नई दिल्ली 31, May 2026

लेख

1 - रक्त रंजित राजनीति से मिली मुक्ति बंगाल में पहली बार निखरा कमल

2 - कैसे होंगे केरल के सियासी समीकरण

3 - कौन सा खेला खेलेंगी ममता बैनर्जी पश्चिम बंगाल में

4 - धर्मेंद्र हुए पंचतत्व में विलीन

5 - बिहार की जानता ने फिर एक बार साबित कर दिया कि हथेली में सरसों नहीं उगाया जा सकता

6 - जेट सिक्योरिटी के साथ विसर्जन के लिए निकला लाल बाग का राजा

7 - खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे

8 - एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य के लिये योग

9 - ऑपरेशन सिंदूर न्याय की अखंड प्रतिज्ञा

10 - देश के लोकतंत्र को मज़बूत करने के लिए बाबा साहिब का अमूल्य योगदान

11 - दिल्ली सरकार के 100,000करोड़ से क्षेत्र में उन्नति की संभावनाओं को मिलेगी मजबूती

12 - दशक के बाद बिखरा झाड़ू 27 साल बाद खिला कमल फिर एक बार

13 - स्वर्णिम भारत,विरासत और इतिहास पर आधारित इस बार का गणतंत्र दिवस समारोह

14 - महाराष्ट्र में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

15 - तमाम कवायदों के बावजूद बीजेपी तीसरी बार हरियाणा में सरकार बनाने को अग्रसर

16 - श्रॉफ बिल्डिंग के सामने कुछ इस अंदाज से हुआ लाल बाग के राजा का स्वागत

17 - प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही शुरू हुआ बीजेपी का सदस्यता अभियान

18 - देश के सीमांत इलाकों में तैनात सैनिकों में भी दिखा 78 वें स्वतंत्रता दिवस का जज्बा

19 - २०२४-२५ के बजट को लेकर सियासत विपक्ष आमने सामने

20 - एक बार फिर तीसरी पारी खेलेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी

21 - केजरिवाल के जमानत पर रिहा होने पर शुरु हुई नई कवायदें

22 - मतदान की दर धीमी आखिर माजरा क्या

23 - क्यूं चलाना चाहते हैं केजरीवाल जेल से सरकार

24 - 2004-14 के मुकाबले 2014-23 में वामपंथी उग्रवाद-संबंधित हिंसा में 52 प्रतिशत और मृतकों की संख्या में 69 % कमी

25 - कर्तव्य पथ दिखी शौर्य की झलक

26 - फ़ाइनली राम लल्ला अपने आशियाने में हो गये हैं विराजमान

27 - राजस्थान का ऊँट किस छोर करवट लेगा

28 - एक बार फिर गणपति मय हुई माया नगरी मुंबई

29 - पत्रकारिता की आड़ में फर्जीवाड़े के खिलाफ एनयूजे(आई) छेड़ेगी राष्ट्रव्यापी मुहीम

30 - भ्रष्टाचार, तुस्टिकरण एवं परिवारवाद विकास के दुश्मन

31 - एक बार फिर शुरू हुई पश्चिम बंगाल में रक्त रंजित राजनीति

32 - नहीं होगा बीजेपी के लिऐ आसान कर्नाटक में कांग्रेस के चक्रव्यूह को भेद पाना

33 - रद्द करने के बाद भी नहीं खामोश कर पायेंगे मेरी जुबान

34 - उत्तर-पूर्वी राज्यों के अल्पसंख्यकों ने एक बार फिर बीजेपी पर जताया भरोसा

35 - 7 लाख तक की आमदनी टैक्स फ्री

36 - गुजरात में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

37 - बीजेपी आप में काँटे की टक्कर

38 - सीमित व्यवस्था के बावजूद धूम-धाम से हो रही है छट माइय्या की पूजा

39 - जहाँ आज भी पुजा जाता है रावण

40 - एक बार फिर माया नगरी हुई गणपतिमय

41 - एक बार फिर लहराया तिरंगा लाल किले की प्राचीर पर

42 - बलवाइयों एवं जिहादियों के प्रति पनपता सहनभूतिक रुख

43 - आजादी के अमृत महोत्सव की कड़ी के रूप में मनाया जा रहा है 8 वाँ विश्व योग दिवस

44 - अपने दिग्गज नेताओं को नहीं संभाल पाई कांग्रेस पार्टी

45 - ज्ञान व्यापी मस्जिद के वजु घर में शिवलिंग मिलने से विवाद गहराया

46 - आखिर क्यूँ मंजूर है इन्हे फिर से वही बंदिशें.....

