरिटी के साथ विसर्जन के लिए निकला लाल बाग का राजा

6 - खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे

7 - एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य के लिये योग

8 - ऑपरेशन सिंदूर न्याय की अखंड प्रतिज्ञा

9 - देश के लोकतंत्र को मज़बूत करने के लिए बाबा साहिब का अमूल्य योगदान

10 - दिल्ली सरकार के 100,000करोड़ से क्षेत्र में उन्नति की संभावनाओं को मिलेगी मजबूती

11 - दशक के बाद बिखरा झाड़ू 27 साल बाद खिला कमल फिर एक बार

12 - स्वर्णिम भारत,विरासत और इतिहास पर आधारित इस बार का गणतंत्र दिवस समारोह

13 - महाराष्ट्र में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

14 - तमाम कवायदों के बावजूद बीजेपी तीसरी बार हरियाणा में सरकार बनाने को अग्रसर

15 - श्रॉफ बिल्डिंग के सामने कुछ इस अंदाज से हुआ लाल बाग के राजा का स्वागत

16 - प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही शुरू हुआ बीजेपी का सदस्यता अभियान

17 - देश के सीमांत इलाकों में तैनात सैनिकों में भी दिखा 78 वें स्वतंत्रता दिवस का जज्बा

18 - २०२४-२५ के बजट को लेकर सियासत विपक्ष आमने सामने

19 - एक बार फिर तीसरी पारी खेलेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी

20 - केजरिवाल के जमानत पर रिहा होने पर शुरु हुई नई कवायदें

21 - मतदान की दर धीमी आखिर माजरा क्या

22 - क्यूं चलाना चाहते हैं केजरीवाल जेल से सरकार

23 - 2004-14 के मुकाबले 2014-23 में वामपंथी उग्रवाद-संबंधित हिंसा में 52 प्रतिशत और मृतकों की संख्या में 69 % कमी

24 - कर्तव्य पथ दिखी शौर्य की झलक

25 - फ़ाइनली राम लल्ला अपने आशियाने में हो गये हैं विराजमान

26 - राजस्थान का ऊँट किस छोर करवट लेगा

27 - एक बार फिर गणपति मय हुई माया नगरी मुंबई

28 - पत्रकारिता की आड़ में फर्जीवाड़े के खिलाफ एनयूजे(आई) छेड़ेगी राष्ट्रव्यापी मुहीम

29 - भ्रष्टाचार, तुस्टिकरण एवं परिवारवाद विकास के दुश्मन

30 - एक बार फिर शुरू हुई पश्चिम बंगाल में रक्त रंजित राजनीति

31 - नहीं होगा बीजेपी के लिऐ आसान कर्नाटक में कांग्रेस के चक्रव्यूह को भेद पाना

32 - रद्द करने के बाद भी नहीं खामोश कर पायेंगे मेरी जुबान

33 - उत्तर-पूर्वी राज्यों के अल्पसंख्यकों ने एक बार फिर बीजेपी पर जताया भरोसा

34 - 7 लाख तक की आमदनी टैक्स फ्री

35 - गुजरात में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

36 - बीजेपी आप में काँटे की टक्कर

37 - सीमित व्यवस्था के बावजूद धूम-धाम से हो रही है छट माइय्या की पूजा

38 - जहाँ आज भी पुजा जाता है रावण

39 - एक बार फिर माया नगरी हुई गणपतिमय

40 - एक बार फिर लहराया तिरंगा लाल किले की प्राचीर पर

41 - बलवाइयों एवं जिहादियों के प्रति पनपता सहनभूतिक रुख

42 - आजादी के अमृत महोत्सव की कड़ी के रूप में मनाया जा रहा है 8 वाँ विश्व योग दिवस

43 - अपने दिग्गज नेताओं को नहीं संभाल पाई कांग्रेस पार्टी

44 - ज्ञान व्यापी मस्जिद के वजु घर में शिवलिंग मिलने से विवाद गहराया

45 - आखिर क्यूँ मंजूर है इन्हे फिर से वही बंदिशें.....

