नई दिल्ली 18, Aug 2026

लेख

1 - आने वाले वर्षों में शक्ति की सप्तधारा से देश को मिलेगी नई गति

2 - रक्त रंजित राजनीति से मिली मुक्ति बंगाल में पहली बार निखरा कमल

3 - कैसे होंगे केरल के सियासी समीकरण

4 - कौन सा खेला खेलेंगी ममता बैनर्जी पश्चिम बंगाल में

5 - धर्मेंद्र हुए पंचतत्व में विलीन

6 - बिहार की जानता ने फिर एक बार साबित कर दिया कि हथेली में सरसों नहीं उगाया जा सकता

7 - जेट सिक्योरिटी के साथ विसर्जन के लिए निकला लाल बाग का राजा

8 - खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे

9 - एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य के लिये योग

10 - ऑपरेशन सिंदूर न्याय की अखंड प्रतिज्ञा

11 - देश के लोकतंत्र को मज़बूत करने के लिए बाबा साहिब का अमूल्य योगदान

12 - दिल्ली सरकार के 100,000करोड़ से क्षेत्र में उन्नति की संभावनाओं को मिलेगी मजबूती

13 - दशक के बाद बिखरा झाड़ू 27 साल बाद खिला कमल फिर एक बार

14 - स्वर्णिम भारत,विरासत और इतिहास पर आधारित इस बार का गणतंत्र दिवस समारोह

15 - महाराष्ट्र में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

16 - तमाम कवायदों के बावजूद बीजेपी तीसरी बार हरियाणा में सरकार बनाने को अग्रसर

17 - श्रॉफ बिल्डिंग के सामने कुछ इस अंदाज से हुआ लाल बाग के राजा का स्वागत

18 - प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही शुरू हुआ बीजेपी का सदस्यता अभियान

19 - देश के सीमांत इलाकों में तैनात सैनिकों में भी दिखा 78 वें स्वतंत्रता दिवस का जज्बा

20 - २०२४-२५ के बजट को लेकर सियासत विपक्ष आमने सामने

21 - एक बार फिर तीसरी पारी खेलेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी

22 - केजरिवाल के जमानत पर रिहा होने पर शुरु हुई नई कवायदें

23 - मतदान की दर धीमी आखिर माजरा क्या

24 - क्यूं चलाना चाहते हैं केजरीवाल जेल से सरकार

25 - 2004-14 के मुकाबले 2014-23 में वामपंथी उग्रवाद-संबंधित हिंसा में 52 प्रतिशत और मृतकों की संख्या में 69 % कमी

26 - कर्तव्य पथ दिखी शौर्य की झलक

27 - फ़ाइनली राम लल्ला अपने आशियाने में हो गये हैं विराजमान

28 - राजस्थान का ऊँट किस छोर करवट लेगा

29 - एक बार फिर गणपति मय हुई माया नगरी मुंबई

30 - पत्रकारिता की आड़ में फर्जीवाड़े के खिलाफ एनयूजे(आई) छेड़ेगी राष्ट्रव्यापी मुहीम

31 - भ्रष्टाचार, तुस्टिकरण एवं परिवारवाद विकास के दुश्मन

32 - एक बार फिर शुरू हुई पश्चिम बंगाल में रक्त रंजित राजनीति

33 - नहीं होगा बीजेपी के लिऐ आसान कर्नाटक में कांग्रेस के चक्रव्यूह को भेद पाना

34 - रद्द करने के बाद भी नहीं खामोश कर पायेंगे मेरी जुबान

35 - उत्तर-पूर्वी राज्यों के अल्पसंख्यकों ने एक बार फिर बीजेपी पर जताया भरोसा

36 - 7 लाख तक की आमदनी टैक्स फ्री

37 - गुजरात में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

38 - बीजेपी आप में काँटे की टक्कर

39 - सीमित व्यवस्था के बावजूद धूम-धाम से हो रही है छट माइय्या की पूजा

40 - जहाँ आज भी पुजा जाता है रावण

41 - एक बार फिर माया नगरी हुई गणपतिमय

42 - एक बार फिर लहराया तिरंगा लाल किले की प्राचीर पर

43 - बलवाइयों एवं जिहादियों के प्रति पनपता सहनभूतिक रुख

44 - आजादी के अमृत महोत्सव की कड़ी के रूप में मनाया जा रहा है 8 वाँ विश्व योग दिवस

45 - अपने दिग्गज नेताओं को नहीं संभाल पाई कांग्रेस पार्टी

46 - ज्ञान व्यापी मस्जिद के वजु घर में शिवलिंग मिलने से विवाद गहराया

47 - आखिर क्यूँ मंजूर है इन्हे फिर से वही बंदिशें.....

