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2019 से अब तक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधी प्रत्यर्पित । इन भगोड़े अपराधियों में नार्कोटिक्स आरोपी, मर्डर, रेप और पॉक्सो मामलों के वांछित शामिल हैं। भगोड़ों को वापस लाने का यह अभियान टेररिज्म, प्रो-खालिस्तान एक्स्ट्रीमिज्म, गैंगस्टर-टेरर कन्वर्जेंस, नार्कोटिक्स, साइबर फ्रॉड और फेक करेंसी तक फैला है। तहव्वुर हुसैन राणा का अमेरिका से एक्स्ट्राडिशन भारत के संकल्प और जटिल टेरर मामलों में धैर्यपूर्ण लीगल-डिप्लोमैटिक प्रयास का बड़ा उदाहरण है। जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों में विदेशों में बैठे भगोड़ों का उपयोग टेरर, नार्को-टेरर और क्रॉस-बॉर्डर सपोर्ट नेटवर्क को चलाने में हो रहा था।
भगोड़े अपराधियों के खिलाफ सफलता का आधार केवल संयोग नहीं, बल्कि विश्वसनीयता, लीगल तैयारी, डिप्लोमैटिक पर्सिस्टेंस और सतत फॉलो-अप है। भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम' (Fugitive Economic Offenders Act),2019 में एनआइए और यूपीए संशोधन अधिनियम और 2025 में ‘BHARTPOL’ लाँच जिसके तहत 1400 से अधिक एजेंसियों को इंटरपोल से जोड़ा गया । परस्पर सूचना साँझा करने का समय घटकर रह गया ।ऑपरेशन त्रिशूल के माध्यम से नाम और पहचान बदलकर छिपे हुए भगोड़ों की जियो लोकेशन ट्रैक करने के लिए सैटेलाइट एवं डिजिटल फुटप्रिंट का इस्तेमाल किया गया ।
प्रत्यर्पण प्रक्रिया तेज करने के लिए वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से मुकदमों की सुनवाई जैसी तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है। इंटरपोल द्वारा पिछले 3 वर्षों में 401 भगोड़े अपराधियों के विरुद्ध रेड कार्नर नोटिस जारी किए गए । जनवरी, 2026 में IB के मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) के तहत स्टैंडिंग फोकस ग्रुप का गठन हुआ । यह समूह फ्यूजिटिव प्रायोरिटी, डॉसियर स्टैंडर्डाइजेशन, सूचना गैप हटाने, विदेशी पार्टनर्स से फॉलो-अप और राज्य मामलों को राष्ट्रीय समर्थन देता है। विदेशों में बैठे भगोड़े निष्क्रिय केस-फाइल्स नहीं, बल्कि लाइव ऑपरेशनल थ्रेट्स हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA) को सख्ती से लागू किया गया । PMLA के सख्ती से लागू होने से वर्ष 2019 से 2026 तक भगौड़ों की कुल ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त हुई । 2019 से 2026 तक ₹18,762 करोड़ की सफल वापसी (Restitution) की हुई , इसमें देश छोड़कर भागे आर्थिक अपराधियों का पैसा भी शामिल है।