नई दिल्ली 26, Jan 2021

लेख

1 - किसान आंदोलन का रूख कहीं पंजाब में संभावित चुनाव तो नहीं

2 - बिहार में फिर एक बार यूपीए का परचम

3 - बिहार में इस बार का चुनावी मुद्दा है विकास

4 - जातिगत एवं सांप्रदायिक एंगल से चमकती राजनीति

5 - हाथरस मामले में तुष्टिकरण की राजनीति

6 - गणपति बप्पा मोरया पुढ़ल बरस तू लोकर आ

7 - बालीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत हत्या या आत्महत्या

8 - आत्मनिर्भर भारत देश के लिये महामंत्र

9 - भूमि पूजन के साथ शुरू हुई राम लला के गृह निर्माण की तैयारी

10 - उत्तर एवं पूर्वोत्तर भारत पर छाया प्राकृति का प्रकोप

11 - साइबर वार ने लिया खतरनाक मोड़

12 - सीमा तनाव के पीछे चीन की दोहरी मानसिक्ता

13 - कोरोना संक्रमण काल में भी सक्रिय है पासों की बिसात पर राजनीति

14 - अनानास मे विस्फोटक पदार्थ डालकर हाथी की हत्या

15 - उड़ीसा एवं वेस्ट बंगाल में तबाही का मंजर

16 - जारी है प्रवासी मजदूरों का भारी संख्या में पलायन

17 - कश्मीर में आज भी सक्रिय जहिादी गतिविधियाँ

18 - परस्पर सदभाव संवाद एवं शांति से होगी कोविड 19 पर विजय

19 - पालघर हत्याकांड की सीबीआई जाँच की माँग

20 - समरथ को नहीं दोष गोसाई

21 - जिला एवं तहसील स्तर पर प्रकाशनों की दुर्दशा का भी जरूरी है संज्ञान

22 - आगामी सप्ताह सख्ति से होगा लाक डाउन के नियमों का अनुपालन

23 - ध्यान एवं शारिरिक क्रियाओं के माध्यम से फिट रहिये स्वस्थ्य रहिये

24 - कोविद 19 से निपटने का महामंत्र संयम और संकल्प

25 - मध्य प्रदेश में बढ़ी कांग्रेस की सिरदर्दी

26 - कुछ इस अंदाज में मिले ट्रंप और मोदी

27 - झाड़ू ने किया हाथ और कमल का सफाया

28 - वायदों की बिसात पर दिल्ली की राजनीति

29 - 71 वें गंतंत्र दिवस परेड का आकर्षण सीआरपीएफ का मोटर सवार महिला दस्ता

30 - साधना एवं व्यायाम पर आधारित फालुन दाफा

31 - नागरिक्ता संशोधन कानून पर हो रही है वोट बेंक की राजनीति

32 - एनआरसी के नाम पर तुष्टिकरण की राजनीति

33 - झारखंड में समय की कसौटी पर है चाणक्य का चक्रव्युह

34 - चोसर की बिसात पर है महाराष्ट्र की सियासत

35 - राम लला को मिला उनका मालिकाना हक

36 - माकूल इंतेजामात के साथ मनाया जा रहा है छट महोत्सव

37 - दीपावली की हार्दिक शुभेच्छा

38 - एक बार फिर कमल खिला हरियाणा और महाराष्ट्र में

39 - इंसाफ की तलाश में भटक रहे हैं पीएमसी बैंक के खाताधारी

40 - विदेश नीति बनाम अर्थ नीति

41 - विजय दशमी के दिन होती है रावण की पूजा

42 - महाराष्ट्र और हरियाणा में सक्रिय राजनीतिक सरगर्मियाँ

43 - कुछ इस अंदाज में दिखे ट्रंप और मोदी

44 - गणपति बप्पा मोरया पुध्चे बरस तू लोकरया

45 - 9 राज्यों में गहराया प्राकृति का प्रकोप

46 - गो गो गो गोविंदा

47 - जम्मू-कश्मीर की पंचायतों में भी लहराया तिरंगा

48 - जम्मू-कश्मीर में बदलते परिवेश

49 - राम मंदिर एक परिकल्पना

50 - तीन बार रहीं दिल्ली की मुख्य-मंत्री हुई अलविदा

किसान आंदोलन का रूख कहीं पंजाब में संभावित चुनाव तो नहीं

किसानों से प्रघान-मंत्री नरेंद्र भाई मोदी की मुलाकात के लिये 3 दिसंबर का दिन मुकरर होने के बावजूद आखिर क्यों दिखाई दे रही है पंजाब-हरियाणा के किसानों में दिल्ली में पहुँचने  की उतावली ? सिंधू बार्डर पर पुलिस के साथ जोर अजमाइश करने वाले क्या वास्तव में किसान थे या फिर किसानी का जामा ओढ़े अढ़ातियों एवं जमींदारों के नुमाइंदे ? जेहन में बहुत से सवाल हैं जिनका खुलासा होना अभी बाकी है ।


प्रदर्शन कर रहे इन किसानों को विपक्ष का समर्थन प्राप्त है । हरसूल बार्डर पर एकत्रित प्रदर्शनकारियों के खाने की व्यवस्था दिल्ली की 9 मस्जिदों द्वारा की जा रही है । हालांकि सोनिपत के मशहूर अमरीक सुखदेव ढ़ाबे द्वारा भी प्रदर्शनकारी किसानों को  खाने-पीने का निःशुल्क मुहैया कराया जा रहा है । एनआरसी एवं सीएए के खिलाफ शाहीन बाग में धरने पर बैठी महिलाओं के खाने की व्यवस्था बब्बर खलसा ग्रुप ने की थी ।

पहले सीएए एवं एनआरसी के मामले में और अब किसान जन-आंदोलन के लिये आखिर क्यों हो गाया है एकत्रित विपक्ष ? कांग्रेस पार्टी ने जहाँ हरसूल बार्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों को रोकने के लिए पुलिस द्वारा प्रेशर पाइप से जल फेंके जाने एवं लाठी चार्ज को दमनकारी बताया है वहीं आम आदमी पार्टी  ने  पुलिस एवं खुफियातंत्र को धत्ता देकर आम आदमी पार्टी के 9 विधायकों द्वारा उनके पंजाब के प्रभारी जरनैल सिंह के नेतृत्व में प्रधान-मंत्री आवास पर हल्ला बोलने का दावा किया है ।  


हालांकि केंद्र सरकार का दावा है कि संसद द्वारा पारित यह बिल बिचैलियों एवं अढ़तियों की मोनोपली तोड़कर किसानों को वाजिब एवं उचित दामों पर दामों पर फसल बेचने की स्वतंत्रता देते हैं । प्रधान-मंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने भी बनारस में आज अपने भाषण में कृषि बिल का उल्लेख किया है तथा किसानों से फिरकापरस्तों से सावधान रहने की ताकीद की है  । पंजाब में विधान-सभा चुनाव संभावित  हैं । कहीं यह मामला किस्सा कुर्सी का तो नहीं .....

