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दिल्ली: नगर निगम सुप्रीम कोर्ट के सर्वेक्षण की आड़ में अब दिल्ली के दुकानदारों, फैक्ट्री मालिकों, बैंक्वट और होटल रेस्टोरेंट व्यापारियों सहित रिहायशी क्षेत्रों में दुकान चलाकर छोटा मोटा काम धंधा करने वालों को बिजनेस सीज करने का नोटिस भेजकर उनको प्रताड़ित कर रही है। नोटिस में स्पष्ट लिखा है कि रिहायशी जमीन पर कमर्शियल काम नही किया जा सकता, अगर ऐसा हो रही है तो दुकान या बिजनेस सील कर दिया जाएगा।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में रिहायशी क्षेत्र में कमर्शियल गतिविधियों की पहचान करके रिपोर्ट सौंपने की बात कही गई है लेकिन दिल्ली नगर निगम के नोटिस में लिखा है कि क्षेत्रों की विस्तृत सर्वेक्षण में आवासीय परिसरों का गैर आवासीय उदेश्य के लिए हो रहे दुरुपयोग संबधी सभी मामलों की व्यापक और क्षेत्र-वार सूची तैयार करना, एकत्रित डाटा सटीक और सत्यापित होना चाहिए, जिसमें गलत आंकलन के लिए अतिरिक्त आयुक्त इंजीनियरिंग जिम्मेदार होगा और शपथ पत्र के साथ रिपोर्ट सौंपी जानी है। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित दिल्ली नगर निगम लोगों को राहत देने की बजाय अनाधिकृत/नियमित, स्वीकृत कालोनियों, ग्रुप हाउसिंग सोसायटी और विकसित प्लाटों के सहार छोटा मोटा धंधा करने वाले लाखों लोगों पर प्रहार करके सीलिंग करने की तैयारी कर रही है, जबकि उत्तम नगर में तो कुछ सीलिंग की कार्यवाही करना शुरु तक कर दिया है।
दिल्ली नगर निगम द्वारा जारी नोटिस के बाद दिल्ली के व्यापारियों और लाखों रिहायशी क्षेत्रों में अपनी अजीविका चलाने वाले लोगों में हड़कंप मचा हुआ है, क्या भाजपा अपने पिछले 15 वर्षों वाले निगम शासन को दोहराऐगी, जब जनता को राहत दिए बिना हजारों दुकानों और घरों को सील कर दिया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार की भांति भाजपा की सरकार को भूमिश्रित उपयोग के नियम में एक्सटेंशन देकर अथवा कानून बनाकर लोगों की अजीविका की सुरक्षा करने की तरफ कदम उठाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में 69 कॉलोनियों की 351 सड़कों को मिश्रित भू-उपयोग के लिए नोटिफाई नही करवा पाना भाजपा की नाकामी है, जिसमें दिल्ली में लोकसभा के सातों सांसद भी मिश्रित भू-उपयोग नोटिफाई के लिए लंबित पड़ी 351 सड़कों का नोटिफिकेशन जारी करवाने में विफल साबित रहे है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने भी झूटा दावा किया था कि दिल्ली में सीलिंग नही होगी, लेकिन अब दिल्ली नगर निगम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जो नोटिस जारी कर रही है उससे हजारों व्यवसायिक सम्पति धारकों और रिहायशी क्षेत्रों में छोटी मोटी दुकानों की सीलिंग से कौन बचाऐगा।