48 - पाँच में से चार राज्यों में लहराया कमल का परचम

49 - पेट्रोलियम, फर्टिलाइजर एवं खाद्य सामाग्री पर मिलने वाली राहत में लगभग 27 फीसदी की कटौती

50 - जे&के पुलिस के सहायक उप निरीक्षक बाबूराम शर्मा मरणोपरांत अशोक चक्र से संमानित

युद्व से जुड़ा जैसलमेर का इतिहास

जैसलमेर शहर के बीचों-बीच 5 किलोमीटर के रेडियस में फैला जैसलमेर फोर्ट जिसे स्थाननीय भाषा में सोनार किले के नाम से जाना जाता है । मात्र किला ही नहीं लगभग लगभग 500 से भी अधिक घरों का समावेश है और आबादी 3000 है । किले के परिसर में राजा-रानी निवास ,होटल हिंदू वा जैन मंदिर और छोटे-छोटे बजार हैं ।  दिन के समय सोने की तरह चमकते जैसलमेर की शान इस किले का निर्माण 1156 में भाटी राजा जैशल ने किया था ।
शहर के मध्य गट़ीसर झील जिसमें अज बोटिंग का आनंद लिया जाता है  के एक तरफ दो मंजिला झारोखों से युक्त टीलों का पोल कभी शहर में आने वाले साधु संतों वा यात्रियों के ठहरने का स्थान था । यह टीलों का पोल शहर से झील में प्रवेश करने का द्वारभी है । दूसरी तरफ हिंगला माता का मंदिर । हिंगला माता का बड़ा मंदिर पाकिस्तान में स्थित है ।
और इन सबके बीच शहर से 12 और 111 किलोमीटर स्थित लोगवाला बार्डर स्थित वार मेमोरियल म्युजियम भारत पाकिस्तान के बीच युध और सैनिकों की शाहदत की याद ताजा कर देते हैं । इन म्युजियम में पाकिस्तान के जब्त किये हुए टैंक और हथियारों का सामावेश है । 1972 की इस लड़ाई में पाकिस्तान को मुइ की खानी पड़ी थी ।
और इन सब के बीच जैसलमेर शहर से 120 किलोमीटर एल.ओ.सी.  से  स्तंभ की तरह खड़ा तनोत स्थित माता का मंदिर । खासियत यह है कि 1965 के भारत-पाकिस्तान युध के दौरान पाकिस्तान द्वारा  गिराये गये 3000 बंब बेअसर हो गये और मंदिर परिसर पर एक खरोच  भी नहीं आई ।  मदिर में आज भी कुछ बंब नुमाइश के लिये रखे हैं ।
1965 की लडाई के बाद मंदिर की देख-रेख वा व्यवस्था कील जिम्मेदारी अब बी.एस.एफ. के पास हैॅ और यहाँ बी.एस.एफ.की चौकी भी है । 1971 की लड़ाई में माता की कृपा से बी.एस.एफ. और पंजाब रेजिमेंट ने माँ की कृपा से पाकिस्तानी सेना को धूल चटा दी और लोंगवाला को पाकिस्तानी टेंकों का कब्रिस्तान बना दिया ।
लोंगवाला में हुई जीत के बाद मंदिर परिसर में विजय स्तंभ का निर्माण किया गया और हर साल 16 दिसंबर सैनिकों की याद में विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है । जैसलमेर से जुड़े युद्ध के इतिहास के बीच यादें ताजा हो जाती हैं भारत और पाकिस्तान के बीच हुई जंग की । हमारे रणबाँकुरे जवानों के  शाहदत की  । 
दिलचस्प बात यह है कि 1971 की लड़ाई में लगभग 90000 पाकिस्तानी सैनिकों ने सरंडर किया जिन्में अफसर भी शामिल थे । पेश है एक झलक....

 

08:32 pm 11/07/2017

संपादक

डा. अशोक बड़थ्वाल

Mobile : 91-9811440461

editor@dhanustankar.com

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