दिल्ली की मुख्यमंत्री ओ जोन के नाम पर दिल्ली की जनता के साथ दोहरा खेल खेल रही है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने निशाना साधते हुए कहा कि जब दिल्ली हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेश है कि यमुना के 22 किलोमीटर दायरे वाले मकानों को तोड़ा जाएगा, फिर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता बिना कैबिनेट की बैठक करे और हाई कोर्ट में ओ जोन में तोड़फोड़ पर रोक लगाने की याचिका दायर के कैसे मुख्यमंत्री ने 8 तारीख को एनजीटी के आदेश पर संबधित विभागों, एजेंसियों और मंत्रियों के साथ बैठक करके बाहर आकर बड़े-बड़े दावे किए कि सब क्लियर हो गया है, अब दिल्ली में ओ जोन की कॉलोनियों में तोड़फोड़ नही होगी। क्यों मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद यमुना बाजार-कश्मीरी गेट के यमुना किनारे बसे 310 मकानों के तोड़फोड़ रुक नही रही है?
यमुना बाजार में 12 मई को डीडीए के 310 मकानों को तोड़ने के सख्त आदेश हैं कि 32 घाटों किनारों बसे 10 हजार से अधिक लोगों को उजाड़ा जाएगा, जबकि यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि यहां बुलडोजर की कार्यवाही बिना किसी औपचारिक सर्वे के हो रही है। दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के अधिकारियों ने पिछले शुक्रवार रात क्षेत्र का दौरा किया और लोगों को जगह खाली करने के आदेश चिपका दिए हैं। 30-40 वर्षों से बसे लोगों को सरकार द्वारा किसी वैकल्पिक व्यवस्था नही की गई और मजबूर लोग सड़कों पर रहने को मजबूर हैं क्योंकि उनके पास जाने के लिए कोई जगह नहीं है, वे पीढ़ियों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और आस-पास के क्षेत्रों से अपनी आजीविका कमा रहे हैं और बच्चों की स्कूली शिक्षा बाधित होने भविष्य अधर में है।
जब कांग्रेस सरकार ने 1,739 कॉलोनियों को अस्थायी प्रमाण पत्र दिए और विकास का मार्ग प्रशस्त किया था उस समय दिल्ली के गरीबों ने सोचा कि उनके घर बच गए है और वे अपने भविष्य को बेहतर बना सकेंगे। लेकिन भाजपा की दोहरी, बदले और विनाश की नीति की साजिश के शिकार गरीब दिल्लीवासियों को उजड़ने का डर सता रहा है। उन्होंने कहा कि एक साल पहले जब से भाजपा दिल्ली में सत्ता में आई है, उस वक्त सबका साथ, सबका विकास का नारा दिया था, क्या लाखों लोगों पर बुलडोजर की तलवार ही गरीबों का विकास है।