
दिल्ली: नगर निगम की स्थाई समिति के नाम से ही प्रकट होता है की यह एक स्थाई समिति है जो कभी भंग नही होती, बस जब भी नगर निगम का चुनाव होता है तो उसके बाद इसके सभी सदस्य नये चुने जाते हैं फिर पांच साल यह समिति स्थापित रहती है इसके एक तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं और उनकी जगह नये सदस्य आ जाते हैं। दिल्ली प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि विगत 31 मार्च को वित्त वर्ष समाप्ति के साथ से स्थाई समिति के कुछ सदस्य रिटायर हुए जिसमे आम आदमी पार्टी के भीतर कुछ प्रमुख नेता रिटायर हुए, उसके बाद से "आप" नेता भ्रम फैला रहे हैं की भाजपा ने स्थाई समिति भंग कर दी है जबकि ऐसा कुछ नही है, स्थाई समिति विधमान है।
"आप" नेताओं का स्थाई समिति को लेकर रोज़ का विलाप एक पुरानी कहावत "छज बोले तो बोले छलनी भी बोले जिसमे 72 छेंक" को चरितार्थ कर रहा है।यह "आप" नेता जो आज दिल्ली नगर निगम के नियमों का हवाला दे कर रोज़ भ्रम जाल फैला रहे हैं, खुद इन्होने 2022 में दिल्ली नगर निगम चुनाव जीतने के बाद लगभग 30 माह तक स्थाई समिति सहित नगर निगम की किसी भी समिति का गठन चुनाव नही होने दिया था, तब ना इन्हे नगर निगम के नियमों की चिंता थी ना दिल्ली के ठप्प हुए विकास कार्यों की।
दिल्ली भाजपा प्रवक्ता ने कहा है की समय के साथ साथ देश के हर नगर निगम ही नही सभी विभागों की आर्थिक शक्ति बढ़ती रहती हैं और दिल्ली नगर निगम के आयुक्त की आर्थिक शक्ति में बढ़ोतरी वर्तमान हालात देख कर, प्रोजेक्ट मूल्यों को समझते हुए किया गया है। यदि "आप" ने 30 माह तक स्थाई समिति का गठन बाधित ना किया होता तो शायद निगमायुक्त की आर्थिक शक्ति भी इतनी ना बढ़ती।