दिल की बात कीजिए अपनो से छुपाए नहीं


दिल्ली: इस दौर में सब जब बड़े बजट की एक्शन रोमांटिक और थ्रिलर फिल्में टिकट खिड़की पर मोटी कमाई करती है और फिल्म मेकर भी , दर्शकों के मिजाज और बॉक्स ऑफ़िस के मिजाज को देखकर ऐसी फिल्में बनाने में लगे है वहीं इस बीच अगर कोई यंग फिल्म मेकर इस भीड़ से दूर हट कर हमारे और आपके रिश्तों की गर्माहट और बड़े शहरों में परिवारो के बीच बढ़ती लगातार दूरियो पर बॉक्स ऑफिस का मोह छोड़ कर अच्छे खासे बजट के साथ फिल्म बनाए तो इसकी प्रशंसा होनी चाहिए।
मैक्स मिन और म्याऊज़ाकी के प्रेस प्रिव्यू शो की समाप्ति पर हर यहां मौजूद मेहमान क्रिटिक फिल्म की तारीफें करते नजर आए । रमेश एक सफल बिजनेसमैन है लेकिन उसकी लाइफ में सुकून खुशी तो दूर की बात सिर्फ तनाव है अपने इसी तनाव को दूर करने और जिंदगी को एक बार फिर ट्रैक पर लाने के मकसद से रमेश एक मनोचिकित्सक के साथ सेशंस अटेंड करके उससे अपने दिल की बात करता है , रमेश की पत्नी वसुधा कुछ साल पहले कैंसर की बीमारी से चल बसी, उसका इकलौता बेटा मैक्स उर्फ महेश भी अब उसके साथ नहीं रहता मैक्स अपनी एक मुस्लिम गर्ल फ्रेंड के साथ खुश है और पापा से दूरियां बना ली है , रमेश चाहता है कि उसका इकलौता बेटा उसके बिजनेस को संभाले लेकिन मैक्स को जिंगल और वेस्टर्न म्यूजिक का जुनून है और इसी में अपना करियर बनाना चाहता है, रमेश को मंजूर नहीं की एक मुस्लिम लड़की उसके परिवार की बहू बने। रमेश के पिता एक मशहूर क्लासिकल सिंगर है लेकिन उम्र के इस आखिरी पड़ाव में वह अपने बेटे रमेश के साथ नहीं एक ओल्ड होम में रहते है। इन्हीं के साथ मैक्स के साथ एक बिल्ली म्याऊंजी भी है जो स्टोरी का खास हिस्सा है।
मेरी नजर में यह फिल्म एक भावनात्मक संदेश देती है फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि इंसानों और उनके रिश्तों के अपनापन को फिर से महसूस कराने की अच्छी कोशिश है। फिल्म उसी पुराने अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव को वापस लाने की कोशिश करेगी। फिल्म में दर्शकों को एक ऐसी दुनिया की झलक मिलेगी, जहां आधुनिक रिश्तों की जटिलताएं, परिवार के बदलते समीकरण और एक खास बिल्ली म्याऊज़ाकी कहानी का अहम हिस्सा बनकर सामने आती है।इस फिल्म की कहानी ऐसे रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती है जहां समय के साथ प्यार के मायने बदलते हैं, परिवार में दूरियां आती हैं और फिर कुछ खास रिश्ते लोगों को दोबारा जोड़ देते हैं।
अब तक इस फिल्म ने देश विदेश के अनेक फिल्म फेस्टिवल में ना सिर्फ दर्शकों, ज्यूरी और क्रिटिक्स का ध्यान खींचा बल्कि अवॉर्ड भी अपने नाम किये।
मुंबई की पृष्ठभूमि और मानसून के खूबसूरत माहौल में बनी यह फिल्म जिंदगी की छोटी बातों को आपके साथ जोड़ने में सफल है, फिल्म में म्याऊज़ाकी नाम की बिल्ली भी आपका ध्यान खींचती है ,फिल्म में बिल्ली की भूमिका इंसानों के बीच प्यार, और जुड़ाव का है।फिल्म में नई पीढ़ी के स्टार्स के साथ अनुभवी स्टार्स ने खुद को फिल्म की स्टोरी के किरदार में खुद को ढाल अभिनय किया यही वजह है सभी दर्शकों की वाह वाही लूटने में कामयाब रहे। इन कलाकारो का अभिनय फिल्म को और मजबूती प्रदान करता हैं।
फिल्म के लेखक निर्देशक पद्मकुमार नरसिम्हामूर्ति की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने अपनी लिखी स्क्रिप्ट को स्टार्ट टू एंड कही भी ट्रैक से भटकने नहीं दिया फिल्म का हर किरदार स्टोरी का अहम हिस्सा है उन्होंने फिल्म नगरी के दिग्गज और न्यू कमर्स कलाकारों को एक साथ पेश किया और सभी कलाकारों से उनकी क्षमता के मुताबिक बेहतरीन काम किया, अगर पद्म फिल्म को दस से पंद्रह मिनट तक कम रखते तो स्टार्ट टू एंड फिल्म हर क्लास के दर्शक को बांध कर रखती। शायद पहली बार उन्होंने एक बिल्ली को कहानी का अहम हिस्सा बना कर पेश किया , फिल्मों में डॉग तो अक्सर नजर आते है लेकिन पद्म कुमार ने बिल्ली को पेश करके एक नई शुरुआत की। अगर आप एक बेहतरीन स्टोरी पर दिग्गज स्टार्स साथ बनी एक सार्थक फिल्म देखना चाहते है तो यह फिल्म आपके लिए है।
कलाकार : नफीसा अली, मेधा शंकर, मंदिरा बेदी और आदिल हुसैन, स्टोरी, निर्देशन: पद्म कुमार राव, निर्माता: शैल ओसवाल, समीक्षा ओसवाल, सेंसर: यू ए, अवधि: 143 मिनट.
06:53 pm 23/07/2026