उत्तर-पश्चिम दिल्ली के शालीमार बाग क्षेत्र में हैदरपुर में सड़क चैड़ीकरण परियोजना के लिए लगभग 150 घरों के तोड़फोड़ अभियान चलाकर 3-4 दशक से रह रहे गरीब लोगों को सुरक्षा बल के साथ उजाड़ दिया। हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाले गरीब लोगों की याचिका को खारिज करने के पीछे कहीं दिल्ली सरकार ओ जोन की 91 कालोनियों में तोड़फोड़ अभियान की शुरुआत तो नही। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव का कहना है कि 91 कालोनियों को नियमित सूची में नही रखा गया है, यदि सरकार इन कलोनियों में तोड़फोड़ अभियान चलाती है तो लाखों लोग प्रभावित होंगे। शालीमार बाग क्षेत्र हैदरपुर में उजाड़ने जाने वाले प्रत्येक परिवार को दिल्ली सरकार एक करोड़ का मुआवजा दे।

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा शालीमार बाग में प्रभावित परिवारों के लिए घोषित राहत, जिसके तहत प्रत्येक प्रभावित परिवार को 3 लाख रुपये का एकमुश्त अनुग्रह राशि का भुगतान किया जाएगा, यह राशि बहुत ही कम है और जो लोग यहां अपना छोटा मोटा कारोबार चला रहे थे उनको सावदा घेवरा में 11 महीने के लिए दिल्ली लाइसेंस आधारित अस्थायी आवास में वैकल्पिक आवास के बिना परिवारों को देने का सरकार का कदम गरीबों को शहर से बाहर निकालने की योजना है, जबकि राजधानी को विकास में इन लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिन्हें धीरे-धीरे सरकार विकास के नाम पर उजाड़ रही है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिछली आम आदमी पार्टी की सरकार और वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा बिना किसी रोक-टोक के अवैध निर्माण की अनुमति दिए जाने के बाद गरीब इसका शिकार होते है और साकेत में इमारत ढहने जैसी त्रासदी में अब तक छह लोगों की जान जाने के बावजूद मुख्यमंत्री सहित पूरी सरकार चुप्पी साधे बैठी है। ऐसी त्रासदी के बाद एमसीडी के दो इंजीनियरों को निलंबित करके क्या मृतकों की जान की भरपाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि भाजपा के ट्रिपल इंजन शासन के तहत दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में घोर भ्रष्टाचार के कारण ही अनधिकृत निर्माण फल फूल रहे हैं। भाजपा शासित निगम की शह पर हो अवैध निर्माण में परिवार असुरक्षित है और इमारत गिरने दुर्घटनाओं के शिकार होने के लिए भाजपा जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि इस तरह की दुर्घटनाओं के दौरान, कुछ छोटे अधिकारियों को दोषारोपण के खेल में जिम्मेदार ठहराया जाना पूरी तरह सही नही है क्योंकि ये अनधिकृत निर्माण भाजपा और आप पार्षदों और उनके नेताओं की मिलीभगत से हो रहे हैं।
एक साल से अधिक समय पहले जब से भाजपा दिल्ली में सत्ता में आई, तब से गरीबों की आवासीय इकाइयों को जानबूझकर खुलेआम ध्वस्त किया जा रहा है क्योंकि रेखा गुप्ता सरकार राजधानी से गरीबों को बाहर निकालना चाहती है। उन्होंने कहा कि हाल ही में सरकार की घोषणा के बाद विध्वंस का खतरा ओ जोन क्षेत्र में यमुना बाढ़ के मैदान या संरक्षित वन एएसआई भूमि पर स्थित 91 कॉलोनियों को लाखों गरीब लोगों के आवास और आजीविका के साधन को खत्म करके उखाड़ा नहीं जाना चाहिए। सरकार को लोगों के संरक्षण नीति बनाने पर ध्यान देना चाहिए और राजधानी का विकास समाज के सबसे गरीब वर्ग की कीमत चुका कर नहीं होना चाहिए।