नई दिल्ली 13, Mar 2026

लेख

1 - धर्मेंद्र हुए पंचतत्व में विलीन

2 - बिहार की जानता ने फिर एक बार साबित कर दिया कि हथेली में सरसों नहीं उगाया जा सकता

3 - जेट सिक्योरिटी के साथ विसर्जन के लिए निकला लाल बाग का राजा

4 - खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे

5 - एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य के लिये योग

6 - ऑपरेशन सिंदूर न्याय की अखंड प्रतिज्ञा

7 - देश के लोकतंत्र को मज़बूत करने के लिए बाबा साहिब का अमूल्य योगदान

8 - दिल्ली सरकार के 100,000करोड़ से क्षेत्र में उन्नति की संभावनाओं को मिलेगी मजबूती

9 - दशक के बाद बिखरा झाड़ू 27 साल बाद खिला कमल फिर एक बार

10 - स्वर्णिम भारत,विरासत और इतिहास पर आधारित इस बार का गणतंत्र दिवस समारोह

11 - महाराष्ट्र में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

12 - तमाम कवायदों के बावजूद बीजेपी तीसरी बार हरियाणा में सरकार बनाने को अग्रसर

13 - श्रॉफ बिल्डिंग के सामने कुछ इस अंदाज से हुआ लाल बाग के राजा का स्वागत

14 - प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही शुरू हुआ बीजेपी का सदस्यता अभियान

15 - देश के सीमांत इलाकों में तैनात सैनिकों में भी दिखा 78 वें स्वतंत्रता दिवस का जज्बा

16 - २०२४-२५ के बजट को लेकर सियासत विपक्ष आमने सामने

17 - एक बार फिर तीसरी पारी खेलेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी

18 - केजरिवाल के जमानत पर रिहा होने पर शुरु हुई नई कवायदें

19 - मतदान की दर धीमी आखिर माजरा क्या

20 - क्यूं चलाना चाहते हैं केजरीवाल जेल से सरकार

21 - 2004-14 के मुकाबले 2014-23 में वामपंथी उग्रवाद-संबंधित हिंसा में 52 प्रतिशत और मृतकों की संख्या में 69 % कमी

22 - कर्तव्य पथ दिखी शौर्य की झलक

23 - फ़ाइनली राम लल्ला अपने आशियाने में हो गये हैं विराजमान

24 - राजस्थान का ऊँट किस छोर करवट लेगा

25 - एक बार फिर गणपति मय हुई माया नगरी मुंबई

26 - पत्रकारिता की आड़ में फर्जीवाड़े के खिलाफ एनयूजे(आई) छेड़ेगी राष्ट्रव्यापी मुहीम

27 - भ्रष्टाचार, तुस्टिकरण एवं परिवारवाद विकास के दुश्मन

28 - एक बार फिर शुरू हुई पश्चिम बंगाल में रक्त रंजित राजनीति

29 - नहीं होगा बीजेपी के लिऐ आसान कर्नाटक में कांग्रेस के चक्रव्यूह को भेद पाना

30 - रद्द करने के बाद भी नहीं खामोश कर पायेंगे मेरी जुबान

31 - उत्तर-पूर्वी राज्यों के अल्पसंख्यकों ने एक बार फिर बीजेपी पर जताया भरोसा

32 - 7 लाख तक की आमदनी टैक्स फ्री

33 - गुजरात में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

34 - बीजेपी आप में काँटे की टक्कर

35 - सीमित व्यवस्था के बावजूद धूम-धाम से हो रही है छट माइय्या की पूजा

36 - जहाँ आज भी पुजा जाता है रावण

37 - एक बार फिर माया नगरी हुई गणपतिमय

38 - एक बार फिर लहराया तिरंगा लाल किले की प्राचीर पर

39 - बलवाइयों एवं जिहादियों के प्रति पनपता सहनभूतिक रुख

40 - आजादी के अमृत महोत्सव की कड़ी के रूप में मनाया जा रहा है 8 वाँ विश्व योग दिवस

41 - अपने दिग्गज नेताओं को नहीं संभाल पाई कांग्रेस पार्टी

42 - ज्ञान व्यापी मस्जिद के वजु घर में शिवलिंग मिलने से विवाद गहराया

43 - आखिर क्यूँ मंजूर है इन्हे फिर से वही बंदिशें.....