 

बिहार में फिर एक बार यूपीए का परचम

तमाम अटकलों एवं मीडिया पर चल रही कवायदों के पलट बिहार विधान-सभा चुनावों में एक बार फिर नरेंद्र भाई मोदी के नेतृत्व में यूपीए गठबंधन को मिला पूर्ण बहुमत । 1977 के लोकसभा चुनावों के बाद शायद यह दूसरा लोकतांत्रिक चुनाव होगा जिसमें चुनाव परिणाम रूझान के पलट रहे । विशेषज्ञ जिसे स्विंग का नाम देते हैं ।


एक बार फिर मोदी की लहर ने बिहार के विधान-सभा की बाजी पलट दी । यूपीए गठबंधन को 125,महा गठबंधन को 106 एवं चिराग पासवान की पार्टी लोक जन शक्ति पार्टी को मात्र एक सीट मिली । इसमें दोराय नहीं कि  महागठबंधन एवं  यूपीए गठबंधन के बीच काँटे की टक्कर रही लेकिन चुनाव में कांग्रेस की प्रफोरमेंस ने पूरी बाजी ही उलट दी । कांग्रेस को 70 सीटों में से मात्र 19 सीटों में विजय हासिल हुई ।


इस चुनाव में  जीत किसी को भी मिली,दो राय नहीं कि  तेजस्वी यादव के नेतृत्व आरजेडी एक शक्तिशाली पार्टी के रूप में उभर कर आई है । केंद्रिय गृह मंत्री अमित भाई शाह ने इस जीत को बिहारवासियों की आशाओं एवं आकांक्षाओं की जीत मानते हुए नरेंद्र भाई मोदी एवं नितीश कुमार के डबल इंजन विकास की जीत बताया है....

 

बिहार में इस बार का चुनावी मुद्दा है विकास

बिहार के मौजूदा राजनैतिक  समीकरण के मध्य-नजर नहीं होगा आसान किसी भी गठबंधन के लिये एक तिहाई बहुमत से सरकार बनाना । शायद यह राजनीति का समीकरण जोड़-तोड के साथ ही पूरा हो । 243 विधान-सभा सीटों वाले बिहार राज्य में तीन चरण में चुनाव संभावित हैं  ।  28 अक्टूबर को 71 सीटों पर, 3 नवंबर को 94 सीटों पर एवं 7 नवंबर को 78 सीटों पर मतदान होगा । मतगणना की तारीख आगामी 10 नवंबर को मुकरर है ।

बिहार में राजनीति के पंडितों की अटकल है कि आगामी चुनावों में बीजेपी का जेडीयू के साथ एवं अप्रत्यक्ष रूप से एलजेडी के साथ गठबंधन है । दूसरी तरफ कांग्रेस का आरजेडी को समर्थन है । दिलचस्प बात यह है कि एलजेडी लगभग सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है एवं उसके नेता चिराग पासवान दिवंगत नेता रामविलास पासवान के बेटे हैं । माकूल सीटें मिलने पर बिहार की राजनीति में चिराग पासवान की भागीदारी एवं दावेदारी फिलहाल सवालिया है ।


आगामी विधान-सभा चुनावों से नीतिश,तेजस्वी एवं चिराग तीनों का ही भविष्य जुड़ा है । सभी दलों के दिग्गज नेता बिहार में डेरा डाले हैं एवं कोरोना के इस महाकाल में भी जन सभाओं का जोर है । आरोपों एवं प्रत्यारोपों के साथ वायदों को मीठी चासनी लपेटकर मतदाताओं को रिझााने का प्रयास जारी है । इस बार का चुनावी मुद्दा है  विकास । क्या वास्तव में बिहार का मतदाता उब चुका है एवं बदलाव चाहता है और या फिर यह  मात्र चुनावी जुमला है ।


जाति एवं लाठी की बिसात पर बिछी बिहार की राजनीति के मध्य-नजर विकास के  भविष्य का खुलासा समय के साथ हो ही जायेगा .....

 

जातिगत एवं सांप्रदायिक एंगल से चमकती राजनीति

राजस्थान के करोली में हुई एक पुजारी की जलाकर निर्मम हत्या को लेकर जहाँ पूरे देश में सनसनी है वहीं देश का एक राजनीतिक तबके में छाई है अजीब सी खमोशी । यह वही राजनीतिक तबका है जिसके बेनर तले हाथरस में इंसाफ के लिये रोजाना धरना-प्रदर्शन एवं चक्का जाम होता है ।आखिर इस खामोशी का राज क्या है । हाथरस में रोज दिखाई देने वाले कांग्रेस के नेता राहुल एवं प्रियंका गाँधी वाडरा क्यों नहीं दिखे करोली में । ना ही लाल टोपी लगाकर समाजवादी पार्टी के किसी कार्यकत्र्ता ने घेराव कर प्रशासन पर दबाव बनाया  और ना ही आम आदमी पार्टी के संजय सिंह दिखे ।

शायद जरूरत ही नहीं समझी क्योंकि ना तो यह मामला दलित से संबंधित है और ना ही सांप्रदायिक विशेष से संबंधित । यह तो जमीन के विवाद को लेकर पुजारी को जिंदा जलाने का मामला था । जातिगत और सांप्रदायिक ऐंगल से राजनीति चमकती भी तो भला कैसे । पीड़ित परिवार के साथ कोई दिखे तो दिल्ली से  बीजेपी के नेता कपिल मिश्रा जिन्होंने अपने बूते पर 25 लाख रूप्ये एकत्रित कर पीड़ित परिवार को  दिये और गाँव वाले। । राजस्थान की सियासत से जुड़ी एक शख्सियत का कहना था कि यह मामला हाथरस से अलग है ।

यदि देखा जाये तो राजस्थान में विपक्ष एवं देश की सबसे बड़ी पार्टी की भूमिका चंद नेताओं की बयानबाजी के अलावा कुछ खास नहीं रही । इस मामले में दो आरोपियों को गिरफतार किया गया है एवं तहकीकात जारी है । राज्य सरकार ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रूप्ये की राहत राशि एवं नौकरी दिये जाने का ऐलान किया है । इन सबके बीच विचारणीय है तो बस जातिगत एवं सांप्रदाय विशेष के नाम पर चमकती राजनीति.....

