नई दिल्ली 11, Apr 2026

लेख

1 - कैसे होंगे केरल के सियासी समीकरण

2 - कौन सा खेला खेलेंगी ममता बैनर्जी पश्चिम बंगाल में

3 - धर्मेंद्र हुए पंचतत्व में विलीन

4 - बिहार की जानता ने फिर एक बार साबित कर दिया कि हथेली में सरसों नहीं उगाया जा सकता

5 - जेट सिक्योरिटी के साथ विसर्जन के लिए निकला लाल बाग का राजा

6 - खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे

7 - एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य के लिये योग

8 - ऑपरेशन सिंदूर न्याय की अखंड प्रतिज्ञा

9 - देश के लोकतंत्र को मज़बूत करने के लिए बाबा साहिब का अमूल्य योगदान

10 - दिल्ली सरकार के 100,000करोड़ से क्षेत्र में उन्नति की संभावनाओं को मिलेगी मजबूती

11 - दशक के बाद बिखरा झाड़ू 27 साल बाद खिला कमल फिर एक बार

12 - स्वर्णिम भारत,विरासत और इतिहास पर आधारित इस बार का गणतंत्र दिवस समारोह

13 - महाराष्ट्र में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

14 - तमाम कवायदों के बावजूद बीजेपी तीसरी बार हरियाणा में सरकार बनाने को अग्रसर

15 - श्रॉफ बिल्डिंग के सामने कुछ इस अंदाज से हुआ लाल बाग के राजा का स्वागत

16 - प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही शुरू हुआ बीजेपी का सदस्यता अभियान

17 - देश के सीमांत इलाकों में तैनात सैनिकों में भी दिखा 78 वें स्वतंत्रता दिवस का जज्बा

18 - २०२४-२५ के बजट को लेकर सियासत विपक्ष आमने सामने

19 - एक बार फिर तीसरी पारी खेलेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी

20 - केजरिवाल के जमानत पर रिहा होने पर शुरु हुई नई कवायदें

21 - मतदान की दर धीमी आखिर माजरा क्या

22 - क्यूं चलाना चाहते हैं केजरीवाल जेल से सरकार

23 - 2004-14 के मुकाबले 2014-23 में वामपंथी उग्रवाद-संबंधित हिंसा में 52 प्रतिशत और मृतकों की संख्या में 69 % कमी

24 - कर्तव्य पथ दिखी शौर्य की झलक

25 - फ़ाइनली राम लल्ला अपने आशियाने में हो गये हैं विराजमान

26 - राजस्थान का ऊँट किस छोर करवट लेगा

27 - एक बार फिर गणपति मय हुई माया नगरी मुंबई

28 - पत्रकारिता की आड़ में फर्जीवाड़े के खिलाफ एनयूजे(आई) छेड़ेगी राष्ट्रव्यापी मुहीम

29 - भ्रष्टाचार, तुस्टिकरण एवं परिवारवाद विकास के दुश्मन

30 - एक बार फिर शुरू हुई पश्चिम बंगाल में रक्त रंजित राजनीति

31 - नहीं होगा बीजेपी के लिऐ आसान कर्नाटक में कांग्रेस के चक्रव्यूह को भेद पाना

32 - रद्द करने के बाद भी नहीं खामोश कर पायेंगे मेरी जुबान

33 - उत्तर-पूर्वी राज्यों के अल्पसंख्यकों ने एक बार फिर बीजेपी पर जताया भरोसा

34 - 7 लाख तक की आमदनी टैक्स फ्री

35 - गुजरात में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

36 - बीजेपी आप में काँटे की टक्कर

37 - सीमित व्यवस्था के बावजूद धूम-धाम से हो रही है छट माइय्या की पूजा

38 - जहाँ आज भी पुजा जाता है रावण

39 - एक बार फिर माया नगरी हुई गणपतिमय

40 - एक बार फिर लहराया तिरंगा लाल किले की प्राचीर पर

41 - बलवाइयों एवं जिहादियों के प्रति पनपता सहनभूतिक रुख

42 - आजादी के अमृत महोत्सव की कड़ी के रूप में मनाया जा रहा है 8 वाँ विश्व योग दिवस

43 - अपने दिग्गज नेताओं को नहीं संभाल पाई कांग्रेस पार्टी

44 - ज्ञान व्यापी मस्जिद के वजु घर में शिवलिंग मिलने से विवाद गहराया

45 - आखिर क्यूँ मंजूर है इन्हे फिर से वही बंदिशें.....

