काशी विशà¥à¤µà¤¨à¤¾à¤¥ परिसर से सटी हà¥à¤ˆ जà¥à¤žà¤¾à¤¨ वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥€ मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ के सरà¥à¤µà¥‡à¤•à¥à¤·à¤£ के बाद वजॠघर परिसर में शिवलिंग के पाये जाने पर हिनà¥à¤¦à¥‚ पकà¥à¤· के सामने मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® पकà¥à¤· à¤à¥€ मैदान में उतरा I जहाठहिनà¥à¤¦à¥‚ पकà¥à¤· का मानना है कि मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ परिसर में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ उजॠघर में शिवलिंग है वहीं मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® पकà¥à¤· की दलील है कि वजॠघर में जिसे शिवलिंग बताया जा रहा है वह शिवलिंग नहीं फाउंटेन है I इस दलील को लेकर मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® पकà¥à¤· सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥à¤š नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में पहà¥à¤à¤š गया यह बात ऑर है कि कोरà¥à¤Ÿ ने इस बाबत नोटिस à¤à¥€ जारी कर दिया है कि वाराणसी के डिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤•à¥à¤Ÿ मजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ वजॠघर जहां पर शिवलिंग मिला है सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ के घेरे में लिया जाना चाहिठI मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ में नमाज पà¥à¥‡ जाने पर पाबंदी नहीं है लेकिन वजॠकी वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ किसी अनà¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर की जाठI साथ ही निचली अदालत में इस बाबत कारà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¹à¥€ के सà¥à¤à¤¾à¤µ दिये हैं I कोरà¥à¤Ÿ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ नियà¥à¤•à¥à¤¤ à¤à¤¡à¤µà¥‹à¤•ेट कमीशनर अजय मिशà¥à¤°à¤¾ à¤à¤µà¤‚ उनकी टीम दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किठगठसरà¥à¤µà¥‡à¤•à¥à¤·à¤£ से à¤à¥€ शिवलिंग मिलने की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ होती है यह बात ऑर कि रिपोरà¥à¤Ÿ दाखिल किये जाने से पूरà¥à¤µ ही रिपोरà¥à¤Ÿ के तथà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को सारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• करने अà¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤— में à¤à¤¡à¤µà¥‹à¤•ेट मिशà¥à¤°à¤¾ को हटकर उनकी जगह à¤à¤¡à¤µà¥‹à¤•ेट विशाल सिंह को à¤à¤¡à¤µà¥‹à¤•ेट कमीशनर नियà¥à¤•à¥à¤¤ किया गया है ऑर à¤à¤¡à¤µà¥‹à¤•ेट मिशà¥à¤°à¤¾ को रिपोरà¥à¤Ÿ बनाने में उनके सहयोगी के रूप में कारà¥à¤¯ करना होगा I मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® पकà¥à¤· की दलील जो à¤à¥€ हो हिनà¥à¤¦à¥‚ वासà¥à¤¤à¥ शासà¥à¤¤à¥à¤° के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° नंदी जी का मà¥à¤¹ शिवलिंग की तरफ होता है I अब गौर फरमाते है काशी विशà¥à¤µà¤¨à¤¾à¤¥ परिसरपर तो यहाठनंदी जी का मà¥à¤– शिवलिंग की बजाये मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ की तरफ है ऑर दीवार के पीछे वजॠघर है जहां पर कथित तौर पर शिवलिंग होने के पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ हैं I
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हिंदू पकà¥à¤· का कहना है कि 1669 में मà¥à¤—ल शासक औरंगजेब ने यहां काशी विशà¥à¤µà¤¨à¤¾à¤¥ मंदिर को तोड़कर जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ बनाई थी. हालांकि, मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® पकà¥à¤· का कहना है कि यहां मंदिर नहीं था और शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ से ही मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ बनी थी I यदि इतिहास के पनà¥à¤¨à¥‹à¤‚ à¤à¤µà¤‚ उपलबà¥à¤§ जानकारियों को खंगाला जाये तो पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ शिवलिंग के ही मिलते हैं I मà¥à¤—लकालीन इतिहासकारों के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° काशी के मà¥à¤–à¥à¤¯ शिवालय को धà¥à¤µà¤¸à¥à¤¤ करने के बाद बेशकीमती पतà¥à¤¥à¤° जैसे दिखाई देने वाले