हाथरस मामले में तुष्टिकरण की राजनीति

हाथरस काँड से जन-मानस का स्तब्ध होना लाजमी है । इंसाफ के लिये कहीं न कहीं आवाज उठाया जाना भी जायज है । इन सबके के बीच कहीं न कहीं विचारणीय है इंसाफ के नाम पर सिक रही राजनैतिक रोटियाँ ।  हालाँकि मौजूदा सरकार ने डीसी एवं पुलिस अधिक्षक सहित क्षेत्र के संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और मामले की गंभीरता का संज्ञान लेते हुए सीबीआई द्वारा जाँच की पेशकश की है ।


14 सितंबर को हाथरस के एक गाँव की खेतों से चारा लेने जा रही 19 साल की लड़की का गाँव के कुछ लड़कों ने बलात्कार किया । बलात्कारियों के साथ मुकाबले के दौरान पीड़िता की रीढ़ की हड्डी टूट गई । जीवन मौत के संघर्ष बीच 15 दिन के बाद दिल्ली के एक अस्पताल में पीड़िता की मौत हो गई । ओटोप्सी रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता की मौत कुंद बल घात से रीढ़ की हड्डी का टूटना है न कि बल-अजमाइश । पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में गुप्ताँगों में पुराने जख्मों का तो जिकर है लेकिन बलात्कार का जिकर है । इस प्रकरण में गाँव के चार युवकों को नामजद किया गया है संदीप,रामू,लवकुश एवं रवि ।

परिवार की वक्त के अनुसार बदलती बयानबाजी एवं राजनैतिक दलों के बढ़ते घेराव से मौजूदा सरकार एवं स्थाननीय प्रशासन की सरदर्दी बढ़ गई है । आये दिन हो रहे धरने-प्रदर्शन एवं चक्का जाम से फिलहाल हाथरस की कानून-व्यवस्था चरमराई हुई है ।  यदि गौर फरमाया जाये तो केस के पेच उलझे हुए हैं । पोस्टमार्टम की एवं आटोप्सी रिपोर्ट मे बलात्कार की पुष्टि ना होने के बावजूद बलात्कार होने का राजनीतिक दबाव और पुलिस द्वारा बिना परिजन की रजामंदी लिये चुपचाप शव को जलाया जाना कहीं न कहीं मामले की सुई घुमा देता है ।


जहाँ तक इंसाफ का सवाल है वो पीड़ित पक्ष को मिलना ही चाहिए विचारणीय है तो बस इंसाफ दिये जाने के नाम पर जाति एवं तुष्टिकरण की राजनीति....
 

गणपति बप्पा मोरया पुढ़ल बरस तू लोकर आ

हर बार की तरह इस बार भी गणपति आया और फिर वापिस लौट गया अगले साल  फिर से आने का वादा करके । यह बात और है कि कोरोना वायरस के संक्रमण के दिशानिर्देशों के अंतगर्त इस बार के गणपति छोटे एवं पंडाल का आकार सीमित था ।
मायानगरी मुंबई में इस बार गणपति शांतिपूर्ण विदा हुए । ज्यादातर पंडालों में ही विसर्जन की व्यवस्था थी । कुछ एक ने गणपति को बीएमसी की गाड़ी में विदा किया और बीएमसी ने पूर्व निर्धारित स्थानों पर विलय किया ।
इस बार व्यापक स्तर पर गणपति पूजा का आयोजन एवं समुद्र तट पर विसर्जन वर्जित था । आयोजकों के अनुसार इस बार लाल बाग के राजा की भव्य प्रतिमा की जगह 11 दिन तक प्लाजमा एवं रक्त दान शिविर का आयोजन किया गया ।
आयोजन सीमित स्तर पर ही सही श्रद्धालुओं के मन में बस एक ही आस गणपति बप्पा मोरया पुढ़ल बरस तू लोकर आ.......

बालीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत हत्या या आत्महत्या

बालीवुड अभिनेता सुशांत राजपूत ने क्या आत्महत्या की थी या फिर उनकी हत्या हुई थी, एक सोची-समझी साजिश के तहत । रहस्यों पर से खुलासा  अभी बाकी है । सुप्रिम कोर्ट के निर्देशानुसार केंद्रिय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा गठित टीम द्वारा तहकीकात जारी है । हाई प्रोफाइल मामला होने के कारण पड़ सकता है जाँच कर रही टीम को आंतरिक एवं बाहरी चुनौतियों का सामना ।


सोशल मीडिया एवं मीडिया में  चल रही अटकलों के मध्यनजर यह एक सोची-समझी साजिश के तहत  हत्या का मामला है । परिवार वालों ने भी हत्या का मामला मानते हुए कुछ को प्रतिवादी बनाया है । मामले के उलझे हुए पेचों के मध्य सिने एवं राजनीति की कुछ हाई प्रोफाइल हस्तियों की भागीदारी की संभावनाओं से भी इंकार नहीं किया जा सकता ।


यदि सुशांत सिह राजपूत की हाइट एवं कमरे की छत की ऊँचाई को देखा जाये तो पंखे से लटककर आत्महत्या  नामुमकिन है । अफरातफरी में  परिवार के सदस्यों को भी अस्पताल एवं घर से दूर रखा गया । परिवार के सदस्य शमशान ने शमशान से ही उन्हें अंतिम विदाई दी । अस्पताल में कड़ी सुरक्षा के बावजूद भी सुशांत की सहयोगी रिया चक्रवर्ती एवं कुछ एक को  मोरचरी में शव के पास जाने दिया गया ।


जाँच के लिये आये बिहार पुलिस दल को स्थाननीय पुलिस द्वारा सहयोग के बजाये 14 दिन के लिये क्वारनटाइन किये जाने के  कारण, कहीं न कहीं सवाल स्थाननीय पुलिस की जाँच पर भी उठते हैं । क्वारनटाइन होने के बाद इस जाँच दल को खाली हाथ वापिस लौटना पड़ा । गौर फरमाने की बात यह है कि इस दल में भारतीय पुलिस सेवा स्तर के अधिकारी शामिल थे ।


केंद्रिय अन्वेषण ब्यूरो की टीम की मदद एआईआईएमएस के फोरंसिक एक्सपर्ट डाक्टरों की टीम कर रही है । यह टीम जाँच दल को फोरंसिक ऐंगल से जाँच करने में मदद करेगी । फिलहाल संदिग्धों के साथ जवाब तलब का दौर है । जाँच दल की रिपोर्ट का खुलासा तो वक्त आने पर हो ही जायेगा । तमाम कवायदों के बावजूद क्या मिल पायेगा सुशांत को इंसाफ....

 

आत्मनिर्भर भारत देश के लिये महामंत्र

दिल्ली के लाल किले से अपने उदबोधन में प्रधान-मंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने  सैनिकों की वीरता को याद करते हुए एवं सरकार की उपलब्धियाँ गिनवाते हुऐ मौजूदा चुनौतियों से निपटने में आत्मनिर्भर भारत को मूल मंत्र बताया ।


वह 74 वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में लालकिले में आयेजित ध्वजारोहण समारोह में तिरंगा फेहराने के बाद देश को संबोधित कर रहे थे । बाटला हाउस एनकाउंटर में फर्ज को अंजाम देते हुए शहीद हुए इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा एवं स्पेशल पुलिस आयुक्त राजेश खुराना सहित दिल्ली पुलिस के 35 पुलिसकर्मियों एवं अधिकारियों को पुलिस मेडल से संमानित किया गया ।



देश भर में मनाई जा रही है देश की आजादी की 74 वीं  वर्षगाँथ धूम-धाम से । सियसतदानों ने लाल किले पर तो आम नागरिकों ने कोरोना वायरस संक्रमण के मध्यनजर दिशानिर्देशों का अनुपालन करते हुए  धर पर ही टेलीविजन में प्रोग्राम देखकर और बच्चों एवं युवाओं ने छत पर पतंग उड़ाकर मनाया स्वतंत्रता दिवस .....
 