46 - पाँच में से चार राज्यों में लहराया कमल का परचम

47 - पेट्रोलियम, फर्टिलाइजर एवं खाद्य सामाग्री पर मिलने वाली राहत में लगभग 27 फीसदी की कटौती

48 - जे&के पुलिस के सहायक उप निरीक्षक बाबूराम शर्मा मरणोपरांत अशोक चक्र से संमानित

49 - आखिर कौन होंगे सत्ता के इस महाभोज के सिकंदर

50 - ठेके आन फिटनेस सेंटर ऑफ छा गए केजरीवाल जी तुस्सी

असंगठित श्रमिकों के अधिकारों पर राष्ट्रीय मंथन

दिल्ली: असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा और नीतिगत चुनौतियों पर केंद्रित एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 'कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया' में भारतीय रेलवे माल गोदाम श्रमिक संघ (बीआरएमजीएसयू) द्वारा किया गया। सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ), राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) और श्रम मंत्रालय के प्रतिनिधियों सहित श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के लेबर वेलफेयर असिस्टेंट श्री संदीप चौरसिया, एटीएसईसी के श्री संजय कुमार मिश्रा और विश्वजीत घोष जैसे प्रमुख वक्ताओं ने भाग लिया। इन विशेषज्ञों ने श्रमिकों की स्थिति, नीतिगत सुधारों और जमीनी वास्तविकताओं पर व्यापक चर्चा की।सम्मेलन को संबोधित करते हुए आईएलओ के मुख्य तकनीकी अधिकारी जियोवानी सोलेदाद ने कहा कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन वे अब भी औपचारिक मान्यता और संस्थागत सुरक्षा से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधित्व की कमी और सामूहिक सौदेबाजी के अभाव के कारण ये श्रमिक शोषण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। सोलेदाद ने रेखांकित किया, "अधिकांश श्रमिकों के पास न तो औपचारिक अनुबंध हैं और न ही सामाजिक सुरक्षा (जैसे स्वास्थ्य बीमा, पेंशन या दुर्घटना मुआवजा), जिससे वे किसी भी आर्थिक संकट में अत्यधिक असुरक्षित हो जाते हैं।"
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपर्याप्त आय के कारण परिवारों को बाल श्रम जैसी विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जिससे गरीबी का दुष्चक्र बना रहता है। आईएलओ द्वारा झारखंड और राजस्थान में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संगठित प्रयासों से ही श्रमिकों को सरकारी योजनाओं और बेहतर कार्य परिस्थितियों तक पहुँच मिल सकती है।राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों को मानवाधिकार के रूप में देखना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए श्रम कानूनों के प्रति श्रमिकों में जागरूकता और उत्साह बढ़ा है। लगभग 43 करोड़ श्रमिकों को इन योजनाओं से लाभ पहुँचाने का लक्ष्य है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इन कानूनों के प्रति जागरूकता फैलाना और श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बीआरएमजीएसयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष परिमल कांती मंडल ने श्रमिकों की प्रमुख मांगों—निश्चित वेतन, नियुक्ति पत्र और श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन—को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को एकजुट कर उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ना है, ताकि उन्हें सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां और स्थायी आजीविका मिल सके। सम्मेलन में विभिन्न वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने, उनके प्रतिनिधित्व को मजबूत करने और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बहु-स्तरीय सहयोग अनिवार्य है। वक्ताओं ने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के संवाद भविष्य में ठोस नीतिगत बदलाव और श्रमिकों के जीवन में वास्तविक सुधार का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

01:15 pm 09/04/2026

संपादक

डा. अशोक बड़थ्वाल

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समाचार

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2 - पार्षदों की ताकत कम करने के लिए ही एमसीडी कमिश्नर को 50 करोड़ तक का वित्तीय अधिकार दिया

3 - दिल्ली में अंतराष्ट्रीय फिल्म समारोह की वापसी

4 - असंगठित श्रमिकों के अधिकारों पर राष्ट्रीय मंथन

5 - दिल्ली देहात की परेशानियों को रखने के लिए दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पगड़ी बांधकर सम्मानित

6 - सरगना की गिरफ्तारी के बाद एटीएम धोखाधड़ी के 50 से भी अधिक मामलों का खुलासा

7 - दिल्ली विधानसभा जैसी हाई-सिक्योरिटी वाली जगह में गेट तोड़कर कार का अंदर घुसी

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13 - महज तीन महीनों में आम आदमी पार्टी के कार्यकताओं के खिलाफ 145 एफआईआर और 160 से ज्यादा गिरफ्तार

14 - एडवोकेट फुलका हुए भाजपा में शामिल

15 - एमसीडी की स्थायी समिति की बैठक से 72 घंटे पहले सभी सदस्यों को नोटिस देना अनिवार्य

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17 - 30 मार्च 1919 भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास की एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण तिथि

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19 - सड़क पर रोककर जबरन की जाती थी बकाया किस्त की वसूली

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