दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज कमेटी के पूर्व अध्यक्ष हरविंदर सिंह सरना द्वारा राहुल गांधी को माफी देने की बात कहने और श्री अकाल तख्त साहिब को मात्र एक बिल्डिंग (इमारत) कहने के मामले में जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गडगज्ज के कार्यालय पहुंचकर अपनी शिकायत सौंपी और हरविंदर सरना को पंथ से निष्कासित करने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में दिल्ली कमेटी के उपाध्यक्ष आत्मा सिंह लुबाणा, सदस्य रमिंदर सिंह स्वीटा, सुखबीर सिंह कालरा, सुखविंदर सिंह बब्बर तथा पंजाब धर्म प्रचार के प्रमुख मनजीत सिंह भोमा शामिल थे।

इस संबंध में जानकारी देते हुए कमेटी अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका और महासचिव सरदार जगदीप सिंह काहलों ने बताया कि आज कमेटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय में यह शिकायत सौंपी है। शिकायत में कहा गया है कि श्री हरविंदर सिंह सरना, पूर्व अध्यक्ष दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और शिरोमणि अकाली दल (बादल) दिल्ली इकाई के वरिष्ठ नेता, ने हाल ही में सिख कौम की दुश्मन कांग्रेस पार्टी के महासचिव राहुल गांधी से मुलाकात कर कांग्रेस पार्टी को 1984 में श्री दरबार साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब पर किए गए सैन्य हमले तथा नवंबर 1984 में हुई सिख नरसंहार के आरोपों से माफ करने की बात कही, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि इतना ही नहीं, बल्कि एक निजी चैनल पर बातचीत के दौरान छठे पातशाह श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी द्वारा स्थापित श्री अकाल तख्त साहिब को मात्र एक इमारत (बिल्डिंग) कहना बहुत बड़ा अपराध है, जिससे संगतों में भारी रोष है। उन्होंने जत्थेदार साहिब से अपील की कि श्री अकाल तख्त साहिब को ध्वस्त करने वाली सिखों की दुश्मन पार्टी के महासचिव राहुल गांधी से मुलाकात करना अत्यंत निंदनीय है। इससे पहले भी कई बार ये श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों को मानने से इंकार करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब श्री हरविंदर सिंह सरना और श्री परमजीत सिंह सरना दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष थे, तब उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा जारी गुरपुरब और संगरांद की तिथियों के विपरीत जाकर और आदेशों की अवहेलना करते हुए अपनी मर्जी से आयोजन कर संगतों में भ्रम फैलाया।हरविंदर सिंह सरना ने श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशानुसार बनाई गई विद्वानों की कमेटी को “झुंड” कहा था। सिंह साहिबानों की एकजुटता को “यूनियन” कहना और फिर श्री अकाल तख्त साहिब को पत्र भेजकर यह कहना कि उन्हें अपने बयान पर कोई पछतावा नहीं है, पंथ को बड़ी क्षति पहुंचाने जैसा है। हरविंदर सिंह सरना ने मीडिया में यह कहा कि वे गुरुद्वारों में केंद्र की दखलअंदाजी के कारण राहुल गांधी से मिलने गए थे। लेकिन यह बहुत हैरानी की बात है कि अकाली दल के 2 सांसद और 15-20 अन्य सिख सांसद होने के बावजूद राहुल गांधी से संसद में मुद्दा उठाने के लिए कहना संदेहास्पद है।