नई दिल्ली 10, Mar 2026

लेख

1 - धर्मेंद्र हुए पंचतत्व में विलीन

2 - बिहार की जानता ने फिर एक बार साबित कर दिया कि हथेली में सरसों नहीं उगाया जा सकता

3 - जेट सिक्योरिटी के साथ विसर्जन के लिए निकला लाल बाग का राजा

4 - खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे

5 - एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य के लिये योग

6 - ऑपरेशन सिंदूर न्याय की अखंड प्रतिज्ञा

7 - देश के लोकतंत्र को मज़बूत करने के लिए बाबा साहिब का अमूल्य योगदान

8 - दिल्ली सरकार के 100,000करोड़ से क्षेत्र में उन्नति की संभावनाओं को मिलेगी मजबूती

9 - दशक के बाद बिखरा झाड़ू 27 साल बाद खिला कमल फिर एक बार

10 - स्वर्णिम भारत,विरासत और इतिहास पर आधारित इस बार का गणतंत्र दिवस समारोह

11 - महाराष्ट्र में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

12 - तमाम कवायदों के बावजूद बीजेपी तीसरी बार हरियाणा में सरकार बनाने को अग्रसर

13 - श्रॉफ बिल्डिंग के सामने कुछ इस अंदाज से हुआ लाल बाग के राजा का स्वागत

14 - प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही शुरू हुआ बीजेपी का सदस्यता अभियान

15 - देश के सीमांत इलाकों में तैनात सैनिकों में भी दिखा 78 वें स्वतंत्रता दिवस का जज्बा

16 - २०२४-२५ के बजट को लेकर सियासत विपक्ष आमने सामने

17 - एक बार फिर तीसरी पारी खेलेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी

18 - केजरिवाल के जमानत पर रिहा होने पर शुरु हुई नई कवायदें

19 - मतदान की दर धीमी आखिर माजरा क्या

20 - क्यूं चलाना चाहते हैं केजरीवाल जेल से सरकार

21 - 2004-14 के मुकाबले 2014-23 में वामपंथी उग्रवाद-संबंधित हिंसा में 52 प्रतिशत और मृतकों की संख्या में 69 % कमी

22 - कर्तव्य पथ दिखी शौर्य की झलक

23 - फ़ाइनली राम लल्ला अपने आशियाने में हो गये हैं विराजमान

24 - राजस्थान का ऊँट किस छोर करवट लेगा

25 - एक बार फिर गणपति मय हुई माया नगरी मुंबई

26 - पत्रकारिता की आड़ में फर्जीवाड़े के खिलाफ एनयूजे(आई) छेड़ेगी राष्ट्रव्यापी मुहीम

27 - भ्रष्टाचार, तुस्टिकरण एवं परिवारवाद विकास के दुश्मन

28 - एक बार फिर शुरू हुई पश्चिम बंगाल में रक्त रंजित राजनीति

29 - नहीं होगा बीजेपी के लिऐ आसान कर्नाटक में कांग्रेस के चक्रव्यूह को भेद पाना

30 - रद्द करने के बाद भी नहीं खामोश कर पायेंगे मेरी जुबान

31 - उत्तर-पूर्वी राज्यों के अल्पसंख्यकों ने एक बार फिर बीजेपी पर जताया भरोसा

32 - 7 लाख तक की आमदनी टैक्स फ्री

33 - गुजरात में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

34 - बीजेपी आप में काँटे की टक्कर

35 - सीमित व्यवस्था के बावजूद धूम-धाम से हो रही है छट माइय्या की पूजा

36 - जहाँ आज भी पुजा जाता है रावण

37 - एक बार फिर माया नगरी हुई गणपतिमय

38 - एक बार फिर लहराया तिरंगा लाल किले की प्राचीर पर

39 - बलवाइयों एवं जिहादियों के प्रति पनपता सहनभूतिक रुख

40 - आजादी के अमृत महोत्सव की कड़ी के रूप में मनाया जा रहा है 8 वाँ विश्व योग दिवस

41 - अपने दिग्गज नेताओं को नहीं संभाल पाई कांग्रेस पार्टी

42 - ज्ञान व्यापी मस्जिद के वजु घर में शिवलिंग मिलने से विवाद गहराया

43 - आखिर क्यूँ मंजूर है इन्हे फिर से वही बंदिशें.....

