16 वर्षों में 21 इमारतों का ढहना 136 की जान जाना सत्ता में रहकर लोगों की मौत से समझौता
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दिल्ली: नगर निगम में भ्रष्टाचार और अनाधिकृत निर्माण से कमाई का परिणाम है सैदुलाजेब में पांच मंजिला इमारत का गिरना और 6 लोगों की मौत। 30 मई को सैदुलाजैब में इमारत ढहने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का वहां दौरा का मैजिस्ट्रैट जांच के आदेश और संबधित विभागों के खिलाफ जांच के आदेश मात्र औपचारिकता दिखाई दी। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों के मिलकर हादसे में मरने वालों के लिए न तो किसी मुआवजे की घोषणा की और न ही निगम में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ किसी कार्यवाही का आदेश दिया। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने टिप्पणी करते हुए सरकार से मरने वालों को उचित मुआवजा देने मांग की और कहा कि नुकसान और लोगों की मौत के लोगों के लिए जिम्मेदारों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करके कार्यवाही की जाए।
जब 2015 से इस इमारत को अवैध घोषित कर दिया गया था और पुलिस की चेतावनी के बावजूद निगम में बैठी भाजपा ने कोई कार्यवाही नही होने दी, उसमें साफ भ्रष्टाचार का मामला सामने आता है। उन्होंने कहा कि जब 2021 में हाई कोर्ट के निर्देश पर एमसीडी ने निरीक्षण करके इमारत को ध्वस्त करने योग्य माना तो 2021 से 2026 तक कार्यवाही क्यों नही हुई और लोगों को मरने के लिए बिल्डिंग को उपयोग करने के लिए छोड़ दिया। यह चिंताजनक है कि मार्च 2026 में पुलिस ने अवैध निर्माण को लेकर 2 बार चेतावनी दी लेकिन निगम में बैठे भाजपा के मौत के सौदागरों ने कोई कार्यवाही नही होने दी, नतीजा आधा दर्जन लोगों की मौत हो गई।
सैदुलाजैब का हादसा कोई पहला या दिल्ली में इमारत ढ़हने में नया नही है। पिछले वर्ष 2025 में 27 जनवरी को बुराड़ी में निर्माणाधीन इमारत गिरने से पांच लोगों की मौत, 9 अप्रैल को दयालपुर में इमारत गिरने से 11 लोगों की मौत, 17 मई को पहाड़गंज में निर्माणाधीन इमारत ढहने से 3 लोगों की मौत, 12 जुलाई को सीलमपुर की जनता मजदूर काॅलोनी में इमारत ढहने से 6 लोगों की मौत और 20 अगस्त, 2025 को दरिया गंज में पुरानी इमारत ढहने से तीन मजदूरों की मौत हुई थी। यही नही 21 अप्रैल 2024 को वेलकम में तीन मंजिला इमारत गिरने से 2 लोगों की मौत हुई, 15 अप्रैल 2022 को अलीपुर गौदाम की दीवार गिरने से पांच मजदूरों की मौत और 13 सितंबर 2021 को सब्जी मंडी इलाके में तीन मंजिला इमारत का एक हिस्सा ढहने से दो लोगों की मौत साबित करती है कि 2007 से भाजपा ने निगम की सत्ता में रहकर सिर्फ लोगों की मौत से समझौता किया हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा के निगम में सत्तासीन होने के बाद पिछले 16 वर्षों में 21 इमारतों के ढहने से 136 लोगों की जान जाने का मुख्य कारण अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही रहा है। इस दौरान इन हादसों में 178 लोग घायल भी हुए। उन्होंने कहा कि हर वर्ष बढ़ते अवैध निर्माणों और इमारतों के ढ़हने से लोगों की मौत के बावजूद दोषियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नही होना भाजपा का भ्रष्ट चेहरा उजागर होता है। उन्होंने कहा कि लगातार ढहती इमारतों में मरने वालों के प्रति संवेदना दिखाते हुए उपराज्यपाल महोदय एक जांच कमेटी का गठन करें और यह देखे में 16 वर्षों में हुए हादसों के खिलाफ कितने दोषी अधिकारियों को सजा मिली है, हर मामले को भाजपा ने रफा दफा करके खत्म कर दिया है।
06:25 pm 02/06/2026