.jpeg)
दिल्ली: सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था जनता के अनुपात के अनुसार अधिक दबाव में है और डीटीसी बेड़े में बसों की संख्या सिर्फ 3213 रह गई है जो 13 वर्षों में सबसे कम है, जनता के बीच यह जानकारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में सामने आई है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने कहा कि आम आदमी पार्टी द्वारा 2019 में डीटीसी में महिलाओं को मुफ्त यात्रा जारी करने को भाजपा ने भी जारी रखा लेकिन केजरीवाल सरकार की तरह रेखा गुप्ता सरकार भी दिल्ली की सड़कों से लगातार हटती डीटीसी बसों को रोक नही सकी है जिसके कारण पिछले 5 वर्षों में डीटीसी और कलस्टर बसों की प्रतिदिन राईडरशिप में 20 प्रतिशत की कमी आई है। रेखा गुप्ता सरकार द्वारा दिल्ली वासियों को बेहतर परिवहन व्यवस्था देने की सोच इस बात से उजागर होती है कि पिछले 2025-26 में डीटीसी का बजट 9110 करोड़ था, वहीं 2026-27 इस वर्ष डीटीसी के बजट में 736 करोड़ की कटौती करके 8374 करोड़ रखा है।
रेखा गुप्ता सरकार दिल्ली में महिलाओं को डीटीसी के अंतर्गत चलने वाली बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा तो दे रही है, लेकिन आर्थिक सवेक्षण 2025-26 में डीटीसी और बसों की संख्या जनसंख्या के अनुपात के अनुसार लगातार कम हो रही और भाजपा का महिलाओं को मुफ्त यात्रा दावा धोखा साबित हो रहा है। बस स्टैंड पर घंटों बसों को इंतजार करने के बावजूद बसें नही आती है, कई बार तो एक ही स्टेंड पर सैंकड़ों सवारी बसों का इंतजार करते दिखाई देते है जिनमें महिलाओं की संख्या अधिक होती है। उन्होंने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण में 2013-14 में डीटीसी की 5223 बसें थी, जो 38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2025-26 में सिर्फ 3213 बसें रह गई है।
गरीब और जरुरतमंद महिलाओं को पिंक कार्ड बनाने के लिए केन्द्र पर लम्बी लाईनों में 4-5 घंटें इंतजार करना पड़ता है और तकनीकी खराबी और दस्तावेजों की अनिवार्यता के कारण या उसी दिन पिंक कार्ड बन नही पाता है या उन्हें अधिकारी मना कर रहे है। भारी दिक्कत प्रवासी महिलाओं को हो रही है। आधार कार्ड की मांग के बाद दिल्ली में रह रही महिलाएं जो यूपी बिहार या हरियाणा की मूल निवासी दस्तावेज रखती है, उनको अधिक परेशानी होगी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा जनता के हित में की गई घोषणाएं दिल्ली वालों के लिए परेशानी साबित हो रही है।
दिल्ली की 3 करोड़ जनसंख्या के अनुपात अनुसार दिल्ली में लगभग 13000 से अधिक बसें सड़कों पर होनी चाहिए लेकिन अभी डीटीसी और कलस्टर बसों को जोड़कर सिर्फ 6966 है। उन्होंने कहा कि सड़क पर चलने वाली बसों की औसत संख्या में कटौती हुई है। 2019-20 में जहां प्रतिदिन 3222 बसें सड़कों पर चलती थी वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर 2615 रह गई है, जो चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि बसों की कमी और जनता के विश्वास में कमी के कारण 2013-14 में प्रतिदिन 43.5 लाख यात्री के अनुपात में 2025-25 में यह संख्या घटकर 24.3 लाख रह गया है। पिछले 13 वर्षों में 44 प्रतिशत की कमी आई है।