47.6 लाख लोगों के नाम काटकर उनमें 31.6 लाख लोगों को विसंगतियां पूरी करने का नोटिस
दिल्ली: एसआईआर प्रक्रिया में जहां पूरी पारदर्शिता, बिना भेदभाव और संविधान के अंतर्गत होनी चाहिए थी, एक भारत में, एक कानून और बराबर का हक मिलना चाहिए था, वहां चुनाव आयोग ने देश विशेष कर दिल्ली को दो वर्गों में बांट दिया हैं। पहले वर्ग में वीआईपी लोगों के नाम है और दूसरे वर्ग झुग्गी झौपड़ी, अनाधिकृत कॉलोनी के आम लोग हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया विसंगतियों को पूरा करने के लिए वीआईपी लोग जैसे मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित बड़े लोगों की विसंगतियों को तो एसडीएम और अधिकारी उनके घर जाकर पूरा कर है लेकिन आम 31.6 लाख लोगों को विसंगतियों को पूरा करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। विसंगतियों में वीआईपी का नाम डालकर चुनाव आयोग ने सिर्फ अपनी नाकामियों को छिपाया है।
एसआईआर प्रक्रिया शुरु होने से पहले भाजपा के छोटे-बड़े नेताओं ने तर्क दिया था कि एसआईआर देश के लिए जरुरी है। इससे बंग्लादेशी, रोहिंग्या जो गैर कानूनी रुप से रह रहे हैं उनकी पहचान करके देश से बाहर भेजेंगे। मैं चुनाव आयोग से पूछना चाहता हूँ कि बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, राजस्थान सहित अन्य राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया में 19 करोड़ काटे गए नामांे में से कितने लोगों को केन्द्र सरकार ने देश से बाहर किया है। दिल्ली में 1.45 करोड़ मतदाताओं एसआईआर प्रक्रिया में 47.6 लाख लोगों का नाम काट दिया गया और उनमें से 31.6 लाख लोगों को विसंगतियां होने का नोटिस दिया गया है। माता पिता की उम्र में अंतर, नाम की स्पेलिंग में गलत लिखावट, पता में अंतर आदि जो कम्प्यूटरकृत शैली के दोष है, जिन्हें कारण बनाकर चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किया है। उन्होंने कहा कि यह चिंताजनक है कि 31.6 लाख लोगांे में 70 प्रतिशत लोग अनाधिकृत काॅलोनियों, जे.जे. कलस्टर और सरकार द्वारा ध्वस्त किए गए जेजे कलस्टर के है, जिनके पास एन्यूमरेशन फार्म पहुॅचा ही नही। 30 सितम्बर तक विसंगतियों को पूरा करने का समय दिया गया है जो बहुत ही कम है, इसे बढ़ाकर 30 नवम्बर, 2026 किया जाना चाहिए, क्योंकि यह वो लोग है जो अपनी रोजी रोटी के लिए सुबह निकलते है शाम को आते है, कैसे चुनाव आयोग द्वारा मांगे गए 12 दस्तावेजों को इतनी जल्दी पेश कर सकते है। चुनाव ऐसे लोगों को फार्म 6 भरने के लिए बाधित करके उन्हें नए सिरे से वोटर बना रहा है जिसके यह हवाला मांग रहा है कि वह पहली बार वोटर आवेदन कर रहे है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने समाज के एक वर्ग जिसे वोटर पहचान पत्र की जरुरत है उसे एसआईआर प्रक्रिया में लगभग आधी आबादी को मतदाता सूची से बाहर कर दिया है। गरीब आदमी जिसके लिए वोटर कार्ड पहचान, रहने का प्रमाण, कि कितने वर्ष से रह रहा है। चुनाव आयोग ने दिल्ली के 47.6 लाख लोगों का नाम काट उन्हें उनके अधिकार से वंचित करने की साजिश की है। जबकि संविधान मंे प्रत्येक नागरिक का चुनाव आयोग में नाम दर्ज करने का प्रावधान है। भाजपा ने सत्ता में आते ही जेजे कलस्टर को तोड़ना शुरु किया और उन्हें एक सोची समझी साजिश के तहत दिल्ली की वोटर लिस्ट से हटाने का काम किया है। उन्होंने उदाहरण स्वरुप बताया कि सिविल लाईन्स के बूथ 33 नम्बर बेला रोड़ की झुग्गी उजाड़ने के बाद सिर्फ 1 वोट बचा है जहां 728 वोट थे।
चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर प्रक्रिया में लोगों के नाम काटने के बाद दलितों, पिछड़ो, गरीबों और मजदूर वर्ग की आवाज उठाते हुए चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया का आॅडिट कराने की मांग की है कि मौजूदा मतदाता सूची में नाम होने के बावजूद 47.6 लाख लोगों के नाम कैसे काटे गए? उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के दिशा निर्देशानुसार जिस बूथ पर 2 प्रतिशत से अधिक विसंगतियां है उनको ईआरओ सत्यापित करके त्रुटियों को सही करेंगे। 14947 बूथों में से 99.66 प्रतिशत 14896 बूथों पर 2 प्रतिशत से अधिक विसंगतियां है, जबकि दिल्ली भर में सिर्फ 1200 ईआरओ है। क्या पूरी दिल्ली में 14896 बूथों पर 31.6 लाख नागरिकों की विसंगतियों को ईआरओ व्यक्तिगत रुप से 30 तारीख तक सत्यापित करके सही कर सकते है?
एसआईआर प्रक्रिया से पहले हमारे बीएलए-2 सभी 13021 बूथों पर दिल्ली के लोगों की सहायता के लिए काम कर रहे थे, लेकिन पूरी एसआईआर प्रक्रिया में चुनाव आयोग ने हमारे बीएलए-2 और बूथ मेनेजमेंट कमेटी की आपत्तियों को नकार कर दिल्ली में 47.6 लाख लोगों के नाम काट दिए, जबकि यह 30-40 वर्षों से राजधानी में रह रहे है। उन्होंने कहा कि भारत के हर नागरिक को मतदाता बनने का अधिकार है, जिसे भाजपा एक साजिश के तहत छीन रही है। देश भर में अब हुई एसआईआर प्रक्रिया में भाजपा सरकार ने 19 करोड़ लोगों के नाम काट कर उनका मताधिकार छीन लिया है।
काजी निजामुद्दीन ने कहा कि भाजपा द्वारा चुनाव जीतने की साजिश के तहत शुरु की गई एसआईआर प्रक्रिया पूरी तरह राजनीतिक नरसंहार है।
06:53 pm 23/09/2026