सोनम वांगचुक को बिना सबूत जेल में रखा: केजरीवाल
दिल्ली: फर्जी शराब घोटाले की साजिश रचने के मामले में एक्पोज होने के बाद अब प्रख्यात जलवायु वैज्ञानिक सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी मामले में भी मोदी सरकार की एक और पोल खुल गई है। सोनम वांगचुक मामले में लगातार कोर्ट में एक्पोज हो रही मोदी सरकार ने अपनी और किरकिरी से बचने के लिए उनकी एनएसए के तहत हिरासत को रद्द कर दिया। केंद्रीय गृह मंत्रालय के इस फैसले पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं ने पीएम मोदी पर तीख हमला बोला है। पार्टी नेताओं ने इसे तानाशाही का चरम बताते हुए इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
‘‘आप’’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मोदी सरकार जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि मोदी सरकार एक बार फिर बेनकाब हो गई है। एक वैज्ञानिक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर दिया था। उनको बिना किसी सबूत के गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि जेल में बिताए उनके महीने न केवल उनके लिए व्यक्तिगत क्षति थे, बल्कि राष्ट्र के लिए भी क्षति थे। इस घोर तानाशाही का जनता के बीच पर्दाफाश होना चाहिए और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी तरह दिल्ली में फर्जी शराब घोटाले का षड़यंत्र रचकर आम आदमी पार्टी की टॉप लीडरशिप को महीनों जेल में रखा गया था। पार्टी के वरिष्ठ नेता भारद्वाज ने कहा कि आज से करीब 6 महीने यानी करीब 170 दिन पहले लद्दाख के एक बहुत मशहूर वैज्ञानिक को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत यह कहकर गिरफ्तार कर लिया था कि वे देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। उन्होंने लद्दाख और भारतीय सेना के लिए अनगिनत आविष्कार किए हैं और गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि उनकी पत्नी सुप्रीम कोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका के लिए लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रही थीं। महीनों से यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था और केंद्र सरकार अलग-अलग बहाने बनाकर इस मामले में बस तारीखें लेती जा रही थी। जब सोनम वांगचुक को इस तरह से गिरफ्तार करके हिरासत में लिया गया था, तब तमाम मीडिया ने झूठी खबरें चलाई थीं कि सोनम वांगचुक को न जाने कहां-कहां से अवैध पैसा मिल रहा है और वे देश के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं। लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट में सबूत रखने का समय आया, तो सरकार के पास ले-देकर कुछ वीडियो ही थे। बाद में पता चला कि उन वीडियो को भी अदालत में गलत तरीके से पेश करके एक झूठा मुकदमा बनाया जा रहा था।
हैबियस कॉर्पस एक बहुत ही महत्वपूर्ण कानूनी उपाय है, जिसे 12वीं शताब्दी के इंग्लैंड के मैग्ना कार्टा और कुछ न्यायिक सिद्धांतों से लिया गया है। इसके तहत अगर सरकार या सत्ता में बैठे लोग नागरिकों को गलत तरीके से जेल में डाल दें, तो उसके खिलाफ यह बचाव का एक रास्ता होता है। किसी भी लोकतंत्र के लिए यह अधिकार अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है और ऐसी याचिका पर छह महीने तक केस चलना भी अपने आप में बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस बात से साफ हो जाता है कि केंद्र सरकार के पास सोनम वांगचुक के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं था और आज नहीं तो कल सुप्रीम कोर्ट उन्हें रिहा कर ही देती। इसी फजीहत और शर्मिंदगी से बचने के लिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की अगली तारीख से पहले ही सोनम वांगचुक के खिलाफ जारी किया गया अपना हिरासत का आदेश वापस ले लिया।
सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार इस तरह से किसी को भी पकड़कर जेल में डाल सकती है? क्या किसी भी शांतिपूर्ण आंदोलन या जायज संवैधानिक मांग को दबाने के लिए किसी को भी जेल में डाला जा सकता है? क्या केंद्र सरकार सोनम वांगचुक के वे 170 दिन वापस कर पाएगी? क्या जहर फैलाने वाला वह मीडिया और सोनम वांगचुक के खिलाफ झूठ फैलाने वाले वे चैनल, जिन्होंने उन्हें जनता के सामने एक देशद्रोही की तरह पेश किया, अब उनसे माफी मांगेंगे? आज लोकतंत्र के सामने यह बहुत बड़े सवाल हैं।
उन्होंने तमाम विपक्षी दलों से यह निवेदन किया कि वे सब सोनम वांगचुक के साथ खड़े हों और उनकी आवाज उठाएं। आज यह सोनम वांगचुक के साथ हुआ है, कल को यह किसी के साथ भी हो सकता है। जो भी व्यक्ति देश के लोगों की आवाज उठाने की कोशिश करेगा, सरकार उसे इसी तरह से झूठे मुकदमों में जेल में डाल सकती है। यह ठीक वैसे ही है जैसे आम आदमी पार्टी के नेताओं को भी आबकारी के एक झूठे मामले में महीनों तक जेल में डाला गया था।
05:03 pm 14/03/2026