44 - पाँच में से चार राज्यों में लहराया कमल का परचम

45 - पेट्रोलियम, फर्टिलाइजर एवं खाद्य सामाग्री पर मिलने वाली राहत में लगभग 27 फीसदी की कटौती

46 - जे&के पुलिस के सहायक उप निरीक्षक बाबूराम शर्मा मरणोपरांत अशोक चक्र से संमानित

47 - आखिर कौन होंगे सत्ता के इस महाभोज के सिकंदर

48 - ठेके आन फिटनेस सेंटर ऑफ छा गए केजरीवाल जी तुस्सी

49 - मुख्य सुरक्षा अधिकारी हुए पंचतत्वों विलीन

50 - दिल्ली में यमुना का पानी का बीओडी लेवेल 50 के पार

2019 में सत्ता का महाभोज

आगामी लोक-सभा चुनाव आने वाले समय में किसी चुनौती से कम नहीं । मौजूदा राजनीतिक समीकरण के चलते नहीं होगा आसान भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में गठित एनडीए अलायंस के लिये सियासत में अपना वजूद बरकरार रखना । कांग्रेस वा उसके सहयोगियों द्वारा छेड़ी गई एंटी भा.ज.पा. मुहिम और महागथबंधन का असर आगामी चुनावों में पडने से भी इंकार नहीं किया जा सकता ।
 
 
इसमें दो राय नहीं कि प्रधान-मंत्री नरेंद्र भाई मोदी के नेतृत्व में गठित केंद्र सरकार की नीतियों से भारत का दर्जा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठा  है । लेकिन कहीं ना कहीं जीएसटी और नोट-बंदी को लेकर देश के बयवसायिक तबके में अंदरूनी तौर पर नाराजगी  है । इसमें दो राय शुरूवाती दौर में मंदी आई थी लोगों को करेंसी के लिये घंटों लंबी कतार में लगने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ा था लेकिन समय के साथ परिस्थितियाँ दुरस्त हो गई । 
 
 
सुप्रिम कोर्ट का रफेल पर लिये गये फैसले  साफ हुई छवि ने लिया राम-मंदिर का रूप । देश में सेक्युलर वा एंटी सेक्युलर के दौर को देखकर कहीं ना कहीं महसूस होता है कि विपक्ष की पकड़  कमजोर हुई है धीली नहीं ।  1982 में दंगों में दोषी पाये जाने पर कांग्रेस के कभी लोकप्रिय रहे नेता सज्जन कुमार को अदालत द्वारा दिये गये  आजीवन कारावास  के फैसले ने विपक्ष मे  हड़कंप मचा दिया ।
 
 
मामलों का खुलासा परत दर परत जारी है । सी.बी.आई. के डायरेक्टर अलोक वर्मा बनाम आस्थाना का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ था कि विपक्ष द्वारा जारी की गई भ.ज.पा. राष्ट्रीय अध्यक्ष आमित भाई शाह वा वित्त मंत्री अरूण जेटली की बिमारी पर विवादस्पद बयानबाजी फिलाहल मीडिया की सुर्खियों में बनी हुई है । फिलहाल वार और पलटवार का सिलसिला जारी है ।
 
 
त्रिपल तलाक विधेयक के संसद के पटल में लाये जाने से फिरकापरस्ती के लिये इस्लाम की मुखालफत करने वाले उलेमाओं की हई फजीहत और कहीं ना कहीं मुस्लिम महिलाओं के बीच कहीं ना कहीं बनी मौजूदा सरकार की पेथ । रही बात किसानों के कर्जे माफी की तो सरकार जिसकी बने वायदा खोखला ही साबित होंगा । 
 
 
राजनीतिक हलचल के मध्य-नजर कहीं ना कहीं भारी पड़ सकती है मिशन मोदी से हटकर जिम्मेदार हुकमरानों की सार्वजनिक तौर पर दी जा रही बयान-बाजी । कहीं पर राम के नाम पर तो कहीं हनुमान जी की वंशावली का पिटारा । प्रेस-वार्ता में महिलाओं से संबंधित अपराधों की व्याख्या करते हुए पीठासीन मुख्यमंत्री की विवादस्पद बयानबाजी ।
 
 
सत्ता के इस महायुद्ध में कहीं ना कहीं जरूरी है राजनीति के चाणक्य के लिये अभेदय व्युहरचना । युद्ध के बाद सत्ता के महाभोज मजा ही कुछ और होता है । फिर वह भोज ही क्या जो यूँ ही निपट जाये .....
 

07:34 pm 19/01/2019

संपादक

डा. अशोक बड़थ्वाल

Mobile : 91-9811440461

editor@dhanustankar.com

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