यदि थप्पड़बाजी एवं मोबाइल छीनकर सबूत नष्ट करने का प्रयास वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होती तो अदालत का दरवाजा खटखटायेगी आप

दिल्ली: मंत्री द्वारा थप्पड़बाजी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ दिल्ली पुलिस के अभद्र व्यवहार के खिलाफ पार्टी ने कोर्ट जाने का फैसला किया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अगर पुलिस को न्याय देना होता तो हमारी शिकायत पर अब तक एफआईआर दर्ज कर ली गई होती। पुलिस ने हमारी महिला कार्यकर्ताओं के साथ छेड़छाड़ की, उनके कपड़े फाड़े और मेरा गला घोंटने का प्रयास किया। साथ ही, अपराधियों की तरह पुलिस ने जातिगत और साम्प्रदायिक दंगा भड़काने की कोशिश की। यह सब कैमरे में कैद है। इसके बाद भी न तो प्रवेश वर्मा पर एफआईआर हुई और ना ही कानून के खिलाफ काम कर रहे पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज हुई ।
उन्होंने कहा कि पिछले तीन दिनों हम प्रवेश वर्मा पर एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे हैं। यह मामला थप्पड़ मारने से कहीं ज्यादा गंभीर है। प्रवेश वर्मा ने थप्पड़ मारने के साथ ही साहिब सिंह के हाथ से उसका मोबाइल भी छीना था। उस मोबाइल में प्रवेश वर्मा के विभाग का भ्रष्टाचार रिकॉर्ड हो रहा था। जब विधायक जरनैल सिंह ने प्रवेश वर्मा के सामने सड़क को हाथ से उखाड़ कर दिखाया, तो उन्होंने अपने विभाग के अफसरों से कोई सवाल नहीं किया और न ही जांच या दोषियों को सजा देने की बात कही, बल्कि वह उस पूरे मामले में अधिकारियों का बचाव कर रहे थे। इसी भ्रष्टाचार के सबूतों को मिटाने के उद्देश्य से प्रवेश वर्मा ने उस लड़के का मोबाइल झपटा था।
घटना की वीडियो दिखाकर कहा कि हमला करने से पहले प्रवेश वर्मा के दोनों हाथ खाली थे, लेकिन अगले ही पल उन्होंने एक हाथ से लड़के का मोबाइल झपटा और दूसरे हाथ से उसे थप्पड़ मारा। यानी प्रवेश वर्मा एक मोबाइल स्नैचर भी हैं। प्रवेश वर्मा पर सबूत मिटाने, थप्पड़ मारने और आपराधिक साजिश रचने का मुकदमा बनता है। इस आपराधिक साजिश में विकासपुरी के एसएचओ घनश्याम किशोर समेत तमाम पुलिस वाले भी शामिल हैं, जिन्होंने उस लड़के को धक्का दिया और क्राइम सीन से प्रवेश वर्मा को भागने में मदद की। पुलिस का काम प्रवेश वर्मा को वहीं रोककर हिरासत में लेना था।
इतना ही नहीं प्रवेश वर्मा पर एफआईआर दर्ज करने का दबाव कम करने के लिए लगातार आम आदमी पार्टी के लोगों पर झूठे मुकदमे थोपे जा रहे है। पुलिस ने 28 सितंबर को भ्रष्टाचार उजागर करने वाले विधायक जरनैल सिंह के ऊपर ही ब्लैकमेलिंग और पैसे मांगने का झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया। इसके बाद पुलिस ने मंगलवार को एक और नया झूठा मुकदमा दर्ज किया। एक हरी टी-शर्ट वाला आदमी आम आदमी पार्टी के पार्षद को जातिसूचक शब्दों से भड़का रहा था ताकि वहां दंगा हो जाए। विधायकों और कार्यकर्ताओं ने वर्दी वाले पुलिस वालों को इशारा करके बताया कि यह आदमी यहां गुंडागर्दी कर रहा है। जब वह भागने लगा, उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया । अब पुलिस उस हरी टी-शर्ट वाले गुंडे को सरकारी गुंडा और कांस्टेबल बता रही है। पुलिस ने झूठी कहानी बनाई कि उनका कांस्टेबल वीडियो बना रहा था और आम आदमी पार्टी वालों ने उसे पीटा, जिसमें मेरा और जरनैल सिंह का नाम भी डाल दिया गया।
वीडियो दिखाते हुए उन्होंने कहा कि इसमें साफ है कि वह आदमी वीडियो नहीं बना रहा था। वह सिर्फ कान पर मोबाइल लगाकर वहां से भागने का नाटक कर रहा था। उसी के साथ सफेद और काले चेक वाली टी-शर्ट में एक और आदमी था और उससे एक दिन पहले 27 सितंबर को हल्की नीली टी-शर्ट वाले एक आदमी ने भी बिल्कुल इसी तरह जातिसूचक गालियां देकर दंगा भड़काने की कोशिश की थी। दिल्ली पुलिस अपना आधा एडिट किया हुआ वीडियो भाजपा के सोशल मीडिया ट्रोल्स को देती है ताकि हमले की झूठी खबर तक फैलाई जा सके।
पुलिसकर्मियों ने महिला कार्यकर्ता साक्षी गुप्ता के साथ भी जंतर-मंतर जैसी ही बर्बरता की है। पुलिस ने उन्हें खींचते वक्त बहुत गलत तरीके से पकड़ा और उनके साथ दुर्व्यवहार किया। इन सभी घटनाओं के साक्ष्यों के साथ पुलिस कमिश्नर को लिखित और फिजिकल शिकायत भेज दी है। अगर कमिश्नर कार्रवाई नहीं करेंगे, तो अदालत जाकर इन पुलिस वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी और इन्हें बख्शा नहीं जाएगा ।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि साक्षी गुप्ता के साथ जानबूझ कर गलत बर्ताव किया गया, ताकि महिला को अपमानित किया जा सके। अमूमन पुलिस हाथ या पैर पकड़ कर खींचती है, लेकिन पैंट के अंदर हाथ नहीं डालती। पुलिस ने साक्षी की छाती को पीछे से पकड़कर इसलिए खींचा ताकि बाकी महिलाएं यह सोचकर डर जाएं कि वर्दी के अंदर बलात्कारी आ गए हैं। हम इन्हें छोड़ेंगे नहीं और सबको कोर्ट लेकर जाएंगे। पुलिस इस गलतफहमी में ना रहे कि उनकी इन एफआईआर से हम लोग डर जाएंगे।
06:05 pm 30/09/2026