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दिल्ली: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि के लिए मोदी सरकार का ट्रम्प के सामने घुटने टेकने का परिणाम बताते हुए आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज एवं पूर्व पर्यावरण मंत्री गोपाल राय है ने कहा कि मोदी जी ने भारत को अमेरिका का उपनिवेश बना दिया है। इसलिए ट्रम्प भारत को रूस से सस्ता तेल नहीं लेने दे रहा है। उधर पीएम मोदी के दोस्त अडानी पर अमेरिका में केस चल रहा है। वह अपना केस खत्म कराने की एवज में अमेरिका में 95 हजार करोड़ रुपए का निवेश करने जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभी तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें 3 रुपए बढ़ी हैं, जल्द ही कुछ और वृद्धि होगी और अब यह सिलसिला चलता रहेगा। देश के आर्थिक हालात बिल्कुल अच्छे नहीं हैं। ऐस में मोदी सरकार को सच्चाई जनता के सामने रखनी चाहिए।
पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी पर सौरभ भारद्वाज ने देश के सबसे बड़े उद्योगपति गौतम अडानी का जिक्र करते हुए कहा कि उनके ऊपर अमेरिका में भ्रष्टाचार का एक मुकदमा हुआ है कि उन्होंने भारत में करीब दो हजार करोड़ रुपए की रिश्वत दी। रिश्वत भारत में दी गई, लेकिन मुकदमा अमेरिका ने दर्ज किया और इससे भारत सरकार परेशान हो गई। भारत सरकार ने यह नहीं कहा कि देश में रिश्वत चली है तो यहां मुकदमा चलेगा। अब अडानी अमेरिका की सरकार से कह रहे हैं कि वे वहां 10 बिलियन डॉलर यानी 95 हजार करोड़ रुपए का निवेश करेंगे, जिससे अमेरिका में 15 हजार नौकरियां लगेंगी और इसके बदले में उनके ऊपर से मुकदमा खत्म कर दिया जाए।
सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीब आदमी से कह रहे हैं कि विदेश यात्रा मत करो और सोना मत खरीदो, ताकि भारत का पैसा और फॉरेन एक्सचेंज बाहर न जाए। वहीं, दूसरी तरफ उनके परम मित्र अडानी अपने भ्रष्टाचार के केस में अपनी जान बचाने के लिए देश का 95 हजार करोड़ रुपए डॉलर में अमेरिका भेज रहे हैं। इस पर सरकार चुप है। आज भारत लगभग अमेरिका की कॉलोनी यानी उपनिवेश बन गया है। भारत सरकार अमेरिका से पूछ रही है कि क्या वह रूस से सस्ता तेल खरीद ले, लेकिन अमेरिका ने मना कर दिया है। सरकार ने अमेरिका के सामने घुटने टेक दिए हैं और सस्ता तेल न मिलने के कारण देश में तेल के दाम बढ़ा दिए गए हैं। अभी दाम तीन रुपए बढ़े हैं, कुछ दिनों बाद पांच रुपए बढ़ेंगे और यह सिलसिला काफी दिनों तक चलता रहेगा, क्योंकि देश के आर्थिक हालात बहुत खराब हैं।
सरकार देश के सामने आर्थिक हालात की सच्चाई नहीं बताना चाहती। हाल ही का डेटा बता रहा है कि इंजीनियरिंग करने वाले 85 फीसदी बच्चों की नौकरी नहीं लगी है और एमबीए स्टूडेंट्स का भी लगभग यही हाल है। जिनके पास नौकरियां थीं, उन्हें सॉफ्टवेयर कंपनियां निकाल रही हैं। चीजें महंगी हो रही हैं, ट्रेड डेफिसिट बढ़ रहा है, इंपोर्ट बढ़ रहा है, एक्सपोर्ट घट रहा है और प्रोडक्शन हो नहीं रहा है। देश के आर्थिक हालात बिल्कुल भी अच्छे नहीं हैं और सरकार को यह सच्चाई जनता के सामने रखनी चाहिए।
उधर, दिल्ली के पूर्व पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी के कहने के बाद लोगों ने भी अपने घरों से गाड़ियां निकालना बंद कर दिया होगा या कम से कम यह सोच तो रहे होंगे कि आज अपनी गाड़ी लेकर बाहर निकलें या न निकलें। देश में पेट्रोल और डीजल का भारी संकट आ गया है। गैस का संकट तो पहले से ही था। लोगों को गैस सिलेंडर नहीं मिल रहे थे और होटलों में तो इसे बंद ही कर दिया गया था। यह जो पूरा संकट भारत के सामने आया है, इसके बारे में कहा जा रहा है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कम हो रहा है, क्योंकि जब हम गैस, तेल, डीजल और पेट्रोल की खरीदारी करते हैं तो विदेशी मुद्रा भंडार कम होता है। प्रधानमंत्री ने देश हित में अपील की है और निश्चित रूप से इससे बड़ी देशभक्ति और क्या हो सकती है? लेकिन क्या किसी ने कभी यह सोचने की कोशिश की है कि हमारे देश में जो पेट्रोल, डीजल और गैस का संकट पैदा हुआ है, उसका असल जिम्मेदार कौन है? लोगों के मन में आ रहा होगा कि अमेरिका, इजराइल या ईरान इसके जिम्मेदार हैं, क्योंकि अगर इजराइल, ईरान और अमेरिका का युद्ध नहीं छिड़ता तो यह पेट्रोल-डीजल का संकट पैदा नहीं होता।