भूमि पूजन के साथ शुरू हुई राम लला के गृह निर्माण की तैयारी

आखिर 492 साल बाद राम लला को एक बार फिर मिला इनका घर । जी हम बात कर रहे हैं अयोध्या स्थित राम जन्म भूमि की जिसे बाबर द्वारा 1525 में तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी एवं मुस्लिम समाज में बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता है ।


प्रधान-मंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंचालक डा मोहन भागवत, उत्तर-प्रदेश के मुख्य-मंत्री योगी आदित्य नाथ एवं साधु संतों की मौजूदगी में किया रखी शिला एवं संपन्न हुआ भूमि पूजन ।


नक्शा तैयार होने के बाद शुरू होगी मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया । राम लला को  जल्द ही मिलेगा उनका घर साथ ही अयोध्या को मिलेगा का नया स्वरूप । सुप्रिम कोर्ट द्वारा 70 साल से लंबित मामले पर दिये ऐतिहासिक फैसले के बाद राम जन्म भूमि को स्वरूप दिये जाने का यह पहला चरण है ।


फिलहाल राम जन्म भूमि से लगभग दो किलोमीटर स्थित राम जन्म भूमि कार्यशाला में पत्थरो को तराशने का काम पुरजोरों पर है । मंदिर के निर्माण में लगभग 35000 घनफुट पत्थरों की खपत अनुमानित है । यह कार्यशाला राम जन्म भूमि न्यास द्वारा संचालित है ।


राम मंदिर के निर्माण में राजस्थान के बंसीपुर से लाये गये पत्थरों की औसतन आयु को 1000 साल आंका गया है । 1000 साल तक इन पत्थरों की गुणवता में कोई  फरक नहीं पड़ेगा । पूर्व निर्घारित ढ़ाँचे से वास्तिविक ढ़ाँचे का आकार दुगना होगा गर्भ गृह के ऊपर अब शिखर होगी पहले के दो गुंबद की योजना के बजाय अब 5 गुंबद होंगे ।


मंदिर की ऊँचाई भी अब पहले की निर्धारित से अधिक याने कि 161 फिट होगी । भवन निर्माण की शैली उत्तर भारत पर आधारित नगारा स्टाइल होगी । निर्माण कार्य शुरू होने के बाद मंदिर के निर्माण में 3 से 3.5 साल लग जायेंगे । फिलहाल अयोध्या ही नहीं पूरे देश में जश्न का माहौल है ।


इन सबके बीच नहीं भुलाया जा सकता इस मुहिम को जीवंत रखने में विश्व हिंदू परिषद की स्वर्गीय अशोक सिंघल की भूमिका एवं कोठारी बंधुओं के बलिदान को.....

उत्तर एवं पूर्वोत्तर भारत पर छाया प्राकृति का प्रकोप

निरंतर बारिश के चलते भूस्खलन एवं जलभराव के कारण उत्तर एवं पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न राज्य जिन्में आसाम, उत्तराखंड एवं हिंमाचल प्रदेश भी शामिल हैं, में हर साल की तरह इस बार भी छाया प्राकृति का प्रकोप । चरमरा गई है संचार व्यवस्था रास्ते एवं बुनियादी सेवायें हुई ठप्प । अस्त-व्यस्त हुआ जन-जीवन ।


आसाम में भी जलभराव एवं जलावेग से 23 जिलों के 70 लाख लोग प्रभावित हैं । जलभराव एवं जलावेग से मरने वालों का आंकड़ा 80 पार कर गया है । आसाम राज्य आपदा प्रबंधन प्रधिकरण के अनुसार इन इलाकों से अब तक 50000 लोगों को रेसक्यु कर 521 राहत शिविरों में भेजा गया है । ब्रहमपुत्र,धनश्री, जियाभराली, कोपिली आदि नदियों का पानी खतरे के निशान को पार कर गया है ।


उत्तराखंड एवं हिंमाचल प्रदेश में निरंतर बारिश हुए भूस्खलन के कारण लगभग सभी मार्ग हुए अवरूद्ध जिन्में राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं । यहाँ भी भूस्खलन एवं जलावेग के कारण गाँव ढ़ह गये । हेक्टेयरों में जमीन जहाँ पर काश्तकारी होती थी उजड़ने एवं मवशियों के मरने के समाचार मिले हें । यहाँ पर भी  आपदा प्रबंधन का स्थाननीय प्रशासन की मदद से राहत कार्य जारी है ।


निरंतर बारिश के चलते जलभराव एवं जलावेग एवं भूस्खलन का होना स्वाभाविक है । विचारणीय है तो बस इन आपदाओं से होने वाली जानोमाल की क्षति । कहीं ना कहीं जरूरी है इनसे निपटने के लिये सुलझी हुई नीति के तहत रूपरेखा....

साइबर वार ने लिया खतरनाक मोड़

परमाणु एवं केमिकल वार से कहीं ज्यादा खतरनाक है साइबर वार । हेकिंग के माध्यम से नेटवर्क में अवरोध पैदा कर ध्वस्त हो सकती है किसी भी देश का बुनियादी ढ़ाँचा  एवं अर्थव्यवस्था । यहाँ तक की ध्वस्त किये जा सकते हैं सैन्य ठिकाने । कुल मिलाकर हेकिंग के जरिये किसी भी व्यवस्था के ढ़ाँचे को हिलाना । 

भारत ने भी सुरक्षा के मध्यनजर लगाया 59 से भी अधिक मोबाइल एप्लिकेशनस पर बेन । जिन्में ज्यादातर एप्लिकेशन चीन द्वारा निर्मित हैं और इनका नियंत्रण चीन में हैं । इनमें टिक-टोक,हेलो एवं वीचेट जैसी सामाजिक मीडिया प्लेटफार्म एप्लिकेशन भी शामिल हैं जिनके माध्यम से निजी डेटा इधर से उधर होने की संभावना बनी रहती है ।


हाल ही में फोरन कोरस्पोंडेंट क्लब साउथ एशिया द्वारा आयोजित आनलाइन परिचर्चा में एमपी के एडिजी एवं अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम विशेषज्ञ श्री वरूण कपूर की प्रेजेंटेशन के अनुसार साइबर वल्ड की दुनिया में जहाँ 7 बिलियन मोबाइल उपभोगता,2 बिलियन फेसबुक यूजर्स ,1 मिलियन आनलाइन बायर्स हैं एवं 144 बिलियन मेल्स का आदान-प्रदान प्रतिवर्ष होता है , बचाव का एक ही मार्ग उचित जानकारी एवं सही निर्णय ।


गुगल को जानकारी के लिये इस्तेमाल करने वालों का आंकड़ा 2 बिलियन सालाना है । साइबर सिक्युरिटी वेंचरस के हवाले से साइबर वार से होने वाले नुकसान का आंकलन 2021 तक 6 त्रिलियन यूएस डालर प्रतिवर्ष अनुमानित है । 2015 में यह नुकसान 3 त्रिलियन डालर था ।