शिवलिंग को आकà¥à¤°à¤¾à¤‚ता अपने साथ ले जाना चाहते थे I तमाम कोशिशों के बाद à¤à¥€ वह शिवलिंग को अपने सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ से नहीं हिला पाये आखिर उनà¥à¤¹à¥‡ शिवलिंग छोड़ कर जाना पड़ा I बीà¤à¤šà¤¯à¥‚ के इतिहास विà¤à¤¾à¤— के पà¥à¤°à¥‹. पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ à¤à¤¾à¤°à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤œ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° कà¥à¤¤à¥à¤¬à¥à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ à¤à¤¬à¤•, रजिया सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨, सिंकदर लोदी और औरंगजेब ने काशी के देवालयों को जबरदसà¥à¤¤ नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाया। सà¤à¥€ ने अपने-अपने काल में काशी के पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ शिवालय पर à¤à¥€ आकà¥à¤°à¤®à¤£ किà¤à¥¤ मंदिर का खजाना लूटा लेकिन लाख कोशिश के बाद à¤à¥€ शिवलिंग को अपने साथ नहीं ले जा सके। अंगà¥à¤°à¥‡à¤œ दंडाधिकारी वॉटसन दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ 30 दिसमà¥à¤¬à¤° 1810 को ‘वाईस पà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤¡à¥‡à¤‚ट ऑफ कॉउनà¥à¤¸à¤¿à¤²’ में जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ परिसर हिनà¥à¤¦à¥à¤“ं को सौपे जाने की गà¥à¤œà¤¾à¤°à¤¿à¤¶ की गई । उनके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° परिसर में हर तरफ हिंदà¥à¤“ं के देवी-देवताओं के मंदिरों का होना à¤à¤µà¤‚ मंदिरों के बीच में मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ का होना इस बात का पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ है कि वह सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ à¤à¥€ हिंदà¥à¤“ं है। बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ शासन ने उनके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ की गई गà¥à¤œà¤¾à¤°à¤¿à¤¶ को खारिज कर दिया । तब से जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ परिसर को लेकर दोनों पकà¥à¤· अपने-अपने दावों पर अड़े हैं। संसà¥à¤•ृति à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤¤à¥à¤µ विà¤à¤¾à¤—(बीà¤à¤šà¤¯à¥‚) दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किठगठशोध के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° 1809 में जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¾à¤ªà¥€ को लेकर हिंदू-मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® के मधà¥à¤¯ संघरà¥à¤· हà¥à¤† ऑर जà¥à¤žà¤¾à¤¨ वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥€ मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ पर हिंदà¥à¤“ं का कबà¥à¤œà¤¾ हो गया I 11 अगसà¥à¤¤ 1936 को सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ कॉउंसिल, अंजà¥à¤®à¤¨ इंतजामिया मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ कमेटी तथा सà¥à¤¨à¥à¤¨à¥€ सेंटà¥à¤°à¤² वफà¥à¤« बोरà¥à¤¡ ने याचिका दायर की। 1937 में केस को खारिज हो गया। पांच साल तक चला मामला 1942 में हाईकोरà¥à¤Ÿ में गया। तब से विवाद चला आ रहा है I
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1991 में वाराणसी के पà¥à¤œà¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के à¤à¤• समूह ने अदालत में याचिका दायर कर जà¥à¤žà¤¾à¤¨ वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥€ मंदिर परिसर में पूजा की अनà¥à¤®à¤¤à¤¿ मांगी थी I उचà¥à¤š नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ ने 2019 में याचिकाकरà¥à¤¤à¤¾à¤“ं की सरà¥à¤µà¥‡ की मांग जाने पर रोक लगाने का आदेश दिया I विवाद तब गहराया जब पाà¤à¤š हिनà¥à¤¦à¥‚ महिलाओं ने मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ परिसर के à¤à¥€à¤¤à¤° शृंगार गौरी à¤à¤µà¤‚ अनà¥à¤¯ मूरà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की नियमित पूजा करने की मांग की I फिलहाल चौथे नवरातà¥à¤°à¥‡ के दिन साल में à¤à¤• बार पूजा करने की इजाजत है I दोनों ही पकà¥à¤·à¥‹à¤‚ के दावे अदालत में हैं à¤à¤µà¤‚ मामला कोरà¥à¤Ÿ में विचारधीन है ।