नई दिल्ली 29, Jun 2026

लेख

1 - रक्त रंजित राजनीति से मिली मुक्ति बंगाल में पहली बार निखरा कमल

2 - कैसे होंगे केरल के सियासी समीकरण

3 - कौन सा खेला खेलेंगी ममता बैनर्जी पश्चिम बंगाल में

4 - धर्मेंद्र हुए पंचतत्व में विलीन

5 - बिहार की जानता ने फिर एक बार साबित कर दिया कि हथेली में सरसों नहीं उगाया जा सकता

6 - जेट सिक्योरिटी के साथ विसर्जन के लिए निकला लाल बाग का राजा

7 - खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे

8 - एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य के लिये योग

9 - ऑपरेशन सिंदूर न्याय की अखंड प्रतिज्ञा

10 - देश के लोकतंत्र को मज़बूत करने के लिए बाबा साहिब का अमूल्य योगदान

11 - दिल्ली सरकार के 100,000करोड़ से क्षेत्र में उन्नति की संभावनाओं को मिलेगी मजबूती

12 - दशक के बाद बिखरा झाड़ू 27 साल बाद खिला कमल फिर एक बार

13 - स्वर्णिम भारत,विरासत और इतिहास पर आधारित इस बार का गणतंत्र दिवस समारोह

14 - महाराष्ट्र में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

15 - तमाम कवायदों के बावजूद बीजेपी तीसरी बार हरियाणा में सरकार बनाने को अग्रसर

16 - श्रॉफ बिल्डिंग के सामने कुछ इस अंदाज से हुआ लाल बाग के राजा का स्वागत

17 - प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही शुरू हुआ बीजेपी का सदस्यता अभियान

18 - देश के सीमांत इलाकों में तैनात सैनिकों में भी दिखा 78 वें स्वतंत्रता दिवस का जज्बा

19 - २०२४-२५ के बजट को लेकर सियासत विपक्ष आमने सामने

20 - एक बार फिर तीसरी पारी खेलेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी

21 - केजरिवाल के जमानत पर रिहा होने पर शुरु हुई नई कवायदें

22 - मतदान की दर धीमी आखिर माजरा क्या

23 - क्यूं चलाना चाहते हैं केजरीवाल जेल से सरकार

24 - 2004-14 के मुकाबले 2014-23 में वामपंथी उग्रवाद-संबंधित हिंसा में 52 प्रतिशत और मृतकों की संख्या में 69 % कमी

25 - कर्तव्य पथ दिखी शौर्य की झलक

26 - फ़ाइनली राम लल्ला अपने आशियाने में हो गये हैं विराजमान

27 - राजस्थान का ऊँट किस छोर करवट लेगा

28 - एक बार फिर गणपति मय हुई माया नगरी मुंबई

29 - पत्रकारिता की आड़ में फर्जीवाड़े के खिलाफ एनयूजे(आई) छेड़ेगी राष्ट्रव्यापी मुहीम

30 - भ्रष्टाचार, तुस्टिकरण एवं परिवारवाद विकास के दुश्मन

31 - एक बार फिर शुरू हुई पश्चिम बंगाल में रक्त रंजित राजनीति

32 - नहीं होगा बीजेपी के लिऐ आसान कर्नाटक में कांग्रेस के चक्रव्यूह को भेद पाना

33 - रद्द करने के बाद भी नहीं खामोश कर पायेंगे मेरी जुबान

34 - उत्तर-पूर्वी राज्यों के अल्पसंख्यकों ने एक बार फिर बीजेपी पर जताया भरोसा

35 - 7 लाख तक की आमदनी टैक्स फ्री

36 - गुजरात में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

37 - बीजेपी आप में काँटे की टक्कर

38 - सीमित व्यवस्था के बावजूद धूम-धाम से हो रही है छट माइय्या की पूजा

39 - जहाँ आज भी पुजा जाता है रावण

40 - एक बार फिर माया नगरी हुई गणपतिमय

41 - एक बार फिर लहराया तिरंगा लाल किले की प्राचीर पर

42 - बलवाइयों एवं जिहादियों के प्रति पनपता सहनभूतिक रुख

43 - आजादी के अमृत महोत्सव की कड़ी के रूप में मनाया जा रहा है 8 वाँ विश्व योग दिवस

44 - अपने दिग्गज नेताओं को नहीं संभाल पाई कांग्रेस पार्टी

45 - ज्ञान व्यापी मस्जिद के वजु घर में शिवलिंग मिलने से विवाद गहराया

46 - आखिर क्यूँ मंजूर है इन्हे फिर से वही बंदिशें.....

