चुनावी बिगुल बजते ही केरल में शुरू हुआ सियासी कुश्ती का दौर । चुनावी जुमलों से हो रही है उठा-पटक । भले ही चुनावी संघर्ष चार घटकों के बीच है लेकिन सीधा टक्कर सीपीआईएम के नेतृत्व में लेफ्ट डेमोक्रेटिक अलायन्स एवं कांग्रेस के नेतृत्व में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के बीच है । भाजपा के नेतृत्व में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट फिलहाल अपनी पैठ बनाने के फिराक में है । आम आदमी पार्टी भी अपना भाग्य अजमाने के लिए मैदान में उतरी है ।
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यदि इतिहास के पन्ने पलटें जायें तो यहाँ की सियासत पर लेफ्ट विंग याने कि वामपंथी दलों का दबदबा रहा है । पिछले विधान सभा चुनाव में 140 सीटों में से 99 सीटों पर जीत हासिल कर सीपीआईएम सबसे बड़ी पार्टी उभर के आई थी और सियासत की बागडोर पिनारयी विजयन के हाथ आई । वह केरल के मुख्यमंत्री हैं । 140 विधानसभा सीटों एवं 26953644 मतदाता वाली केरल विधानसभा की चुनावी घड़ी करीब है । फिलहाल जुमलेबाजी का जोर है ।
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कांग्रेस की तरफ से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तो भाजपा की तरफ़ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रचार के लिए मैदान में उतरे हैं । वामपंथियों का तो केरल है । यूँ कहिए सभी घटकों ने अपने दिग्गज नेता चुनाव में झोंक दिए हैं । राहुल गांधी ने अपनी रैलियों और जनसभाओं में खाड़ी युद्ध से ईंधन एवं उपभोक्ता वस्तुओं भावों पर पड़ने वाले प्रभावों को अपना चुनावी मुद्दा बनाया है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकास एवं महिला कल्याण को अपना चुनावी हथियार बनाया है । विकास की परिधि के वायदों में राज्य में एआईएमएस, हाई स्पीड ट्रेन नेटवर्क एवं महिला कल्याण से संबंधित मसले शामिल हैं । राहुल गांधी युवा मतदाताओं को रिझाने के लिए साइकल रैली में साइकल चलाते दिखाई दिए ।
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विधायकों की आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता के चर्चे मीडिया की सुर्खियों में बने रहना आम है । शायद ही कोई राज्य हो जिसमें एक आद विधायक या सियासतदान पर आपराधिक मामला ना दर्ज हो । मौजूदा चुनावी समीकरण के मद्देनजर इस बार भी बाजी वामपंथी घटकों के हाथ लगने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता । चुनावी दंगल में भाजपा की भूमिका का खुलासा तो समय के साथ हो ही जाएगा । फिलहाल दंगल का दौर है ...