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दिल्ली: जम्मू स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंसिटिट्यूट ऑफ़ मेडिकल एक्सीलेंस की मान्यता को रद्द किए जाने को सांप्रदायिक एंगल देते हुए कांग्रेस पार्टी के जे एंड के प्रभारी डॉ नसीर हुसैन ने उच्च स्तरीय जाँच की माँग की । उनका कहना है कि शैक्षिक सत्र 2025-26 के लिए एमबीबीएस कोर्स की अनुमति दी गई थी । यह कालेज का पहला बैच था । क्यूंकि 50 में से 42 छात्र मुस्लिम थे कालेज की मान्यता रद्द कर दी गई । हालांकि यह एडमिशन नीट की परीक्षा के आधार पर दिया गया था । इस क्षेत्र में मुस्लिम आबादी अधिक है और छात्रों ने अपने घर के पास कॉलेज चुनना बेहतर समझा। उन्होंने कहा कि इसके बाद नेशनल मेडिकल कमीशन ने कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सितंबर 2025 में एमबीबीएस कोर्स की अनुमति दी गई थी, तब क्या इंफ्रास्ट्रक्चर और नियमों की जांच नहीं हुई थी? क्या ईडी, सीबीआई, आयकर विभाग, चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की तरह नेशनल मेडिकल कमीशन का भी दुरुपयोग हो रहा है?
उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में हुई घटनाओं का हवाला देते हुए भाजपा सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को सांप्रदायिक रंग देने और इसे जानबूझकर तबाह करने का आरोप लगाया है। मध्य प्रदेश के बैतूल का मामला उठाते हुए बताया कि वहां अब्दुल नईम नामक व्यक्ति ने अपने निजी 20-22 लाख रुपए खर्च कर एक स्कूल का निर्माण कराया था। सभी आवश्यक अनुमति लेकर स्कूल शुरू किया गया, ताकि वहां के आदिवासी बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके। लेकिन मुसलमान व्यक्ति द्वारा स्कूल शुरू करने के कारण भाजपा के इकोसिस्टम ने अफवाह फैलाई कि वहां मदरसा चलाया जा रहा है। आखिर में जिला प्रशासन ने बिना किसी जांच, नोटिस या सुनवाई के स्कूल पर बुलडोजर चला दिया। उन्होंने पूछा कि क्या इस मामले में कलेक्टर बताएंगे कि उनके ऊपर किनका और कैसा दबाव था? उन्होंने सवाल किया कि अधिकारी अगर दबाव में आकर एक स्कूल को गिरा रहे हैं तो उनकी ट्रेनिंग मसूरी में हो रही है या नागपुर में?
कर्नाटक के बेलगावी की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां मुस्लिम हेडमास्टर को हटवाने के लिए कुछ कट्टरपंथी तत्वों ने स्कूल की पानी की टंकी में जहर मिला दिया, जिससे 12 बच्चे बीमार हो गए। जांच होने पर चार आरोपी गिरफ्तार किए गए। असम के नलबाड़ी जिले में 24 दिसंबर 2025 को सेंट मेरी स्कूल में चल रही क्रिसमस की तैयारियों को तहस-नहस कर दिया गया। उत्तर प्रदेश में भी विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों द्वारा क्रिसमस की छुट्टी रद्द करने और समारोह न मनाने का दबाव बनाया गया, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया।
देश में शिक्षण संस्थानों का खुलेआम भगवाकरण किया जा रहा है; वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देने वाले संस्थानों पर कई तरह से हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जामिया मिलिया इस्लामिया में 68.73 करोड़ रुपए, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 306 करोड़ रुपए की बजट कटौती की गई है। जेएनयू में पिछले सात साल से फंडिंग में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, जबकि छात्र और सेंटर बढ़ते जा रहे हैं। राज्यों में हर साल स्कूल बंद हो रहे हैं और शिक्षकों की भर्ती नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि अगर किसी शिक्षण संस्थान से मुस्लिम या क्रिश्चियन नाम जुड़ा होता है, तो उसके ऊपर लगातर हमला किया जाता है। इन हालात में आज अच्छे छात्र देश छोड़ रहे हैं और लगातार ब्रेन ड्रेन हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश में केवल 27 प्रतिशत छात्र ही उच्च शिक्षा तक पहुंच पाते हैं, जबकि अमेरिका और चीन में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत के करीब है।
वहीं जम्मू-कश्मीर कांग्रेस की सह-प्रभारी दिव्या मदेरणा ने कहा कि भाजपा शिक्षा के पवित्र आंगन को सियासत का अखाड़ा बना रही है और अपने सांप्रदायिक एजेंडे को थोप रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा युवाओं की तर्कशीलता खत्म करना चाहती है ताकि उनकी व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का एजेंडा सफल हो सके। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में शिक्षा का अधिकार कानून लाया गया था, और भाजपा सरकार शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करने का अधिकार ला रही है। उनकी माँग है ने मांग की कि श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज को सुधारात्मक कदम उठाकर दोबारा खोला जाए। बैतूल में गिराए गए स्कूल को फिर से बनाकर संचालन की अनुमति दी जाए। दोनों मामलों की हाई पावर्ड कमेटी से जांच कराकर दोषियों को सजा दी जाए। बुलडोजर संस्कृति और जहरीली राजनीति को बंद किया जाए।
हालांकि परमिशन रद्द किए जाने के एनएमसी की अलग दलील है । गत 2 जनवरी को श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल एक्सीलेंस के निरीक्षण के बाद उनकी जांच टीम ने पाया कि कॉलेज में तय मानदंड के अनुसार ढाँचा और स्टाफ नहीं है । रिपोर्ट में बताया गया कि शिक्षकों की संख्या में 39 फीसदी कमी है । ट्यूटर एवं सीनियर रेसिडेंट की 65 फीसदी कमी आईपीडी की ऑक्यूपेंसी 45 फीसदी है ।