साइबर क्राइम के माध्यम और शिकार बनते हैं नेटवर्क सब्सक्राइबर्स एवं यूजर्स । उनके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली आन लाइन एप्लिकेशनस । जिन्में मोबाइल एप्लिकेशन भी शामिल हैं । 2022 तक दुनिया भर में नेटवर्क यूजर्स का आंकड़ा  6 विलियन पार कर जायेगा जो कि उस समय की जनसंख्या का 75 प्रतिशत होगा । 2017 में यह आंकड़ा 3.8 बिलियन था । याने की उस समय की जनसंख्या का 50 प्रतिशत ।


भारत भी इस वक्त साइबर वार के दौर से गुजर रहा है । भारत में नेटवर्क यूजर्स की संख्या 560 मिलियन है और 2023 में यह आंकड़ा 650 मिलियन पार कर जायेगा । भारत नेटवर्क इस्तेमाल करने वाला चीन के बाद दूसरे नंबर का सबसे बड़ा देश है ।


अब गौर फरमाते हैं भारत में साइबर क्राइम से होने वाले नुकसान पर । स्टेटिस्टा के हवाले से 2017 में साइबर क्राइम के जरिये से भारतीय उपभोकताओं को हुए नुकसान का आंकलन 18 बिलियन यूएस डालर था । भारत ही नहीं अमेरिका जैसे संपन्न विश्व के अनेक देश हैं साइबर अटेक से प्रभावित ।



भारत में भी नीति आयोग के नेतृत्व में साइबर संस्थानों के माध्यम से सुरक्षा के मध्य-नजर नीति निर्धारण का सिलसिला जारी है ...... 
 

सीमा तनाव के पीछे चीन की दोहरी मानसिक्ता

चीन द्वारा पैदा की गई एलओसी पर तनावपूर्ण स्थिति महज एक इतफाक या फिर है एक सोची समझी साजिश के तहत वैश्विक महामारी कोविद 19 में हुई अपनी धूमिल हुई छवि से ध्यान भटकाना । चीन के बने उत्पाद के दुनिया भर के देशों द्वारा बहिष्कार किये जाने से चीन में आर्थिक मंदी की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता ।


गौर फरमाने की बात यह है कि चीन से शुरू हुए कोरोना वायरस संक्रमण जिसे कोविद 19 के नाम से भी जाना जाता है,ने आज वैश्विक महामारी का रूप ले लिया है । इस वायरस के  संक्रमण का आंकड़ा 86,29,305 पार हो गया है और इसके संक्रमण से मरने वालों की संख्या  4,58,706 है । दुनिया का शायद ही कोई ऐसा देश हो जो इस महामारी से ना जूझ रहा हो ।


खुद चीन में ही शुरूआती दौर में संक्रमण से मरने वालों का आंकड़ा गैर अधिकारिक तौर पर 1000 के पार था । अब तक चीन में कुल मिलाकर संक्रमण से 4634 मौतें हुई हैं । और यहाँ संक्रमण की दर एक मिलयन पर 59 है । जो कि अन्य देशों के मुकाबले में बहुत कम है । भारत में कोरोना संक्रमण से अब तक 12948 मौते हुई जबकि भारत में संक्रमण शुरूआत चीन से तीन महीने बाद हुई थी ।


अब चीन की योजना पाकिस्तान और नेपाल के सहयोग से सीमा पर भारत पर दबाव डलवाना है । पाकिस्तान तो पाकिस्तान नेपाल के सैनिकों द्वारा सीमा पर गोलाबारी के समाचार मिले थे । हाल ही में लद्दाख की गलवान घाटी में एलओसी में हुई भारत चीन की मुठभेड़ में भारत के 20 जवान फर्ज को अंजाम देते हुए शहीद हुए एवं 76 घायल हुए । यह लड़ाई हथियारो से नहीं चीन द्वारा कटिली तारों से लिपटे हुए डंडों से दम अजमाइश थी ।


शहीद जवानों में 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग अफिसर करनल बी संतोष बाबू सहित 1 मेजर,2 केपटन,4 लेफटिनेंट सहित अन्य रेंक के जवान शामिल हैं । जवानों को श्रद्धांजली के साथ देश में आज हो रहा है टीवी डिबेट एवं मीडिया के बेनर तले बौधिक स्तर पर चिंतन । हाल ही में विदेशी पत्रकार क्लब साउथ एशिया  द्वारा आयोजित एक वेबनार में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं हारवर्ड युनिवर्सिटी में प्रोफेसर रह चुके डा. सुब्रमणियम स्वामि का मत है कि चीन द्वारा एलओसी पर अतिक्रमण को बिना युद्ध के हटाया जाना असंभव है ।


सर्वदलिय बैठक के बाद प्रधान-मंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने दिया सेना को फ्री हेंड । अब सेना कर सकेगी स्थिति के अनुसार । मंथन के इस दौर में भी देश के एक बड़े राजनीतिक खेमें में अब भी छाई है खामोशी । सैनिकों की शाहदत पर शोक सभा का आयोजन तो होता है परंतु जब बात चीन या पाकिस्तान की आती है सेन्य कार्यवाही के सबूत माँगे जाते हैं या फिर अपना  लिया जाता है उदासीन रवैया ।


चीन द्वारा सीमाओं के अतिक्रमण के मध्यनजर अंतरराष्ट्रिय राजनतिक दबाव के साथ  जरूरी है बलपूर्वक वापिस खदेड़ा जाना । युद्ध की संभावनाओं से भी इंकार नहीं किया जा सकता.....
 
 

कोरोना संक्रमण काल में भी सक्रिय है पासों की बिसात पर राजनीति

कोरोना वायरस के संक्रमण काल में भी सक्रिय है  देश में राजनीतिक सरगर्मियाँ । चल रहा है वर्चुअल रैलियों का दौर वो भी  उस समय जब देश दो महीने की पूर्णबंदी के बाद सामान्य जन-जीवन बनाये रखने के लिये आर्थिक संकट के दौर से जूझ रहा है । यह बात और है कि आयोजकों ने इसे जनसंवाद का नाम दिया है और इनका आयोजन केंद्रिय नेतृत्व द्वारा राज्यवार हो रही हैं । हाल ही में केंद्रिय गृह मंत्री अमित भाई शाह ने पश्चिम बंगाल जन संवाद वर्चुअल रैली को संबोधित किया । उसी प्रकार केंद्रिय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महाराष्ट्र जन संवाद वर्चुअल रैली में अपने विचारों को रखा ।


केंद्रिय मंत्री सुश्री स्मृति इरानी भी दिल्ली जन संवाद वर्चुअल रैली को संबोधित करने वाली हैं । रैली में वह देंगी मोदी सरकार की एक साल की उपलब्धियों का लेखा-जोखा । अन्य केंद्रिय मंत्रियों द्वारा भी विभिन्न राज्यों के लिये की जा रही हैं वर्चुवल रैली । भारतीय जनता पार्टी द्वारा इस प्रकार कि 75 रैलियाँ सुनियोजित हैं । देश इस वक्त वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रहा है । संक्रमण का आंकड़ा 297535 पार कर गया है और संक्रमण से मरने वालों की संख्या 8498 है । लगभग 147195 लोग ठीक होकर सामान्य जीवन में लौट आये हैं । संक्रमण का आंकड़ा निरंतर बढ़ता जा रहा है ।