44 - पाँच में से चार राज्यों में लहराया कमल का परचम

45 - पेट्रोलियम, फर्टिलाइजर एवं खाद्य सामाग्री पर मिलने वाली राहत में लगभग 27 फीसदी की कटौती

46 - जे&के पुलिस के सहायक उप निरीक्षक बाबूराम शर्मा मरणोपरांत अशोक चक्र से संमानित

47 - आखिर कौन होंगे सत्ता के इस महाभोज के सिकंदर

48 - ठेके आन फिटनेस सेंटर ऑफ छा गए केजरीवाल जी तुस्सी

49 - मुख्य सुरक्षा अधिकारी हुए पंचतत्वों विलीन

50 - दिल्ली में यमुना का पानी का बीओडी लेवेल 50 के पार

के.पी.एस.गिल एक सुपर हीरो

सिंघम ने किया देश को अलविदा । जी हाँ हम बात कर रहे हैं 1958 बैच के आई.पी.एस. आफिसर कंवर ल सिंह गिल की । गिल की देश में आतंकवाद और सांप्रदायिक दंगों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका रही है । एक जमाना था पंजाब में आतंकवाद हो या अलिगढ़ के सांपगदायिक दंगे निपटने का बीडा़ गिल का ।
26 मई 2017 को दिल का दौरा पड़ने से गिल ने किया देश को अंतिम सलाम । वो 18 मई को दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में इलाज के लिये  भरती थे । दबंगाई और जिंदादिली उनकी रग-रग में बसी थी इसीलिये  गिल को पंजाब का शेर कहा जाता है । अपने पुलिस केरियर के दौरान वह असम के आई.जी. वा पंजाब के डी.जी. रहे । उनके साहासिक कार्यों के लिये उन्हें 1989 में पदमश्री के खिताब से नवाजा गया ।

वह इंडियन हाकी फेडरेशन के अघ्यक्ष थे वा उन्होंने इंस्टिट्यूट आफ कनफलिक्ट मनेजमेंट की स्थापना की । वह अच्च्छे वक्ता के साथ अच्च्छे लेखक वा संपादक भी थे । उन्हें कंसलटेंट काउंटर टेरिजम के रुप में भी जाना जाता था । दबंगाई के साथ जिंदा-दिली उनके उनके नस-नस में भरी थी ।

गिल के जीवन पहलू को जानने के लिये पेश हैं दीनदयाल शोध संसथान में 15 अगस्त 2006 के दिन गिल द्वारा द्विराष्ट्रवादी मांसिक्ता और आतंकवाद पर दिये गये व्याख्यान के कुछ अंश । विभाजन का दौर था  और गिल मात्र दस साल के थे उन के परिवार को पाकिस्तान में बलवाइयों ने खत्म कर दिया था बस वह और उन की बहन बचे थे । अंतिम घड़ी में उनकी माँ ने उनसे वचन लिया बिेटा दुशमनों का मुकाबला करना ।उनके हाथ नहीं आना । यदि एैसी घड़ी आती भी है तो पहले अपनी बहन को फिर खुद को मार देना मगर दुशमनों के हात नहीं आना ।

सांप्रदायिक दंगों का महौल था और निपटने की जिम्मेदारी गिल की । उन्होने दोनो ही पक्ष के महानुभावों को बुलाया और आपसी रजामंदी से सुलाह की पेशकश की । मगर दोनो ही पक्ष टस से मस नहीं । हारकर गिल ने दोनो पक्षों के मीानुभावों को बुलाया और एक घंटे की मोहलत दी साथ ही समझााया की यदि बलवा होगा तो पुलिस गोली चलायेगी और यह गोली आम आदमियों पर नहीं.... क्यों समझ गये ना...
दी गई मियाद से पहले ही दोनो पक्षों ने सुलह होने के साथ बलवा शांत हुआ । पंजाब में खालिस्तान की समस्या वा आतंकवाद से निपटने के स्टाइल के कारण वह लंबे अरसे तक मीडिया की सुर्खियों तथा राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बने रहे । उन्हें पंजाब का शेर भी कहा जाता है । रहा विवाद तो वह हर सेलीबगकटी के जीवन का हिस्सा होता है और समय के साथ खुद ही खत्म हो जाता है ।

आतंकवाद और अलगाव के पनपते परिवेश में विचारणीय है तो बस पंजाब में खालिस्तान को लेकर हुई समस्या से निपटने में गिल की भूमिका । जेहन में बस एक ही सवाल क्या मिलेगा देश को ऐसा सिंघम......
 

09:47 am 03/06/2017

संपादक

डा. अशोक बड़थ्वाल

Mobile : 91-9811440461

editor@dhanustankar.com

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