47 - पाँच में से चार राज्यों में लहराया कमल का परचम

48 - पेट्रोलियम, फर्टिलाइजर एवं खाद्य सामाग्री पर मिलने वाली राहत में लगभग 27 फीसदी की कटौती

49 - जे&के पुलिस के सहायक उप निरीक्षक बाबूराम शर्मा मरणोपरांत अशोक चक्र से संमानित

50 - आखिर कौन होंगे सत्ता के इस महाभोज के सिकंदर

सोची-समझी प्लानिंग के तहत 650 करोड़ का स्वास्थ्य घोटाला

दिल्ली: आम आदमी पार्टी ने भाजपा की दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में 650 करोड़ रुपए के हुए घोटाले की परतें खोल कर सनसनी फैला दी है। इस महा घोटाले को सोची-समझी प्लानिंग के तहत अनजान दिया गया। पहले अस्पतालों को सामान खरीद की जिम्मेदारी थी। नियम बदल कर इसे सीपीए को सौंपा गया। ‘‘आप’’ के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा सरकार के 16 महीने की उपलब्धि यह 650 करोड़ का घोटाला है। 10 लाख की पोर्टेबल एक्स-रे मशीन 33 लाख में खरीदी और 45 मशीनों के बदले 148 करोड़ का भुगतान किया। 25 लाख रुपए की सी-आर्म रेडियोलॉजिकल इक्विपमेंट 1.10 करोड़ रुपए में खरीदे गए। इसी तरह, 50 लाख ओआरएस पैकेट खरीदे गए। बाजार में ये 2.50 रुपए प्रति पैकेट मिलता है, लेकिन 15 रुपए प्रति पैकेट भुगतान किया गया। उन्होंने कहा कि सीएम रेखा गुप्ता ने पहले अपने चहेते अफसर डॉ. वत्सला अग्रवाल को डीजीएचएस बनाया और एक रुपए के सामान का 10 रुपए में टेंडर कराकर लूट किया। इस महा घोटाले में सरकार के ऊपर तक सब शामिल हैं लेकिन सिर्फ छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई हो रही है।
 “आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष  ने बताया  कि 27 साल बाद दिल्ली में बनी ईडी पार्टी और रेखा गुप्ता की 16 महीने की सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में दवाई और उपकरणों की खरीद में 650 करोड़ रुपए का घोटाला कर दिया है। यह 650 करोड़ का घोटाला सिर्फ एक विभाग में है, बाकी विभागों में क्या हो रहा है, वह भी जल्द सामने आएगा। क्योंकि लूट में कोई भी विभाग पीछे नहीं है, सब कंपटीशन में चल रहे हैं। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि रविवार से भाजपा पार्टी के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वत्सला अग्रवाल नाम की अफसर ने 650 करोड़ का घोटाला कर दिया। क्या कोई एक अफसर अकेले 650 करोड़ का घोटाला कर सकता है? यह घोटाला किसी एक अफसर ने नहीं, बल्कि सरकार ने पूरी क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी रचकर किया है।
उन्होंने बताया कि डॉ. वत्सला अग्रवाल डीजीएचएस यानी डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज थीं और सीपीए यानी सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी उनके अधीन थी, जो दिल्ली सरकार के सभी टेंडर करती है। फरवरी 2025 में ईडी पार्टी की सरकार बनी और 10 जुलाई 2025 को मीडिया में आया कि दिल्ली सरकार ने एक आदेश निकाला है। अब कोई भी अस्पताल अपना सामान (दवाई, चद्दर, एक्स-रे मशीन आदि) सीधे खुद नहीं खरीदेगा, बल्कि सब कुछ सीपीए ही खरीदेगा। उन्होंने 
कहा कि जुलाई 2025 में जब यह आदेश निकला, तब डीजीएचएस डॉ. रति मक्कड़ थीं। हमने ट्वीट भी किया था कि डॉ. रति मक्कड़ पर दस्तावेजों और टेंडरों पर हस्ताक्षर करने का भारी दबाव है। इसी दबाव के चलते उन्होंने नौकरी से वीआरएस ले ली, जबकि कोई सरकारी डॉक्टर वीआरएस नहीं लेता है। इसके बाद अगस्त में रेखा गुप्ता की सरकार ने 10 से अधिक सीनियर डॉक्टरों को दरकिनार करके डॉ. वत्सला अग्रवाल को डीजीएचएस बना दिया। रेखा गुप्ता और एलजी साहब इसका जवाब दें कि उन्होंने ऐसा क्यों किया?