देश आर्थिक मंदी के दौर से जूझ रहा है । धीरे-धीरे उद्योग-धंढ़ो को खोला जा रहा है । तमाम घोष्णाओं के बावजूद देश का एक बड़ा हिस्सा जिन्में  नौकरी पेशा, उद्यमी एवं व्यसायी भी शामिल हैं आजीविका एवं बुनियादी जरूरतों की जुगाड़ में संघर्षरत है ।इन वर्चुअल रैलियों के आयोजन के पीछे का मकसद जो भी हो देश के राजनीतिक हल्कों में हड़कंप मच गया है । विपक्ष ने इन रैलियों को लेकर केंद्र पर साधा निशाना । राजस्थान के कांग्रेसी खेमें में हलचल स्पष्ट दिखाई दे रही है । आनन-फानन में यहाँ के मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत ने विधायकों और समर्थकों की मीटिंग बुलाई है ।


विधायकों और समर्थकों को जयपुर से बाहर एक प्राइवेट रिजोर्ट में ठहराया गया है । 19 जून को राज्य सभा चुनाव संभावित हैं । दिल्ली से आलाकमान द्वारा पार्टी के वरिष्ठ नेता रणदीप सूरजावाला को जयपुर भेजे जाने के समाचार मिले हैं । वह विधायकों एवं समर्थकों के साथ बैठक करेंगे । राज्य-सभा चुनाव से पहले दल विशेष द्वारा अपने विधायकों और समर्थकों की बैठक लिया जाना स्वाभाविक है और जरूरी भी है । समर्थकों के बागी होने की संभावना बनी रहती है । यूँ कि किस्सा  कुर्सी का है । मध्य-प्रदेश की राजनीतिक घटनाक्रम कांग्रेस के लिये एक सबक है । किसी ने ठीक ही कहा है कि दूध का जला फूक-फूक कर कदम रखता है ।


भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश में राजनीतिक हल-चल आम है विचारणीय है तो बस वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमणकाल में पासों की बिसात पर चमकती राजनीति.....



 

अनानास मे विस्फोटक पदार्थ डालकर हाथी की हत्या

केरल में विस्फोटक पदार्थ भरे अनानास को खाकर एक हथनी की मौत को लेकर देश फैली सनसनी । बड़ी बात हथनी पेट से थी । अनानास खाने के बाद तड़फती हुई  हथनी नदी के पानी में घुस गई और वहीं ढ़ेर हो गई । विस्फोट से उसकी जीब और मुह नष्ट हो गया । मरते वक्त भी शायद उसे अपने पेट में पल रहे बच्चे की चिंता थी ।


मामला केरल के मल्लापुरम जिले के थिरूविजामकुन्नू जंगलात क्षेत्र की कोट्टापदम ग्रामपंचायत के अंतर्गत आता है । यहाँ 27 मई को वेल्लियार नदी में एक हथनी मृत पाई गई । क्षेत्रिय जंगलात अधिकारियों का मानना है कि हथनी खाने की तलाश में साइलेंट वेली नेशनल पार्क से भटकती हुई यहाँ पहुँची होगी । सोशल मीडिया एवं न्यूज चेनलों पर सुर्खियों में आने के बाद मामले ने तूल पकड़ा ।


पूर्व केंद्रिय मंत्री मेनका गाँधी ने राज्य सरकार और इलाके के वर्तमान सांसद राहुल गाँधी की निष्क्रियता पर निशाना साधते हुए के वन मंत्री से इस्तीफे की माँग की है । राज्य के मुख्यमंत्री ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही का आशवासन दिया है । जंगलात विभाग द्वारा मामले की तहकीकात जारी है । जंगलात विभाग ने  वारदात के मध्य-नजर गश्त बड़ा दी है ।

सबसे बड़े शिक्षित राज्य केरल में जहाँ हाथी की पूजा होती है विचारणीय है तो बस विस्फोटक पदार्थ खिलाकर हाथी की हत्या.....

 

उड़ीसा एवं वेस्ट बंगाल में तबाही का मंजर

उड़ीसा एवं वेस्ट बंगाल में जारी है तबाही का मंजर । बवंडर एवं भयंकर बारिश से चरमरा गई है प्रशासनिक व्यवस्था । मार्ग हुए अवरूद्ध ठप हुई संचार व्यवस्था । स्वयं प्रधान-मंत्री नरेंद्र भाई मोदी लेने पहुँचे संज्ञान  और की वेस्ट बंगाल की मुख्य-मंत्री ममता बेनर्जी से मुलाकात ।


क्षेत्रीय मौसम विभाग के अनुसार  20 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 30 मिनट पर भूस्खलन चालू हुआ और साड़े चार घंटे तक चला । याने कि सात बजे समाप्त हुआ । समुद्री किनारों पर हवा का दबाव 150 -160 किलोमीटर प्रति घंटा एवं कोलेकता में हवा का दबाव 112 किलोमीटर दर्ज हुआ । बवंडर का ज्यादा असर दक्षिण परगना में दिखाई दिया सागर द्वीप के पास के रिहायशी इलाकों में भूस्खलन के समाचार मिले हैं ।


उड़ीसा के जिले भी बवंडर से प्रभावित हुए हैं । बालासौर,भदरक,केंद्रपाड़ा,जाजपुर एवं मयूर भंज । दामरा में हवा का दबाव 120 किलोमीटर प्रतिघंटा,पारादीप में में 106 किलोमीटर प्रतिघंटा एवं बालासौर में 91 किलोमीटर प्रतिघंटा दर्ज हुआ । विशेषज्ञों का मानना है कि बवंडर का दबाव 2019 एवं 2009 से ज्यादा था ।


सूत्रों के अनुसार बवंडर से पूरे  वेस्ट बंगाल एवं उड़ीसा में भारी नुकसान पहुँचा है । लगभग 6 लाख 58 हजार  लोगों को विस्थापित किया गया है जिनमें से 5 लाख वेस्ट बंगाल के हैं । बवंडर से मरने वालों का आंकड़ा 72 पार कर गया है ।


केंद्र ने बवंडर ग्रस्त इलाकों के लिये वेस्ट बंगाल को 1000 करोड़ एवं उड़ीसा को 1500 करोड़ की राहत राशि दिये जाने की घोषणा की है । एनडीआरएफ द्वारा स्थाननीय प्रशासन की मदद से जलभराव एवं प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य जारी है ।

निरंतर बारिश वा बवंडर के चलते  जलभराव एवं भूस्खलन  स्वाभाविक हैं ,विचारणीय है तो बस इन प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जान-माल की क्षति । कहीं न कहीं जरूरी है इनसे निपटने के लिये राज्य एवं केंद्र सरकारों द्वारा सुलझी हुई नीति के तहत रूपरेखा...