47 - पाँच में से चार राज्यों में लहराया कमल का परचम

48 - पेट्रोलियम, फर्टिलाइजर एवं खाद्य सामाग्री पर मिलने वाली राहत में लगभग 27 फीसदी की कटौती

49 - जे&के पुलिस के सहायक उप निरीक्षक बाबूराम शर्मा मरणोपरांत अशोक चक्र से संमानित

50 - आखिर कौन होंगे सत्ता के इस महाभोज के सिकंदर

आम आदमी पार्टी में लगातार बढ़ रहे हैं अंदरूनी असंतोष

दिल्ली: आदमी पार्टी में लगातार बढ़ रहे अंदरूनी असंतोष पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि अब यह पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है अपने नेताओं से राघव चड्ढा के विरूद्ध ब्यान दिलवा कर “आप” नेता अरविंद केजरीवाल केवल बाहर से पार्टी को एकजुट दिखने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि अंदर से पार्टी पूरी तरह बिखर चुकी है। राघव चड्ढा का वीडियो बयान भी इस बात का प्रमाण है कि पार्टी के भीतर संवाद और लोकतंत्र पूरी तरह समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि जब एक वरिष्ठ सांसद को अपनी ही पार्टी में अपनी बात रखने के लिए सोशल मीडिया जैसे मंच का सहारा लेना पड़े, तो यह उस पार्टी की बिगड़ी आंतरिक स्थिति का गंभीर संकेत है।

उन्होंने कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले सुश्री स्वाति मालीवाल ने भी पार्टी नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए थे और अब राघव चड्ढा जैसे प्रमुख चेहरा भी दूरी बनाते दिख रहे हैं। इसके अतिरिक्त, पूर्व मे भी अनेक 'आप' नेताओं के साथ हुए घटनाक्रम और उनकी असहमति भी यह दर्शाती है कि पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप  लगाया कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी अब एक व्यक्ति केंद्रित संगठन बनकर रह गई है, जहां न तो विचारों की स्वतंत्रता है और न ही आंतरिक लोकतंत्र। जो भी नेता अपनी स्वतंत्र राय रखने की कोशिश करता है, उसे या तो किनारे कर दिया जाता है या दबाने का प्रयास किया जाता है।

राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाना और उनके बोलने के अधिकार तक सीमित करने की कोशिश करना इस बात का संकेत है कि पार्टी नेतृत्व आलोचना से डरता है और असहमति को स्वीकार करने का साहस नहीं रखता। यदि अरविंद केजरीवाल में नैतिक साहस होता, तो वे असहमति रखने वाले नेताओं के साथ संवाद करते या स्पष्ट निर्णय लेते। लेकिन इसके विपरीत, वे लगातार ऐसे कदम उठा रहे हैं जो उनकी कमजोर और असुरक्षित नेतृत्व शैली को उजागर करते हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की स्थापना जिन सिद्धांतों—पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतंत्र— पर हुई थी, आज वही सिद्धांत पार्टी के भीतर पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। यही कारण है कि एक के बाद एक वरिष्ठ नेता या तो पार्टी से दूरी बना रहे हैं या खुलकर असंतोष जता रहे हैं।

दिल्ली की जनता अब “आप” की वास्तविकता को समझ चुकी है और यह स्पष्ट है कि यह पार्टी अब केवल सत्ता बचाने के लिए संघर्ष कर रही है, न कि जनता की सेवा के लिए। अरविंद केजरीवाल राजनीतिक रूप से बेहद कमजोर हैं जिन्हें विपक्ष का सामना करने की आदत नहीं है चाहे वह विपक्षी दलों से हो या पार्टी के भीतर। साथ ही उन्होंने राघव चड्ढा के लिए कहा कि - जिंदगी पर सिर्फ इतना ही लिख पाया हूँ मेरे बहुत मजबूत रिश्ते थे कमजोर लोगों से। 

08:14 pm 03/04/2026

संपादक

डा. अशोक बड़थ्वाल

Mobile : 91-9811440461

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