46 - पाँच में से चार राज्यों में लहराया कमल का परचम

47 - पेट्रोलियम, फर्टिलाइजर एवं खाद्य सामाग्री पर मिलने वाली राहत में लगभग 27 फीसदी की कटौती

48 - जे&के पुलिस के सहायक उप निरीक्षक बाबूराम शर्मा मरणोपरांत अशोक चक्र से संमानित

49 - आखिर कौन होंगे सत्ता के इस महाभोज के सिकंदर

50 - ठेके आन फिटनेस सेंटर ऑफ छा गए केजरीवाल जी तुस्सी

राष्ट्रपति की पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान राज्य सरकार का रवैया संवैधानिक प्रोटोकॉल के विपरीत

पश्चिम बंगाल में महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के दौरे के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर मालदा उत्तर लोकसभा क्षेत्र के सांसद तथा पश्चिम बंगाल भाजपा के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष  खगेन मुर्मु ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया। प्रेस वार्ता की शुरुआत में वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रपति के हालिया पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान राज्य सरकार का व्यवहार न केवल संवैधानिक प्रोटोकॉल के विपरीत था, बल्कि यह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तथा पूरे आदिवासी समाज के प्रति अनादर का परिचायक है।

भारत के राष्ट्रपति देश के 140 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं और संविधान के अनुसार देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन होते हैं। उनके अनुसार जब ऐसी महान हस्ती पश्चिम बंगाल का दौरा करती हैं, तो उन्हें उचित प्रोटोकॉल और सम्मान के साथ स्वागत करना राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी होती है। लेकिन वास्तविकता यह रही कि न केवल मुख्यमंत्री हवाई अड्डे पर उपस्थित नहीं थीं, बल्कि राज्य सरकार का कोई वरिष्ठ प्रतिनिधि भी मौजूद नहीं था। उन्होंने इस घटना को पश्चिम बंगाल के लिए एक शर्मनाक अध्याय बताया।

राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु एक अंतरराष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन में भाग लेने के लिए सिलीगुड़ी आई थीं, जो किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं था। इसके बावजूद सम्मेलन के निर्धारित स्थान के लिए अनुमति नहीं दी गई और बार-बार स्थान परिवर्तन करने के लिए मजबूर किया गया। अंततः उन्हें बागडोगरा तक जाना पड़ा। खगेन मुर्मु के अनुसार इस प्रकार का व्यवहार न केवल राष्ट्रपति का बल्कि पूरे देश के आदिवासी समाज का अपमान है। जब द्रौपदी मुर्मु को देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के रूप में चुना गया, तब पूरे देश का आदिवासी समाज गर्व और खुशी से भर गया था। लेकिन पश्चिम बंगाल के दौरे के दौरान जो परिस्थितियाँ बनीं, उससे उस सम्मान को ठेस पहुँची है। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस की सरकार आदिवासी समाज को वास्तविक सम्मान देने के बजाय केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती रही है।

राज्य में आदिवासियों के साथ अत्याचार और उपेक्षा की अनेक घटनाएँ सामने आई हैं—जैसे फांसीदेवा में एक गर्भवती महिला पर हमला, आदिवासी महिलाओं पर अत्याचार तथा विभिन्न क्षेत्रों में वंचना की घटनाएँ। उनके अनुसार ये घटनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि राज्य में आदिवासी समाज की सुरक्षा और सम्मान आज भी गंभीर प्रश्नों के घेरे में है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार आदिवासी, राजबंशी, मतुआ और अन्य समुदायों को केवल चुनाव के समय महत्व देती है, लेकिन वास्तव में उनके विकास के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाती। उन्होंने यह भी कहा कि जल, जंगल और जमीन पर अधिकार आदिवासियों का मूल अधिकार है, लेकिन पश्चिम बंगाल में उन्हें इन अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।

राष्ट्रपति के दौरे से संबंधित घटनाओं पर केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा रिपोर्ट तलब किए जाने के संदर्भ में खगेन मुर्मु ने कहा कि इस मामले की उचित जांच होनी चाहिए और राज्य सरकार को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उनके अनुसार देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आगे मांग की कि इस घटना के लिए राज्य की मुख्यमंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उनके अनुसार इस घटना में केवल राष्ट्रपति का ही नहीं बल्कि देश की करोड़ों आदिवासी महिलाओं और पूरे आदिवासी समाज का अपमान हुआ है।

खगेन मुर्मु ने बताया कि इस घटना के विरोध में राज्य के विभिन्न जिलों में आदिवासी समाज पहले ही सड़कों पर उतर चुका है और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहा है। उन्होंने कहा कि आगामी चुनावों में आदिवासी समाज इस अपमान का जवाब देगा और तृणमूल कांग्रेस को राजनीतिक रूप से अस्वीकार करेगा।

03:35 pm 08/03/2026

संपादक

डा. अशोक बड़थ्वाल

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