 आम आदमी पार्टी के विधायक सोमनाथ भारती ने दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में भर्तियों में भ्रष्टाचार को लेकर डॉ. वत्सला अग्रवाल की विजिलेंस में शिकायत की थी और उन पर विजिलेंस जांच चल रही थी। इसके बावजूद एलजी साहब और मुख्यमंत्री ने उन्हें इतने संवेदनशील पद पर क्यों बैठाया, रेखा गुप्ता और एलजी साहब इस पर चुप क्यों हैं?सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सरकार ने नियम बदलकर अस्पताल के अधिकार छीने और एक तथाकथित भ्रष्ट अफसर को बैठाकर जो लूट वाले टेंडर करवाए, वे एफआईआर में दर्ज हैं। बाजार में 10 लाख रुपए में आने वाली पोर्टेबल एक्स-रे मशीन 33 लाख रुपए में खरीदी गई। ऐसी 448 मशीनें खरीदी गईं, यानी जो मशीनें 45 करोड़ रुपए में आनी चाहिए थीं, उनके लिए 148 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। सी-आर्म रेडियोलॉजिकल इक्विपमेंट बाजार में 25 लाख का आता है और थोक में टेंडर करने पर यह 15 लाख में मिल जाता है, लेकिन सरकार ने इसे 1 करोड़ 10 लाख रुपए में खरीदा। इसके लिए 1 करोड़ 75 लाख की जगह 7 करोड़ 70 लाख रुपए दिए गए।
 ओआरएस घोटाले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि रेखा गुप्ता और उनके हर मंत्री रोज कूलिंग जोन बनाने और ओआरएस बांटने का खूब प्रचार करते थे। इसके पीछे का मकसद ओआरएस खरीद में मोटी कमाई करना था। सरकार ने करीब 50 लाख ओआरएस के पैकेट खरीदे, यानी दिल्ली की 2 करोड़ की आबादी में हर चौथे आदमी को ओआरएस पिलाने का बीड़ा उठाया, जो असल में किसी ने पिया ही नहीं।सौरभ भारद्वाज ने कहा कि बाजार में 2.50 रुपए में मिलने वाला ओआरएस का पैकेट इन चोरों और डकैतों ने 15 रुपए में खरीदा। इतने रुपए में तो गरीबों को दो रुपए का कूपन देकर कैफे कॉफी डे या बरिस्ता के एसी में बिठाकर कोल्ड कॉफी पिलाई जा सकती थी और कहते कि बोलो रेखा गुप्ता की जय। ईडी पार्टी 27 साल बाद दिल्ली की सत्ता में आई है, इसलिए ये लोग पूरे 27 साल का हिसाब-किताब एक साथ चुकता करने में लगे हुए हैं।
दिल्ली सरकार ने अस्पतालों के लिए जो चादरें खरीदी हैं, उनका घोटाला सुनकर लोग हैरान रह जाएंगे। उस समय जेम पोर्टल पर एक चादर का दाम 150 रुपए था, जो हजारों की संख्या में खरीदने पर और भी कम हो जाता है। इसके बावजूद दिल्ली सरकार ने 150 रुपए की एक चादर 450 रुपए में खरीदी, जो कि बाजार दर से तीन गुना अधिक है।उन्होंने कैलकुलेशन बताते हुए कहा कि सरकार ने 450 रुपए के हिसाब से 75 करोड़ रुपए की चादरें खरीदीं। इस राशि में कुल 16 लाख 66 हजार 666 चादरें खरीदी गईं। दिल्ली सरकार के अस्पतालों में कुल बेड की संख्या 15,659 है। सरकार की मंशा क्या थी, यह इस बात से समझ आता है कि 200 बेड वाले एक अस्पताल को जबरदस्ती 20,000 बेडशीट थोप दी गईं। अस्पताल के एमएस और एमडी, जो 30-35 साल के अनुभव वाले सीनियर डॉक्टर हैं, उन पर दबाव बनाया गया कि इन्हें रखना ही पड़ेगा। जब मैंने इसका गणित लगाया तो पता चला कि एक बेड के लिए 106 बेडशीट खरीदी गईं। सरकार ने ओआरएस की तरह ही बेडशीट भी जरूरत से कहीं ज्यादा मात्रा में इसलिए खरीदी क्योंकि हर खरीद पर भारी कमीशन था। 
ईडी पार्टी के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों और नेताओं के दावों का जवाब देते हुए कहा कि वे वत्सला अग्रवाल की फोटो दिखाकर सारा दोष उन पर मढ़ रहे हैं कि उन्होंने 650 करोड़ का घोटाला कर दिया। क्या वत्सला अग्रवाल की इतनी औकात है कि वह अकेले यह फैसला ले ले कि 50 लाख ओआरएस पैकेट खरीदे जाएंगे या 200 बेड के अस्पताल को 20,000 चादरें जबरदस्ती भेजी जाएंगी? यह पूरी सरकार की आपराधिक साजिश है।
उन्होंने साफ किया कि हम वत्सला अग्रवाल को कोई क्लीन चिट नहीं दे रहे हैं। जब वे दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की हेड थीं, तब मैंने और हमारे पूर्व विधायक राजेंद्र गौतम ने खुद उनकी शिकायत विजिलेंस में की थी। उस समय हमने चीफ सेक्रेटरी के साथ मीटिंग भी की थी, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। ऐसी नालायक और भ्रष्ट अफसर को ढूंढकर सरकार ने डीजीएचएस बनाया और सीपीए को सारी शक्तियां दीं।
यह टाला वत्सला अग्रवाल के अकेले के बस का नहीं था। यह सरकार की सोची-समझी नीति थी कि पहले अफसरों को डरा-धमकाकर या उन्हें अपने अनुकूल चुनकर बिठाया जाए और फिर उनसे लूट के टेंडर कराए जाएं। एक का माल दस में खरीदा गया और जरूरत से कहीं ज्यादा मात्रा में खरीदा गया। यह पूरी सरकार इसमें लिप्त है और इस 27 साल की भूखी सरकार को इन घोटालों का जवाब देना पड़ेगा।

05:55 pm 29/06/2026

संपादक

डा. अशोक बड़थ्वाल

Mobile : 91-9811440461

editor@dhanustankar.com

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