
दिल्ली: 4 दिन के बजट सत्र की कार्य अवधि 15 घंटे रही । जिसमें 7 कैग रिपोर्ट्स पर चर्चा हुई जो कि मुख्यतः एक्साइज/लिकर,प्रदूषण और स्वास्थ्य से संबंधित हैं । दिल्ली विधान सभा के अध्यक्ष विजेंदर गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले 15 सालों में आज पहली बार ऐसा हुआ कि पब्लिक अकाउंट कमेटी ने इन रिर्पोटों का विश्लेषण कर सरकारी कार्यवाही के लिए प्रेषित किया गया है । हैरानी की बात यह है कि विपक्ष पूरे सत्र में सदन से नदारद था । परिसर के बाहर प्रोटेस्ट करता दिखाई दिया । विपक्ष सदन से निकाले गए सदस्यों की बहाली के लिए माँग कर रहा था । विपक्ष की इस हरकत को ग़ैर जिम्मेदाराना बताते हुए विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि रूल 77(2) के तहत सत्र की शुरुवात में लगातार अवमानना करने के कारण निष्कासन हुआ था । उन्होंने विपक्ष के रवैये पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि सदन विचार विमर्श के लिए है ना कि व्यक्तिगत हित के लिए ।
विधानसभा परिसर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बताते हुए उन्होंने कहा कि आज के ही दिन यानि कि 30 मार्च 1919 को महात्मा गांधी ने सदन की दीर्घा में पहली बार आये थे एवं रोलेट एक्ट पर चर्चा को देखा था । 30 मार्च 1919 आज ही के दिन चांदनी चौक में रॉलेट एक्ट के विरोध में एकत्र निहत्थे भारतीयों पर अंग्रेज़ी हुकूमत ने मशीनगनों से फायरिंग कर अमानवीय नरसंहार किया। इस आंदोलन का नेतृत्व स्वामी श्रद्धानंद जी कर रहे थे । दिल्ली विधानसभा का यह परिसर शहादत का साक्षी रहा है । स्वतंत्रता संग्राम के उस दर्दनाक अध्याय की याद दिलाती है जिसे भुलाया नहीं जा सकता स्वामी श्रद्धानंद के आह्वान पर रॉलेट एक्ट के विरोध में उमड़ा यह जनसैलाब ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ जनता के आक्रोश और एकजुटता का सशक्त प्रतीक बना। यह घटना जलियांवाला बाग हत्याकांड से पहले हुई एक बड़ी त्रासदी थी।इस घटना ने महात्मा गांधी को गहराई से प्रभावित किया और यही जनआक्रोश आगे चलकर देशव्यापी सत्याग्रह की प्रेरणा बना। 1970 में स्वामी श्रद्धानंद जी की स्मृति में डाक टिकट जारी कर राष्ट्र ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
यहाँ शहीदों की कुर्बानियों की गूंज आज भी सुनाई देती है। दुर्भाग्यवश, इतिहास को मोड़कर झूठ की दिशा में ले जाने का प्रयास किया गया। फर्जी फाँसी घर जैसे भ्रामक माध्यम से।