
दिल्ली: केंद्रीय बजट में प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवंटित बजट में 209 करोड़ की कटौती भाजपा की मोदी सरकार की प्रदूषण नियंत्रण पर गंभीरता को दर्शाता है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने साधा निशाना कहा कि राजधानी दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण पर पहले से नाकाम रेखा गुप्ता सरकार के बाद अब केन्द्र सरकार भी नही चाहती कि खतरनाक दमघोटू प्रदूषण से दिल्लीवासियों को राहत पहुॅचे। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष प्रदूषण नियंत्रण पर देश भर के लिए आवंटित 1300 करोड़ को घटाकर इस वर्ष 1091 करोड़ करना भाजपा सरकार की प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि जहरीली हवा से ग्रस्त राजधानी के प्रदूषण नियंत्रण के लिए सीएक्यूएम को 35.26 करोड़ आवंटित करना नाकाफी राशि है, जबकि दिल्ली विश्व के प्रदूषित शहरों में नम्बर वन है। भारी बारिश और तेज हवा चलने के बावजूद राजधानी में पूरे जनवरी में एक भी दिन 100 एक्यूआई से नीचे नही रहने से दिल्ली की आवो हवा का पता चलता है। केन्द्र सरकार द्वारा प्रदूषण नियंत्रण पर बजट में कटौती पर दिल्ली की मुख्यमंत्री की चुप्पी उनके दिल्ली वालों के साथ विश्वासघात को दर्शाता है क्योंकि विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रदूषण को जड़ से खत्म करने का दावा किया था। अब वादे के उलट दिल्ली की हवा पिछले एक वर्ष मंे हर दिन अधिक जहरीली होकर राजधानी गैस चैंबर बन चुकी है।
देश सहित दिल्ली में वायु प्रदूषण के कारण हर वर्ष लाखों लोगों की मौत होने के बावजूद सरकार प्रदूषण नियंत्रण पर चिंतित नही है। प्रदूषण नियंत्रण के बजट में कटौती से सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बढ़ सकता है क्योंकि प्रदूषण के मुख्य स्रोतों को नियंत्रित करना सरकार की प्राथमिकताओं कभी नही रहा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत देश के 82 प्रदूषित शहरों में हवा की गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों पर बटज कटौती से बुरा असर पड़ेगा। रेखा सरकार ने दिल्ली में अभी तक प्रदूषण नियंत्रण पर कोई ठोस कार्यवाही नही की, सिर्फ पिछली आम आदमी पार्टी की प्रदूषण नियंत्रण की कार्यवाहियों का अनुसरण ही किया है।
प्रदेश कमेटी के अध्यक्ष ने कहा कि केन्द्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड और संसदीय पैनल द्वारा दिल्ली एनसीआर व अन्य गंभीर प्रदूषण से जूझ रहे शहरों के प्रदूषण नियंत्रण पर बजट खर्च नही किए जाने पर चिंता जताने की जगह एक योजना तैयार करके लोगों को प्रदूषण से निजात दिलाने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदूषण पर बजट में कटौती का एक बड़ा कारण है कि फंड का उपयोग न होना। केन्द्रीय बजट में वर्ष 2024-25 में प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवंटित 858 करोड़ रुपये से 31 जनवरी 2025 तक एक प्रतिशत से भी कम 7.22 करोड़ खर्च करना केन्द्र सरकार की प्रशासनिक गैर जिम्मेदारी को दर्शाता है।