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दिल्ली बजट पर तीखी और विस्तृत प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने इसे “ट्रिपल इंजन सरकार के दो बजट में ट्रिपल धोखा” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बजट भूत, वर्तमान और भविष्य - तीनों के साथ विश्वासघात है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने “लंबी-लंबी बातों के जरिए धीरे से बड़ा झटका” दिया है।वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,03,700 करोड़ रुपये का बजट अनुमान पेश किया गया है, जिसमें 16,700 करोड़ रुपये कर्ज के माध्यम से जुटाने की योजना है। इसके अलावा एसएएससीआई योजना के तहत 2,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण लेने का भी प्रावधान है, पिछले वर्ष यह राशि 921 करोड़ था। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2025-26 के 1 लाख करोड़ रुपये के बजट में भी 15,000 करोड़ रुपये कर्ज से जुटाने की योजना थी, लेकिन 43 प्रतिशत से अधिक आवंटित बजट, जो विभिन्न परियोजनाओं और कार्यक्रमों पर खर्च होना था, वह खर्च ही नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य 97035.38 करोड़ था लेकिन 2025-26 के संसोधित अनुमान से स्पष्ट होता है कि सरकार 18,459 करोड़ रुपये सरकार जुटा ही नहीं सकी, जिसकी वजह से तमाम योजनायें केवल घोषणा तक ही सिमित रहा। उन्होंने कहा कि संसोधित अनुमान के आंकडें बताते है कि दिल्ली सरकार का फिसकल डेफिसिट 22 प्रतिशत से अधिक पहुँच गया है! अतः ऐसे बजट एफआरबीएम एक्ट का उलंग्न है।
केंद्र प्रायोजित योजनाओं से इस वर्ष 3,931.16 करोड़ रुपये राजस्व मिलने का अनुमान लगाया गया है, जो पिछले वर्ष के 4,127.82 करोड़ के अनुमान से काफी कम है। यह केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली के साथ भेदभाव के कांग्रेस के आरोपों को और मजबूत करता है। स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन के तहत 1,500 करोड़ रुपये की संभावित सहायता को भी उन्होंने “पुरानी घोषणा” बताया, जिसमें पिछले वर्ष भी कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। उन्होंने आगे कहा कि इस वर्ष जीएसटी और वेट के माध्यम से 3,200 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि पिछले वर्ष इसी मद में 8,136 करोड़ की ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई थी, जिस पर कांग्रेस ने सवाल उठाए थे। कुल कर राजस्व में भी 5,300 करोड़ रुपये की वृद्धि का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र से पर्याप्त सहयोग न मिलने के कारण दिल्ली की जनता पर करों का बोझ बढ़ाया जा रहा है और कर्ज लेकर बजट घोषणाएं की जा रही हैं, जिनमें से अधिकांश परियोजनाएं साल के अंत तक पूरी नहीं हो पातीं।
उन्होंने यह भी कहा कि सामान्य केंद्रीय अनुदान की राशि, जो पिछले वर्ष 7,968.01 करोड़ रुपये थी, घटकर इस वर्ष लगभग 3,931 करोड़ रह गई है। वहीं, स्टांप और रजिस्ट्रेशन से राजस्व संग्रह का लक्ष्य भी 2,000 करोड़ रुपये बढ़ाया गया है। आबकारी नीति पर लोक लेखा समिति (पीएसी) की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में मनीष सिसोदिया के निर्णयों से 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान की बात कही गई है। लेकिन यह रिपोर्ट सच्चाई उजागर करने से ज्यादा उसे छिपाने का प्रयास प्रतीत होती है, तभी इसे बजट के भारी-भरकम दस्तावेजों के बीच दबा दिया गया।
अनधिकृत कॉलोनियों के विकास के लिए वर्ष 2025-26 में आवंटित बजट का आधे से भी कम उपयोग किया गया। केंद्र की योजनाओं में भी समन्वय की कमी रही। आयुष्मान भारत, पीएम आवास योजना, पीएम-उषा, पीएमकेवीवाई और पीएम किसान आदि में या तो सहयोग नहीं मिला या प्राप्त धन का उपयोग नहीं किया गया। शहरी परिवहन, केंद्रीय सड़क निधि और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के लिए घोषित धनराशि भी प्राप्त नहीं हो सकी।