जारी है प्रवासी मजदूरों का भारी संख्या में पलायन

भारी संख्या में महानगरों से हो रहे प्रवासी मजदूरों के पलायन को लेकर कांग्रेस ने  उठाये सवाल एवं की कोविड 19 के संक्रमण के दौरान छाई मंदी के मध्य-नजर प्रवासी मजदूरों एवं जरूरतमंद गरीबों के विस्थापन संबंधी राष्ट्र व्यापी नीति की माँग ।


हालांकि प्रधान-मंत्री नरेंद्र भाई मोदी द्वारा दिये गये अपने राष्ट्र के नाम संदेश में पुख्ता इंतेजामात का दावा करते हुए जहाँ हैं वहीं पर रहने की ताकीद की थी । राज्य सरकारों द्वारा भी माकूल इंतेजामात की संकेत मिलते रहे हैं । मकान मालिकों से भी अपने यहाँ रह रहे प्रवासी मजदूरों से भाड़ा न लेने की ताकीद की थी ।


स्कूलों को आश्रय गृह में तब्दील कर दिया गया एवं सरकारी तंत्र के साथ धार्मिक एवं सामाजिक संस्थानों जिनके साथ  औद्योगिक एवं राजनीतिक दल भी शामिल हैं ने जरूरतमंदों के लिये भोजन व्यवस्था की । कई जगह सूखे राशन वितरण के भी संकेत मिले हैं ।


तमाम इंतेजामात के बावजूद प्रवासी मजदूरों का पलायन जारी है । ऐसा क्या है कि वो अपनी जान की परवाह किये बिना अपने गाँव जाने के लिये मीलों का सफर  पेदल ही तय करने के लिये झुंड बना कर निकल लिये ।


कभी दिल्ली के आनंद विहार बस अडडे तो कभी मुंबई के बांद्रा स्टेशन के बाहर प्रवासियों का भारी तादाद में जमवाड़ा पिछले दिनों नजर आया । इतना ही नहीं सिमेंट मिक्सर में छिपकर लखनउ जा रहे 18 प्रवासियों को इंदोर में बाहर निकाला गया ।


रेल की पटरियों के किनारे मीलों तक पैदल चलना फिर थककर रेलवे लाइन पर सो जाना । हाल ही ओरंगाबाद में माल गाड़ी के नीचे पटरियों में सोये कुछ मजदूर के कुचले जाने का मामला मीडिया की सुर्खियों में नजर आया ।


हालांकि प्रधान मंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये 20 लाख करोड़ रूप्ये के पेकेज का ऐलाान किया है जो कि जीडीपी का लगभग 10 प्रतिशत है । प्रधान मंत्री राज्यों के मुख्य मंत्रियों के साथ निरंतर संपर्क में हैं ।


माकूल इंतेजामात एवं तमाम कवायदों के बावजूद प्रवासी मजदूरों के पलायन के मध्यनजर सियासतदानों के लिये अब जरूरी है, मौजूदा रूपरेखा का पुनः मुल्यांकन एवं पूर्ण बंदी के दौरान एवं बाद में सुलझी हुई विस्थापन नीति...

कश्मीर में आज भी सक्रिय जहिादी गतिविधियाँ

हम सीमा के उस पार कोविड 19 के संक्रमण के प्रकोप से निपटने के लिये जीवन रक्षक दवाइयाँ भेजते हैं । बदले में सीमा के उस पार से भेजे जाते हैं आतंकवादी । हमने उन्हें अपनाने के लिये हटाई जम्मू कशमीर से 370 लेकिन आज भी वहाँ पर सक्रिय हैं जिहाद के नाम पर अलगाववादी गतिविधियाँ ।


देश भर में सबसे सस्ता खाने का अनाज एवं रियायतों के पुलिंदे के बावजूद कहीं न कहीं झलक जाता है अलगाववाद । घर एवं धार्मिक स्थल बन जाते हैं आंतकवादियों के ठिकाने ।


सियासत एवं आवाम के बीच की कशमकश के बीच चपेटे में आते हैं स्थिति पर काबू पाने के लिये गये अर्ध सैनिक बल एवं पुलिस के जवान । मुठभेड़ में मारे गये जवानों की मौत को शाहदत का जामा पहनाकर कुछ दिन माहौल गर्म । उसके बाद सियासी बजार ठंडा ।

बाटला हाउस एंकाउंटर में ढे़र हुए आतंकवादियों के लिये टसुवे बहाने वाले राजनीतिज्ञ एवं संसद पर हुए हमले के मुख्य आरोपी अफजल गुरू की फाँसी की मुखालफत करने वाले खेमें में नजर आती है वही चिरपरिचत खामोशी ।

विचारणीय है तो बस जिहादियों के फितूर के मध्य-नजर सैन्य-अर्ध सैनिक बलों के जवानों की कुर्बान जिंदगियाँ और इनके बीच सिसकती हुई दो आँखें ...

परस्पर सदभाव संवाद एवं शांति से होगी कोविड 19 पर विजय

महामारी के इस इस दौर में पीड़ित हैं वे हमारे अपने हैं । सबके लिये राहत कार्य ही हमारा एक मात्र संकल्प यह विचार हैं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंचालक डा. मोहन भागवत के । वह वर्तमान परिदृश्य और हमारी भूमिका पर राष्ट्र को आनलाइन उदबोधित कर रहे थे । कोविड 19 पर विजय पाने के लिये उन्होने परस्पर सदभाव संवाद एवं शांति पर बल दिया ।

कोविड 19 के संक्रमण से निपटने में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भी निभा रहा है महत्वपूर्ण भूमिका । देश भर में अपने 55725 स्थानों पर अपने 300809 स्वयंसेवकों के माध्यम से चल रहा है राहत कार्य ।  देश में आपदा की स्थिति हो या फिर प्रशासनिक व्यवस्था ।

संघ अपने स्व्यंसेवकों के माध्यम से सियासत का कंधे से कंघा मिलाकर सहयोग करता आ रहा है । क्या फरक पड़ता है कि सरकार भारतीय जनता पार्टी की हो या कांग्रेस की ।


विभाजन के विस्थापितों के राहत कार्य में संघ की भूमिका के मघ्य-नजर देश के प्रथम प्रधान-मंत्री पंडित जवाहर लााल नेहरू ने पहली गणतंत्र दिवस परेड में संध को शामिल होने का न्यौता दिया था ।


दशकों से संघ देश को विश्व की मानवता के नेतृत्व योग्य बनाने में सियासत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रयासरत है....

 

पालघर हत्याकांड की सीबीआई जाँच की माँग

पूर्ण बंदी के दौरान देश भर में सुरक्षा इंतेजामात के मध्य-नजर मुंबई से मात्र 90 किलोमीटर पालघर में अचानक 200 लोगों का जमवाड़ा वो भी पुलिस स्टेशन के सामने । दो साधुओं को पुलिस ठाने से बाहर लाया जाता है और भीड़ पत्थर, डंडों एवं लाठियों से पीटकर- पीटकर साघुओं को मार डालती है । यहाँ तक की उनके ड्राइवर को भी नहीं बख्शा जाता ।


16 अप्रेल को घटे इस कांड का सोशल मीडिया पर मामला वायरल होने पर राज्य सरकार 48 घंटे बाद संज्ञान लेती है । उससे पहले इसे चोरी की अफवाह के तहत हत्या माना जा रहा था । मृतक साधुओं के संबंध जूना अखाड़े से बताये जा रहे हैं । वे कांदीवली से सिलवासा अपने गुरू के अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहे थे ।

संत कल्पवृक्ष गिरी  70 साल के एवं सुशील गिरी 35 साल के थे । हालांकि प्रदेश के मुख्य-मंत्री उद्धव ठाकरे ने इसे अफवाह के कारण हत्या मानते हुए राजनीति का जामा पहनाने से बाज आने की तकीद की है । अब तक 110 लोगों को गिरफतार किया जा चुका है ।

मामले की जाँच महाराष्ट्र केडर के दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कर रहे हैं । देश के संत समाज में मामले को लेकर अक्रोश है । घटनाक्रम का विश्लेषण करते हुए  मौका ए वारदात में पुलिस एवं लोकल प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते मामले की सीबीआई से जाँच कराने की माँग की है ।


जहाँ संतों की हत्या को लेकर पूरे देश में सनसनी है वहीं समय-समय पर असहिष्णुता की मुखलफत करने वाला समाज का एक बुद्धिजीवी वर्ग जिन्में नेता,अभिनेता और चंद पत्रकार भी शामिल हैं खामोश हैं । यह वही वर्ग है जो असहिष्णुता को लेकर राष्ट्रीय संमान लौटाने की बात करता है ।

पालघर में संतों की हत्या का खुलासा तो समय के साथ हो ही जायेगा । गुनाहगारों को सजा भी मिलेगी  विचारणीय है तो बस फिरकापरस्ती की राजनीति....

समरथ को नहीं दोष गोसाई

पूर्व प्रधान मंत्री एच डी देवीगोडा के पौत्र एवं पूर्व मुख्य मंत्री कुमार स्वामी के सपुत्र का विवाह समारोह आज मीडिया की सुर्खियों में है । कंप्लीट लाक डाउन की धज्जियाँ सरे आम उड़ी इस विवाह समारोह में 2000 लोगों के शामिल होने के समाचार हैं ।

कोविड 19 से निपटने के लिये देश में कंप्लीट लाक डाउन के दौरान प्रधान मंत्री नरेंद्र भाई मोदी की ताकीद पर  देश के 130 करोड़ नागरिक अपने घरों में सिमटे हुए हैं और सोशल डिस्टिंग का अनुपालन कर रहे हैं ।

हलांकि परिवार के सदस्यों का कहना है कि विवाह में केवल 60 लोग शामिल हुए थे । 60 लोगों के लिये 10 केमरा मेन/फोटोग्राफरों की मौजूदगी समझ से परे है ।कंप्लीट लाक डाउन के उलंघन करने वालों से प्रशासन सख्ति से निपट रहा है ।

अंतिम यात्रा में भी 10 से ज्यादा लोग शामिल नहीं हो सकते । ऐसे में बड़े पैमाने पर ऐसे समारोह का आयेजन बिना प्रशासनिक ढ़ील के असंभव है । कोविड 19 से निपटने के लिए जूझ रहे हमारे कोरोना वारियरस के मनोबल के मध्यनजर विचारणीय है तो बस राम चरित मानस की पंक्ति समरथ को नहीं दोष गोसाई याने कि  नियमों के अनुपालन में दोहरे मानदंड...

संपादक

डा. अशोक बड़थ्वाल

Mobile : 91-9811440461

editor@dhanustankar.com

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समाचार

1 - वरिष्ठ पुलिस अधिक्षक डॉ महेश भारद्वाज राष्ट्रपति पुलिस पदक से संमानित

2 - दिल्ली के जाबांज पुलिसकर्मी मुख्यमंत्री द्वारा संमानित

3 - 32 बच्चे प्रधान मंत्री राष्ट्रिय बाल पुरूस्कार से संमानित

4 - जल बोर्ड में अनियमितताओं के मध्यनजर विशेष विधान-सभा सत्र की माँग

5 - टीका सुरक्षित है इसमें डर जैसा कुछ भी नहीं

6 - जल बोर्ड में फंड के धाँधली को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने साधा निशाना

7 - रिपब्लिक डे परेड के लिये पूर्ण चैख्सी एवं माकूल इंतेजामात

8 - यमुना जल में यमुना जल में अमोनिया की मात्रा 10.12 पीपीएम

9 - लुभावनी स्कीमों के माध्यम से हेकिंग कर करोड़ों का चूना

10 - पहली खेप में दिल्ली के 2.74 लाख कोरोना वारियर्स को लगेगा टीका

11 - कृषि कानूनों के निरस्तिकरण की माँग को लेकर राज भवन का घेराव

12 - कोरोना योद्धा स्वर्गीय डॉ. हितेश गुप्ता के परिवार को एक करोड़ की सहायता राशि

13 - लव जिहाद के लिये कठोर कानून की माँग

14 - निशुल्क कोरोना वेकसिन की माँग

15 - कुड़ियों दी लोहड़ी

16 - कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया गौरी शंकर मंदिर पर हनुमान चालिसा का पाठ

17 - 15 जनवरी को कांग्रेस का राष्ट्रव्यापी किसान अधिकार जन आंदोलन

18 - वायु सेना एवं रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जीवाड़ा

19 - वेकसिन पर तुष्टिकरण की राजनीति

20 - पल्ला झाड़ रही है मयुनिसिपल्टि एवं दिल्ली की सरकार

21 - मोदी जी विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता

22 - पराली के नाम पर 10 करोड़ के विज्ञापन पर सीबीआई जाँच की माँग

23 - चाणक्य पुरी में सुरक्षा युनिट को मिली नई मुख्यालय बिल्डिंग

24 - सिंघु बार्डर पर किसानों के लिये फ्री इंटरनेट सुविधा

25 - अब सीधा खाते में ट्रासफर होगी स्कूली छात्र की छात्रवृति

26 - पार्टी कार्यालयों में 136 वाँ स्थापना कांग्रेस का स्थापना दिवस

27 - ब्लोक स्तर पर महिला प्रतिनिधियों की भी होगी नियुक्ति

28 - 78 फीसदी किसान मोदी जी के साथ

29 - हाइटेक पुलिस बीट बाक्स

30 - मजबूत एवं समर्पित कार्यकत्ताओं को ही मैदान में उतारा जायेगा

31 - एमसीडी एवं दिल्ली सरकार के बीच मल्ल युद्ध

32 - कृषि बिलफाड़ना वास्तविक मुद्दों से भटकाने का एक नया ड्रामा

33 - किराये के नाम पर 2500 करोड़ की हेराफेरी का आरोप बेबुनियाद